Muhurta for journey (यात्रा के सम्बन्ध में मुहूर्त विचार)



हम मनुष्यों को अपने जीवन में दैनिक आवश्यक्ताओं एवं विशेष कार्यों को पूरा करने के लिए यात्रा करनी होती है. जब हम किसी यात्रा पर निकलते हैं तो यही कामना करते हैं कि यात्रा सुखद और शुभ हो. सुखद और सफल यात्रा के लिए शुभ मुहूर्त में यात्रा पर निकलना ज्योतिष की दृष्टि से शुभ माना जाता है.

यात्रा के विषय में ज्योतिषशास्त्र प्राचीन काल से काफी सजग रहा है. पुराने जमाने में लोग जब देश भ्रमण के लिए निकलते थे अथवा व्यापार के लिए यात्रा पर जाते थे तब ज्योतिषशास्त्रियों से मुहूर्त निकलवाकर ही घर से बाहर कदम रखते थे. युद्ध के उद्देश्य से भी जब राजा महाराजा प्रस्थान करते थे तब भी अपने पुरोहित से शुभ समय ज्ञात कर युद्ध क्षेत्र में जाते थे.

आज का जीवन पुराने ज़माने की अपेक्षा अधिक जटिल हो चुका है इसलिए आज के समय में यात्रा के संदर्भ में मुहूर्त का विचार और भी जरूरी हो गया है. ज्योतिषशास्त्री कहते हैं अगर हम आप यात्रा से पूर्व मुहूर्त का आंकलन करलें फिर सफर पर जाएं तो जिस उद्देश्य से यात्रा कर रहे हैं उसकी सफलता की संभावना अधिक रहेगी. मुहुर्त के अनुसार यात्रा के लिए शुभ तिथि (Muhurta yatra tithi):
यात्रा सम्बन्धी मुहूर्त के नियम के अनुसार कृष्ण और शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी तिथि में सफर पर निकला जा सकता है. इसके अलावा कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को भी यात्रा के लिए श्रेष्ठ तिथि के रूप में माना गया है.

यात्रा के लिए शुभ नक्षत्र (Journey Naksahtra):
ज्योतिषशास्त्र में यात्रा मुहूर्त के अन्तर्गत अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, घनिष्ठा औरे रेवती नक्षत्र को यात्रा नक्षत्र माना गया है यानी इन नक्षत्रो में यात्रा किया जा सकता है. इन सभी यात्रा नक्षत्रों में भी अश्वनी, पुष्य, हस्त तथा अनुराधा को श्रेष्ठतम स्थान दिया गया है. पूर्वा भाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वा फाल्गुनी, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा तथा रोहिणी को मध्यम स्थान प्राप्त है. अगर समय की पाबंदी नहीं हो तो श्रेष्ठ नक्षत्र के अन्तर्गत ही यात्रा करनी चाहिए.

यात्रा के लिए शुभ दिन (Muhurta Journey day):
यात्रा मुहूर्त के अन्तर्गत सोमवार, बुधवार, गुरूवार तथा शुक्रवार को श्रेष्ठतम स्थान दिया गया है. रविवार, मंगवार और शनिवार को मध्यम कहा गया है. यहां ध्यान देने वाली बात है कि बुधवार के दिन कन्या को मायका अथवा ससुराल नहीं जाना चाहिए.

यात्रा के लिए शुभ लग्न (Muhurta yatra Lagna):
यात्रा की दृष्टि से मुहूर्त के अन्तर्गत सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, कुम्भ एवं मीन लग्न को उत्तम माना गया है. परंतु ध्यान देने योग्य बात यह है कि अगर लग्न विशेष तिथियों में पड़े तो यात्रा नहीं करनी चाहिए जैसे नन्दा तिथि यानी प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी के दिन अगर सिंह, तुला, वृश्चिक और मकर लग्न हो तो यात्रा नहीं करनी चाहिए. भद्रा तिथि यानी द्वितीया, सप्तमी, दशमी में धनु व मीन लग्न हो तो यात्रा का विचार त्याग देना चाहिए. जया तिथि अर्थात तृतीया, अष्टमी एवं त्रयोदशी के दिन अगर मिथुन या कन्या लग्न हो तब यात्रा स्थगित करना ही अच्छा होता है. चतुर्थी, नवमी एवं चतुदर्शी को रिक्ता तिथि कहा जाता है इस तिथि में अगर मेष या कर्क लग्न हो तो यह यात्रा मुहूर्त के अन्तर्गत दोषपूर्ण माना जाता है. वृष अथवा कुम्भ लग्न अगर पूर्णा तिथि अर्थात पंचमी, दशमी और पूर्णिमा के दिन हो तब भी यात्रा नहीं करनी चाहिए. मुहूर्त विज्ञान के अनुसार इन तिथि में यात्रा का उद्देश्य पूर्ण होने की संभावना बहुत कम होता है.

विशेष यात्रा सम्बन्धी मुहूर्त विचार: 

हम सभी मनुष्य को जीवन में कुछ विशेष यात्रा करनी होती है जिनका कुछ विशेष उद्देश्य होता है, इन यात्राओं में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सम्बन्धी यात्रा प्रमुख मानी जाती है.  तीर्थ यात्रा एवं धर्म कर्म सम्बन्धी यात्रा के संदर्भ में अश्विनी, पुष्य, अश्लेषा, विशाखा, अनुराधा, घनिष्ठा, शतभिषा को उत्तम नक्षत्र कहा गया है.

धन सम्बन्धी कार्य के लिए यात्रा:
धन सम्बन्धी कर्य के लिए जब यात्रा करनी हो तब भरणी, पुनर्वसु, मघा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, पूर्वा भाद्रपद में घर से प्रस्थान करना चाहिए.

विवाह के लिए यात्रा मुहूर्त: 
आर्दा, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, मूल, अभिजीत, उत्तराभाद्रपद एवं कृतिका नक्षत्र को श्रेष्ठ माना गया है.

निर्वाण के लिए उत्तम यात्रा मुहूर्त:
यूं तो जीवन मृत्यु किसी के हाथ में नहीं है फिर भी यह माना गया है कि जो व्यक्ति रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, रेवती, उत्तराषाढ़ा, उत्तराफाल्गुनी में शरीर का त्याग करते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.

Tags

Categories


Please rate this article:

2.38 Ratings. (Rated by 20 people)