शनि और पाप ग्रह (Shani and Malefic Planets)

shani-dev-transit
 
नवग्रहों में शनि स्वयं पाप ग्रह है.जब शनि अन्य पाप ग्रहों के साथ होता है तब यह किस प्रकार का फल देता है यह उत्सुकता का विषय है.क्या शनि का पाप प्रभाव और बढ़ जाता है या शनि शुभ प्रभाव देता है.विभिन्न भावों में पाप ग्रहों से युति बनाकर शनि किस प्रकार का फल देता है.यहां इन बातों पर हम बात कर रहे हैं.

शनि और मंगल (Shani and Mangal)

मंगल को पाप ग्रह (Malefic Planet according to astrology) के रूप में मान्यता प्राप्त है.यह जिस व्यक्ति की कुण्डली में प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, अष्टम या द्वादश भाव में होता है उसे मंगली दोष (Mangalik Dosha) लगता है.इन भावों में जिनके मंगल होता है वह उग्र स्वभाव का होता है.इनमें अपना वर्चस्व दिखाने की भावना रहती है.इस भावना के कारण मंगली दोष से पीड़ित व्यक्ति का वैवाहिक जीवन कलह और विवाद का घर रहता है.जब शनि और मंगल की युति बनती है तब दोनों मिलकर और भी अशुभ प्रभाव देने वाले बन जाते हैं.व्यक्ति का जीवन अस्थिर रहता है.मानसिक और शारीरिक पीड़ा से व्यक्ति परेशान होता है.मध्यावस्था के बाद व्यक्ति का भाग्य जागता है इससे पहले व्यक्ति को अपने जीवन संघर्ष मुश्किल हालातों का सामना करना होता है.माता पिता की ओर से सुख में कमी और कठिनाई से अर्जित धन सम्पत्ति में कमी होती है.

शनि और राहु केतु (Shani and Rahu Ketu)

राहु केतु एक ही शरीर के दो हिस्से हैं और दोनों ही अशुभ फलदायक हैं.ज्योतिषशास्त्र में इन दोनों ग्रहों को छाया ग्रह के रूप में देखा जाता है.इन्हें शनि के समान ही कष्टकारी और अशुभ फल देने वाला कहा गया है.जब शनि की युति या दृष्टि सम्बन्ध इनसे बनती है तब शनि और भी पाप प्रभाव देने वाला बन जाता है.राहु और शनि के मध्य सम्बन्ध स्थापित होने पर स्वास्थ्य पर अशुभ प्रभाव होता है.शनि और राहु की युति नवम भाव में हृदय और गले के ऊपरी भाग से सम्बन्धित रोग देता है.इनकी युति कार्यों में बाधक और नुकसानदेय होती है.केतु के साथ शनि की युति भी समान रूप से पीड़ादायक होती है.इन दोनों ग्रहों के सम्बन्ध मानसिक पीड़ादायक और निराशात्मक विचारों को देने वाला होता है.
Our Free Services
शनि और सूर्य (Shani and Surya)

शनि और सूर्य पिता और पुत्र हैं फिर भी दोनों में गहरी शत्रुता है.दोनों ग्रह परस्पर एक दूसरे से विपरीत गुण रखते हैं.जिन भावों में इन दोनों ग्रहों की युति बनती है उस भाव से सम्बन्धित फल की हानि होती है.इन दोनों की युति व्यक्ति के लिए संकट का कारण बनती है.अगर इनकी युति लग्न में हो तो व्यक्ति जीवनभर संघर्ष करता रहता है परंतु उसे अपनी मेहनत के अनुरूप फल नहीं मिलता.रोग और आर्थिक तंगी के कारण व्यक्ति के मन पर निराशात्मक भाव हावी रहता है.चतर्थ भाव में शनि और सूर्य की युति होने पर व्यक्ति का मन अस्थिर होता है एवं रोजी रोजगार में भी स्थायित्व नहीं रह पाता.रोजी रोजगार एवं धनार्जन हेतु व्यक्ति को अपने पैतृक घर से दूर जाना पड़ता है.वृद्धावस्था में इन्हें तकलीफ का सामना करना पड़ता है.द्वादश भाव में शनि और सूर्य की युति होने पर व्यक्ति को लोकप्रियता मिलने की संभावना रहती है.आध्यात्म की ओर व्यक्ति का रूझान होता है.दो शादी होने की संभावना भी प्रबल रहती है.तृतीय भाव में इन दोनों की युति होने पर तुला राशि वालों को छोड़कर अन्य सभी को भौतिक सुख मिलता है.

यदि आप अपनी कुंडली में ग्रह स्थिति के बारे में जानना चाहते हैं तो ITBix.com से होरोस्कोप साफ्टवेयर ले सकते हैं या एस्ट्रोबिक्स से अपनी आनलाइन फ्री जन्मकुंडली बना सकते हैं.

Tags

Categories


Please rate this article:

5.00 Ratings. (Rated by 1 people)


Write a Comment

View All Comments

14 Comments

1-10 Write a comment

  1. 14 June, 2013 11:38:40 AM yogesh kumar sharma

    surya – shani OR KETU 2st house mai hai

  2. 14 June, 2013 11:38:04 AM yogesh kumar sharma

    surya – shani 2st house mai hai

  3. 22 December, 2011 11:11:29 PM Tapas Mishra

    I think your description is wrong Mangal in 7th should be there for Mangal dosh you mentioned 8th house in first para was that a type error?

  4. 14 January, 2010 03:54:24 AM animesh

    surya - shani 1st house mai hai,