चन्द्र राशि और ग्रहों का गोचर फल (Result of Planetary Transits and Moonsigns)



ग्रहों के गोचर का सामान्य नियम यह है कि जब कोई ग्रह शुभ भाव में गोचर करता है तब शुभ फल देता है परंतु ग्रह का वेध होने पर शुभ फल नहीं मिल पाता है.

गोचर में जब ग्रहों की दशा, अन्तर्दशा, महादशा और प्रत्यन्तरदशा चलती है तब सम्बन्धित ग्रह अपना प्रभाव दिखाते हैं और कुण्डली में स्थित ग्रहों की स्थिति के अनुसार उनका शुभ और अशुभ फल मिलता है.

सूर्य का वेध:  (Vedhas of the Sun)
ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के गोचर का सामान्य नियम यह है कि जब कोई ग्रह शुभ भाव में गोचर करता है तब शुभ फल देता है परंतु ग्रह का वेध होने पर शुभ फल नहीं मिल पाता है.इस सिद्धांत के अनुसार देखा जाए तो सूर्य जन्म राशि से तृतीय, षष्टम, दशम अथवा एकादश भाव में होता है तो शुभ फल देता है (When sun is in the 3rd, 6th. 10th or 11th house from the Moonsign it is auspicious) लेकिन जब नवम भाव में कोई ग्रह होता है तो तृतीय भाव के सूर्य को वेध लगता है और सूर्य का शुभ फल नहीं मिलता है.छठे भाव के सूर्य को द्वादश भाव में स्थित ग्रह से वेध लगता है इसी प्रकार दशम भाव के सूर्य को चतुर्थ भाव कोई ग्रह स्थित होने पर वेध लगता है एवं एकादश भाव के सूर्य को पंचम भाव में स्थित ग्रह से वेध होता है.शनि से सूर्य को वेध नहीं लगता है अत: इन भावों में शनि के होने पर सूर्य वेध रहित होने से गोचर में अपना शुभ फल प्रदान करता है.

चन्द्र का वेध:  (Vedhas of the Moon)
चन्द्रमा शुभ ग्रह है जो लग्न, तृतीय, षष्टम, सप्तम, दशम एवं एकादश भाव में होने पर शुभ फल देता है.पंचम भाव में बुध के अतिरिक्त अन्य ग्रह होने पर लग्न के चन्द्र को वेध (If there is any other planet except Mercury in the fifth house from Moonsign, there is a Vedha to Moon) लगता है, इसी प्रकार नवम भाव में कोई ग्रह होने से तृतीयस्थ चन्द्रमा को, द्वादश में कोई ग्रह हो तो षष्टम चन्द्र को, चतुर्थ भाव के ग्रह से सप्तम भाव के चन्द्रमा को एवं अष्टम भाव के ग्रह एकादश भाव में स्थिति चन्द्रमा का वेध करते हैं.बुध चन्द्र के लिए वेधकारी नहीं होता है.

मंगल का वेध: (Vedhas of Mars)
मंगल पाप ग्रह माना जाता है परंतु जिनकी कुण्डली में तृतीय, षष्टम अथवा एकादश भाव में होता है उनके लिए मंगल शुभ फलदायी होता है.जब कोई ग्रह द्वादश भाव में होता है तब तृतीय भाव में स्थित मंगल को वेध लगने से इसके शुभ फल में कमी आती है.नवम भाव में कोई ग्रह स्थित होने पर षष्टम भाव के मंगल का वेध हो जाता है.पंचमस्थ ग्रह से एकादश भाव का मंगल वेधित होता है.

बुध का वेध: (Vedhas of Mercury)
बुध ग्रह द्वितीय, चतुर्थ, षष्टम, अष्टम, दशम एवं एकादश भाव में शुभ होता है.बुध की शुभ स्थिति होने पर व्यक्ति बुद्धिमान और विद्या एवं गुणों से परिपूर्ण होता है.इन भाव में स्थित बुध को क्रमश: पंचम, तृतीय, नवम, प्रथम, अष्टम एवं द्वादश भाव में उपस्थित ग्रह से वेध होता है.बुध के लिए चन्द्र मित्र ग्रह होने के कारण इन भावों में चन्द्रमा हो तो वेध नहीं लगता है (Moon is a friend of Jupiter and does not cause Vedha) और व्यक्ति को गोचर में बुध का शुभ फल मिलता है.

बृहस्पति का वेध: (Vedhas of Jupiter)
गुरू शुभ ग्रह हैं और द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश भाव में शुभ फल देते हैं.द्वादश भाव के ग्रह से द्वितीय भाव के बृहस्पति का वेध होता है.चतुर्थ भावस्थ ग्रह से पंचमस्थ बृहस्पति का, तृतीय भाव के ग्रह से सप्तम भाव के बृहस्पति का, दशम भावस्थ ग्रह से नवम भाव के बृहस्पति का वेध हो जाता है.अष्टम भाव में कोई ग्रह होने पर एकादश भाव के बृहस्पति को वेध लगता है.वेध होने पर बृहस्पति का शुभ फल नहीं मिल पाता है.

शुक्र का वेध: (Vedhas of Venus)
शुक्र जब लग्न, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, अष्टम, नवम, एकादश या द्वादश में होता है तब गोचर में शुभ फल देता है.ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार इन भावों में स्थित शुक्र के वेध होने पर फल हानि होती है.अष्टम भाव में किसी ग्रह के होने पर लग्नस्थ शुक्र का वेध होता है. (IF there is a planet in the 8th house then Venus has Vedha if it is in Lagna) सप्तमस्थ शुक्र के होने पर द्वितीय भाव के शुक्र का वेध होता है.लग्न में किसी ग्रह की उपस्थिति से तृतीय भावस्थ शुक्र का वेध होता है.दशम भाव का ग्रह चतुर्थ भाव के शुक्र को वेधता है.नवम भाव का ग्रह पंचमस्थ शुक्र को, पंचम भाव का ग्रह अष्टम शुक्र को, एकादश भाव का ग्रह नवम शुक्र को, तृतीय भाव का ग्रह एकादश शुक्र को एवं षष्टम भाव का ग्रह द्वादश भाव के शुक्र का वेध करता है.इस स्थिति में ग्रहों के नहीं होने पर शुक्र का वेध नहीं होता है जिससे गोचर में शुक्र का शुभ फल प्राप्त होता है.

शनि का वेध: (Vedhas of Saturn)
शनि को अशुभ ग्रह माना गया है यह केवल तृतीय, षष्टम एवं एकादश भाव में शुभ फल देता है.जब द्वादश, नवम एवं पंचम भाव में ग्रह स्थित होते हैं तो शनि को वेध लगता है और इस भाव में उपस्थित शुभ शनि का प्रभाव नष्ट होता है जिससे गोचर में शनि का शुभ फल नहीं मिलता है

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