सामुद्रिक ज्योतिष में ग्रहों के पर्वत - भाग 2 (Planet Mounts in Palmistry- part 2)



हस्त रेखा विज्ञान में  हथेली में प्रत्येक ग्रह के लिए एक निश्चित स्थान माना जाता है। हथेली में जो ग्रह जहां विराजमान होते हैं उस स्थान को उस ग्रह का पर्वत कहा जाता है। जिस प्रकार वैदिक ज्योतिष में ग्रह नीच या उच्च होते हैं कुछ इसी प्रकार यहां भी पर्वतों की विभिन्न स्थिति और उसके अनुरूप परिणाम बताए गये हैं।

बुध पर्वत (Mount Of Mercury):
सबसे छोटी उंगली यानी कनिष्ठा की जड़ में बुध ग्रह का स्थान होता है यानी यहां बुध पर्वत स्थित होता है। बुध पर्वत को भौतिक सुख, खुशहाली और धन सम्पत्ति का स्थान कहा जाता है। जिनकी हथेली में बुध पर्वत उच्च स्थिति में होता है वे अविष्कार व नई चीजो की तलाश के प्रति उत्सुक रहते हें।

हथेली में बुध उभरा होने से व्यक्ति मनोविज्ञान समझने वाला होता है जिससे लोगों को आसानी से प्रभावित कर पाता है। बुध पर्वत उन्नत होने से व्यक्ति यात्रा का शौकीन होता है और काफी यात्राएं करता है। जिनकी हथेली में यह पर्वत बहुत अधिक उभरा होता है वे काफी चालाक, धूर्त और छल कपट में उस्ताद होता हैं।

बुध पर्वत अगर असामान्य रूप से उभरा हुआ है साथ ही इस पर सम चतुर्भुज का चिन्ह दिख रहा है तो यह संकेत है कि व्यक्ति कानून का उलंघन करेगा और अपराध की दुनियां में नाम कमाएगा। अविकसित बुध पर्वत के होने से भी व्यक्ति जुर्म की दुनियां से रिश्ता कायम कर सकता है। जिनकी हथेली में यह पर्वत अस्पष्ट या सपाट है उन्हें ग़रीबी का मुंहदेख्ना पड़ता है।
 
चन्द्र पर्वत (Mount of Moon):
चन्द्र पर्वत का स्थान हथेली में अंगूठे के दूसरी ओर कलाई के नीचे होता है। इसे हस्तरेखीय ज्योतिष में कल्पना, कला, उदारता और उत्साह का स्थान माना जाता है। जिनकी हथेली में चन्द्र पर्वत विकसित होता है वे सौन्दर्योपासक होते हैं इनका हृदय कोमल और संवेदनशील होता है। ये नित नई कल्पना और ख्वाबो के ताने बाने बुनते रहते हैं। ये कला के किसी भी क्षेत्र जैसे लेखन, चित्रकारी, संगीत आदि में पारंगत होते हैं।

चन्द्रपर्वत अत्यधिक उन्नत होने से मन की चंचलता अधिक रहती है, जिसके कारण व्यक्ति में उतावलापन अधिक देखा जाता है। चन्द्र पर्वत की यह स्थिति व्यक्ति को शंकालु और मानसिक तौर पर बीमार बना देती है। यह स्थिति जिनकी हथेली में पायी जाती है वे अक्सर सिर दर्द से परेशान रहते हैं। समुद्रिक शास्त्र के मुताबिक अविकसित चन्द्र पर्वत होने से व्यक्ति हवाई किले बनाने वाला होता है। जिनकी हथेली में चन्द्र की ऐसी स्थिति होती है उनमें बहुत अधिक भावुकता पायी जाती है और कल्पना लोक में खोये रहने के कारण इनका कोई भी काम पूरा नहीं हो पाता है।

जिनकी हथेली में चन्द्र पर्वत सपाट होता है वे भावना रहित होते हैं, ये धन और भौतिक सुख के पीछे भागते हैं। इस तरह की हथेली जिनकी होती है वे जीवन में प्रेम को गौण समझते हें और लड़ाई झगड़े में आगे रहते हैं।
 
शुक्र पर्वत (Mount of Venus):
अंगूठे के नीचे जीवन रेखा से घिरा हुआ भाग शुक्र का स्थान होता है जिसे शुक्र पर्वत कहते हैं। यह पर्वत विकसीत होने पर सम्मान की प्राप्ति होती है और जीवन में आनन्द एवं खुशहाली बनी रहती है।  सामुद्रिक ज्योतिष के अनुसार उन्नत शुक्र पर्वत होने से व्यक्ति कामी होता इनके मन में हमेशा काम की इच्छा रहती है। ये ईश्वर पर यकीन नहीं करते हैं। अविकसित शुक्र होने से व्यक्ति में कायरता रहती है और ये काम वासना से पीड़ित रहते हैं।

आमतौर पर दूसरे पर्वत अगर जरूरत से अधिक विकसित हों तो नुकसान होता है परंतु शुक्र के बहुत अधिक विकसित होने पर नुकसान नहीं होता है। यह पर्वत अत्यधिक उन्नत होने से व्यक्ति साहसी होता है एवं स्वस्थ रहता है। यह स्थिति जिनकी हथेली में पायी जाती है वह सभ्य होते हैं और अपने गुणों से दूसरों को प्रभावित करते हैं।  शुक्र पर्वत हथेली में सपाट होने से व्यक्ति अकेला रहना पसंद करता है व पारिवारिक जीवन से लगाव नहीं रखता है। इस तरह की स्थिति जिस हथेली में होती है वे कठिनाईयों भरा जीवन जीते हैं और धन की कमी से परेशान रहते हैं।
 
मंगल पर्वत (Mount of Mars):
सामुद्रिक ज्योतिष के अनुसार हथेली में दो स्थान पर मंगल पर्वत होता है। एक उच्च का पर्वत होता है और दूसरा नीच का होता है। उच्च मंगल पर्वत हृदय रेखा जहां से शुरू होती उसके ऊपर स्थित होता है जबकि नीच का मंगल जहां से जीवन रेखा शुरू होती है वहां से कुछ ऊपर होता है। जिनकी हथेली में मंगल उभरा होता है वे साहसी, बेखौफ और शक्तिशाली होते हैं। मंगल पर्वत उन्नत होने पर व्यक्ति दृढ़ विचारों वाला होता है और इनके जीवन में संतुलन देखा जाता है। यही पर्वत जिनकी हथेली में बहुत अधिक उन्नत होता है वे मार पीट, लड़ाई-झगड़े में उस्ताद होते हैं। मंगल की यह स्थिति व्यक्ति को अत्याचारी बनाता है और जुर्म की दुनियां की ओर ले जाता है।

वैसे व्यक्ति जिनकी हथेली में मंगल पर्वत सामान्य रूप से उभरा होता है व लालिमा लिये होता है वे जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं और उच्च पद पर आसीन होते हैं।

जिनकी हथेली पर मंगल पर्वत का स्थान सपाट होता है वह कायर और डरपोक होते हैं ऐसा हस्त रेखीय ज्योतिष कहता है। मंगल पर्वत पर गुणा का चिन्ह होना यह संकेत देता है कि व्यक्ति की मौत किसी संघर्ष के दौरान होगी जबकि टेढ़ी मेढ़ी रेखा बताती है कि व्यक्ति किसी दुर्घटना का शिकार होगा।

उम्मीद है हथेली में पर्वत की महिमा से आप अच्छी तरह वाकिफ हो चुके होंगे, तो अब देखिये कि आपकी हथेली में कौन सा पर्वत कितना ऊँचा है।

सामुद्रिक ज्योतिष में ग्रहों के पर्वत - 1 में शनि पर्वत, सूर्य पर्वत एवं बृहस्पति पर्वत के विषय में जानकारी उपलब्ध है।

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