कालसर्प योग (Kalsarpa Yog) व मंगलीक दोष (Manglik Dosh) का भय

एक कहावत है कि संसार में उसी वस्तु की नकल होती है जिसकी माँग (Demand) अधिक होती है. प्राचीन समय में ज्योतिष केवल आवश्यकता थी परन्तु आज के दौर में आवश्यकता के साथ-साथ ज्योतिष एक फैशन भी बन गया है. ज्योतिष का अर्थ है 'ज्योति दिखलाना'. मनुष्य के जीवन में लाभ-हानि, अनुकूलता-प्रतिकूलता, शुभता-अशुभता या अच्छा-बुरा कब-कब होगा इसको ज्योतिष के माध्यम से ही जाना जा सकता है.
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कालसर्प योग (Kalsarpa Yog)
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कृष्णमूर्ति पद्धति का आधार है वैदिक ज्योतिष (Krishnamoorthy system is based on Vaidic Jyotish)

भारतीय ज्योतिष विधा में वैदिक ज्योतिष सबसे प्राचीन और प्रमाणिक माना जाता है (The indian Vaidic Astrology is the father of all new Astrology System)। वैदिक ज्योतिष को आधार मानकर आज भी ज्योतिषशास्त्री इसके विभिन्न विषयों को लेकर प्रयोग करते रहते हैं। ज्योतिष की कृष्णमूर्ति पद्धति जिसका प्रादुर्भाव दक्षिण भारत में हुआ है, यह भी वैदिक ज्योतिष पर ही आधारित है। ...
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वेदारम्भ संस्कार(Vedh Arambh Sanskar)

प्राचीन काल में गुरू शिष्य परम्परा का प्रचलन था। इस समय छात्रों को वेद की शिक्षा दी जाती थी। वेद की शिक्षा छात्रों को आचार्य या गुरू देते थे। भारतीय दर्शन में वेद की जानकारी एवं उनका अध्ययन बहुत ही शुभ माना जाता था। वेद की शिक्षा शुरू करने से पूर्व एक संस्कार किया जाता था जिसे वेदारम्भ संस्कार (Vedarambh sanskar) के नाम से जाना जाता था। आइये इसके विषय में और भी जानकारी हासिल करें।...
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शर्मीले और संकोची होते हैं कन्या राशि के जातक। (Native of Virgo are shy and diffident)

कन्या राशि की पहचान हाथ में फूल की डाली लिये कन्या है। कन्या राशि, राशि चक्र में छठे स्थान पर आता है (Virgo is the sixth sign of zodiac)। इस राशि को दक्षिण दिशा का स्वमित्व प्राप्त है (Virgo is the king of south)। ...
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हस्तक्षेप पसंद नहीं करते हैं सिंह राशि के जातक। (Native of Leo sing doesn't like interference)

सिंह राशि, राशि चक्र में पांचवें नम्बर पर आता है (Leo is the Fifth sign of zodiac)। इस राशि की पहचान सिंह हैं। इस राशि में अग्नि तत्व की प्रधानता रहती है। यह राशि स्थिर स्वभाव वाली होती है। इस राशि को पूर्व दिशा का स्वामित्व प्राप्त होता है। इस राशि के स्वामी सूर्यदेव हैं(Sun is the lord of Leo), इसमें कोई भी ग्रह उच्च या नीच का नहीं होता है। ...
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भावुक होते हैं कर्क नक्षत्र के जातक।(Native of Cancer sign known as sensitive and emotional person)

कर्क राशि राशिमंडल में चौथी राशि होती है(Fourth zodiac sign cancer)। कर्क राशि को चर राशि के नाम से जाता है। इस राशि की पहचान केकड़ा है। कर्क को उत्तर दिशा का स्वामित्व प्राप्त है (Cancer is the lord of North)। ...
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कला प्रेमी होते हैं मिथुन राशि के जातक। (Native of Gemini Sign known as art lover)

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बारह राशि चक्र में मिथुन का स्थान तीसरा है(Gemini is the third zodiac sign) । इस राशि की गिनती पुरूष राशि में की जाती है। इस राशि की पहचान है एक साथ दो व्यक्ति। इस राशि के देवता भगवान विष्णु हैं और राशि स्वामी बुध को माना जाता है (God Vishnu is the Lord of Gemini sign)।
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हस्तरेखा से जानिए अपना भाग्य (Know your fortune through Palmistry)

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गर्भावस्था के दौरान ही शिशु के हाथ में लकीरो का जाल बुन जाता है, जो कि जन्म से लेकर मृत्यु तक रेखाओ के रुप में विद्यमान रहता है। इसे हस्त रेखा (Palm line) के रुप में जाना जाता है। सामान्यतया 16 वर्ष तक की आयु के बच्चो की हाथों की रेखाओ में परिवर्तन होता रहता है।
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पश्चिमी गणित पद्धति और वैदिक ज्योतिष (Western Mathematic System and Vaidic Astrology)

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इन दिनों ज्योतिषशास्त्र में गणना के लिए पश्चमी गणित का प्रयोग खूब हो रहा है(Nowadays in Astrology western mathematics system is becoming popular)। इस पद्धति के प्रचलन का प्रमुख कारण है कि इसमें लग्न साधन करना आसान होता है और परिणाम भी बेहतर मिलता है।
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वेधवर्ग विचार(Vedh Vargh Vichar)

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शादी के समय पवित्र अग्नि के सम्मुख स्त्री और पुरूष सदा एक दूसरे का साथ निभाने का वचन देते हैं और संकल्प लेते हैं कि जीवन में सुख की घड़ी हो या दु:ख की दोनों एक दूसरे का दामन थामे रहेंगे फिर कौन सी ऐसी बात होती है जिसके कारण वचन टूट जाते हैं और रिश्ते बिखर जाते हैं। ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कि उपरोक्त स्थिति का कारण अशुभ ग्रहों(Inauspicious Planets) का प्रभाव होता है। अगर शादी के पूर्व स्त्री और पुरूष की कुण्डली का सही से मिलान किया जाए और उसके अनुसार वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किया जाए तो विवाह की सफलता की संभावना अधिक रहती है(For Happy Married it is very important that Kundli matching in a perfect way)।
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लिंग वर्ग विचार (Ling Vargh Vichar)

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भारतीय ज्योतिष परम्परा के अन्तर्गत ग्रहों एवं नक्षत्रों को अलग अलग वर्ण और विभागों में बॉटा गया है। ज्योतिष के अन्तर्गत नक्षत्रों का लिंगभेद भी किया गया है। अगर आप दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति को जानते हैं तो आपको पता होगा कि वहां 20 कूट के अन्तर्गत एक कूट आता है लिंग वर्ग। लिंग वर्ग के अन्तर्गत नक्षत्रों को तीन लिंग(Three lings of Nakshatras) के अन्तर्गत रखा जाता है जो क्रमश: इस प्रकार हैं 1.स्त्रीलिंग 2.पुल्लिंग 3.नपुंसकलिंग जो व्याकरण के अनुसार है।
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निष्क्रमण संस्कार(Nishkraman Sanskar)

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निष्क्रमण संस्कार को पोड्ष संस्कार में 6 स्थान प्राप्त है(Nishkraman Sanskar is the sixth place in podash Sanskar) , अर्थात यह संस्कार सनातन धर्म में छठा संस्कार माना जाता है। नामकरण के पश्चात सनातन धर्म में निष्क्रमण संस्कार किया जाता है(This Sanskar is doing after Namkaran Sanskar)।
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शपथ ग्रहण करने का मुहुर्त (Muhurta for oath)

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प्राचीन काल में राज हुआ करते थे। राजगद्दी पर बैठने से पहले राजाओं का राज्याभिषेक होता था, राजा इस अवसर पर जनता की देखभाल अपने पुत्र के समान करने की सौगंध लेते थे, व राष्ट्रहित में कोई भी निर्णय लेने का वादा करते थे। आज राजतंत्र समाप्त हो चला है और प्रजातंत्र स्थापित हो गया है ऐसे में राजा भले ही न रहे परन्तु शपथ की प्रथा आज भी कायम है. आज चुनाव के पश्चात लोक सभा, विधान सभा, राज्य सभा के सदस्य शपथ ग्रहण करते हैं. इनकी तरह सम्पूर्ण शासनतंत्र में कई ऐसे पद होते हैं जिनके लिये पद और गोपनियता की शपथ लेनी होती है.
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भरोसेमंद होते हैं रेवती नक्षत्र के जातक। (Native of Revti Nakshatra known as faithful & honest Person)

नक्षत्र मंडल में रेवती का स्थान 27 वां हैं (Revti is the 27th Nakshatra in the group of Constellation)। यह आखिरी नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी बुध होता है और राशि स्वामी बृहस्पति होता है (Mercury is lord of Revti Nakshatra and Jupiter is the lord of his sign)। ...
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हवाई किले बनाने में माहिर होते हैं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के जातक( Native of Uttra_Vadrapada Nakshatra known as dreamy Person)

नक्षत्रों को ज्योतिषशास्त्र की रीढ़ कहा जा सकता है। किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व, उसका स्वभाव एवं जीवनशैली कैसी होगी यह जन्म नक्षत्र से ज्ञात किया जा सकता है। किसी व्यक्ति का जन्म नक्षत्र वह होता है जिस नक्षत्र में जन्म के समय चन्द्रमा निवास करता है। इससे राशि का भी निर्धारण होता है क्योंकि हर नक्षत्र की अपने राशि होती है, बात करें उत्तराभाद्रपद नक्षत्र की तो इसके चारों चरण मीन राशि में होते हैं। इस राशि का स्वामी गुरू होता है व नक्षत्र स्वामी शनि होता है (Saturn is the lord of Uttra_Bhadrapada Nakshatra and Jupiter is the Lord of his sign)। जो व्यक्ति इस नक्षत्र में पैदा होते हैं उनपर इन सभी कारकों का प्रभाव होता है। आइये देखें कि इनका व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव होता है। ...
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परोपकारी होते हैं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के जातक। (Native of Purvabhadrapada Nakshatra are Philanthropic)

नक्षत्रों की दुनियां में पूर्वाभाद्रपद का स्थान 25वां हैं (Purvabhadrapada is the 25rd Nakshatra in the group of 27 Constellation)। इस नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति यानी गुरू होते हैं (Jupiter is the lord of Purvabhadrapada)। इस नक्षत्र का एक चरण मीन में होता है और तीन चरण कुम्भ में रहता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव व्यक्तित्व एवं उनकी जीवनशैली कैसी होती है आइये इस पर विचार करें। ...
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हिम्मती होते हैं, शतभिषा नक्षत्र के जातक (Native of Satvisha Nakshatra known as daring Personality)

शतभिषा नक्षत्र नक्षत्र मंडल में 24 वां नक्षत्र है (Satvisha Nakshatra is the 24th Nakshatra in the group of Constellation)। इस नक्षत्र को शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र का आकार चक्र के समान है जिसके बीच का हिस्सा ढ़का हुआ प्रतीत होता है। इस नक्षत्र का स्वामी राहु होता है। ...
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शांति पसंद होते हैं घनिष्ठा नक्षत्र के जातक (Native of Ghanistha Nakshatra known as peace lover)

नक्षत्र मण्डल के 27 नक्षत्रो में घनिष्ठा का स्थान 23 वां हैं (Ghanistha is the 23rd Nakshatra in the group of Constellation)। इस नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं (Mars is the Lord of Dhanishta Nakshatra) इस नक्षत्र में जो व्यक्ति जन्म लेते हैं उनका व्यवहार, उनकी जीवनशैली एवं उनका स्वभाव सभी कुछ जन्म नक्षत्र उसके स्वामी एवं राशि स्वामी पर निर्भर करता है। आइये जानें कि इस नक्षत्र में जिनका जन्म होता है उनका स्वभाव, व्यवहार एवं व्यक्तित्व कैसा होता है। ...
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