Relation Between Astrology and science (ज्योतिष और विज्ञान में सम्बन्ध)



ज्योतिषशास्त्र एक प्रकार का विज्ञान है परंतु कुछ आलोचक इसे विज्ञान के रूप में स्वीकार करने से इंकार करते हैं और अपने अपने तर्क देते हैं. क्या आलोचकों के तर्क सही हैं और ज्योतिष विज्ञान है अथवा नहीं आइये देंखें.

सिद्धांतों, नियमों, प्रयोगों, समालोचनाओं एवं प्रेक्षण के आधार पर जो ज्ञान प्राप्त किया जाता है वह विज्ञान है. ज्योतिषशास्त्र इन सभी कसौटियों पर खड़ा उतरता है जिससे इसे विज्ञान कहा जा सकता है.

ज्योतिष शास्त्र यूं तो एक प्रकार का विज्ञान है फिर भी आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि रखने वाले बहुत से व्यक्ति इसे अंधविश्वास और वहम मानते हैं. इस विज्ञान के प्रति आलोचनात्मक दृष्टि रखने वालों में ऐसे लोग मुख्य रूप से हैं जिनके लिए ज्योतिषशास्त्र पढ पाना और समझना कठिन होता है. बहुत से आलोचक ज्योतिष के सिद्धान्तों की हंसी उड़ाते हैं कि यह कैसे संभव है कि किसी के भविष्य को आप देख सकते हैं. आलोचनात्मक दृष्टि रखने वाले लोग ज्योतिष विज्ञान को कोरी कल्पना और ठगी मानते हैं.

ज्योतिष विज्ञान की आलोचना करने वाले भले ही अपने अपने तर्क दें परंतु यह भी गौर करने वाली बात है कि ऐसा कौन सा विज्ञान और सिद्धान्त है जो आलोचनाओं से बचा हुआ है. आलोचना ही सिद्धान्तों एवं विज्ञान को बल प्रदान करता है. आवश्यकता यह है कि आलोचनात्मक दृष्टि रखने वालो को इस विज्ञान के प्रति मन साफ करना चाहिए और खुले मन से इसका अध्ययन करना चाहिए इससे वे समझ पाएंगे कि ज्योतिष किस प्रकार विकसित और रहस्यों से भरा विज्ञान है. यह विज्ञान पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के आधार पर कार्य करता है.

ज्योतिष नक्षत्र विज्ञान (Astrology Cosmic Science) :
विज्ञान उसे कहते हैं जिनका प्रयोगशाला में परीक्षण किया जा सके और उसके प्रभाव का अध्ययन संभव हो. ज्योतिषशास्त्र के आलोचक इस आधार पर भी इसे विज्ञान मानने से इंकार करते हैं कि ज्योतिषशास्त्र के सिद्धान्तों एवं नियमों का भौतिक प्रयोगशाला में परीक्षण नहीं किया जा सकता है. यह सही है कि ज्योतिष विज्ञान का भौतिक प्रयोगशाला मे परीक्षण नहीं होता परंतु इस विज्ञान में भी कारण और प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते है. इस विज्ञान के प्रयोग में गुरूत्वाकर्षण को कारण माना  जाता है व शरीर को वस्तु जिसके उपर अंतरिक्षीय तत्वों के प्रभाव का पौराणिक नियमों एवं सिद्धांतों के आधार पर विश्लेषण किया जाता हैं. इस आधार पर भौतिक विज्ञान के नियमों को मानने वाले ज्योतिषशास्त्र को विज्ञान कह सकते हैं.
 
ज्योतिष फलादेश का वैज्ञानिक आधार (Pridiction Science):
बहुत से वैज्ञानिक इस आधार पर इसे विज्ञान मानने से इंकार करते हैं कि भौतिक विज्ञान में सिद्धांतों एवं नियमों के आधार पर जब किसी चीज का परीक्षण किया जाता है तब एक बार जो परिणाम मिलता है वही परिणाम दूसरी बार परीक्षण करने पर भी प्राप्त होता है परंतु ज्योतिषशास्त्र में ऐसा नहीं होता है. ज्योतिष गणना में जो परिणाम एक बार आता है दूसरे ज्योतिशस्त्री जब उसी सिद्धांत पर फलादेश करते हैं तो फलादेश अलग आता है.

ज्योतिषशास्त्र बहुत ही गूढ और जटिल विज्ञान है इसलिए इसके सिद्धांतों एवं नियमों का पालन बहुत ही सावधानी से करना होता है. इसमें असावधानी होने पर ही इस प्रकार की स्थिति पैदा हो सकती है. दूसरी तरफ ज्योतिषशास्त्र के बहुत से नियम कालांतर में गुम हो गये हैं जिसके कारण भी भविष्य कथन में कुछ परेशानी और अंतर हो सकता है. अगर उपलब्ध नियमों एवं सिद्धांतों को सूक्ष्मता से देखकर भविष्य कथन किया जाय तो परिणाम में अंतर आना संभव नहीं है. दूसरी ओर भविष्य कथन का रूप अलग हो सकता है यह संभव है परंतु परिणाम में समानता से इंकार नहीं किया जा सकता है अत: जो अनिश्चित फलादेश की बात कह कर ज्योतिषशास्त्र को विज्ञान मानने से इंकार करते हैं उन्हें सही नहीं कहा जा सकता.

निष्कर्ष के तौर देखें तो ज्योतिषशास्त्र विज्ञान कहलाने का अधिकार रखता है यह उस कसौटी पर खड़ा उतरता है जहां से किसी भी शास्त्र विषय को विज्ञान की संज्ञा प्राप्त होती है. इसे अंधविश्वास या भ्रम कहने वाले अगर साफ मन से इस विषय का अध्ययन करें तो वे इसे विज्ञान मानने से इंकार नहीं कर सकते.

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  1. 16 October, 2010 06:29:11 PM suraj kumar tiwari

    mane apaka tark pada aur mujhe yah bahut achha laga main kai deeno se jyotish vidya janane ke liye kitabo ke bare me serch kar raha hun hindi me. main 23 sal ka science graduate hun tatha sarkari naukari karta hu kripya keesi achi kitab ke bare me batye jisase self study karke gyaj prapt kar saku suraj kumar tiwari

  2. 20 January, 2009 01:51:52 PM srigovind

    sab se pahle aap ko badhaie aap ki site bahut sundar hai aur gyan vardhak hai. jyotish bahut shandar vishay hai is me shodh ki bahut sambhavna hai mere hisab se isme abhi tak koi shodh nahi huva hai sabhi purane shastra lekh kimvadantio se aajkal kam chal rahaa ha i jo kalantar se bahut pichad gaye hai naye shodh aur nayeparibhashao ki jyotish shastra ko bahut jaroorat hai dhanyawad srigovind