मुहूर्त और शुभ योग (Muhurta and Subha yoga)



मुहू्र्त यानी किसी कार्य विशेष के लिए शुभ और अशुभ समय.ज्योतिषशास्त्र की गणितीय विधि में शुभ मुहूर्त के लिए कई विशिष्ट योगों का जिक्र किया गया है.शुभ योग किस प्रकार से बनते हैं एवं इनका क्या फल होता है, इन्हीं तथ्यों पर आइये बात करते हैं.

शुभ योग (Subh yoga)
पंचांग से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण के आधार पर मुहूर्तों का निर्धारण किया जाता है.जिन मुहूर्तों में शुभ कार्य किये जाते है उन्हें शुभ मुहूर्त कहते हैं.सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरू पुष्य योग, रवि पुष्य योग, पुष्कर योग, अमृत सिद्धि योग, राजयोग, द्विपुष्कर एवं त्रिपुष्कर ये कुछ शुभ योगों के नाम हैं.

सिद्धि योग (Siddhi yoga)
वार, नक्षत्र और तिथि के बीच आपसी तालमेल होने पर सिद्धि योग का निर्माण होता है उदाहरणस्वरूप सोमवार के दिन अगर नवमी अथवा दशमी तिथि हो एवं रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, श्रवण और शतभिषा में से कोई नक्षत्र हो तो सिद्धि योग बनता है.

सर्वार्थ सिद्धियोग (Sarvarth siddhi yoga)
यह अत्यंत शुभयोग है.यह वार और नक्षत्र के मेल से बनने वाला योग है.गुरूवार और शुक्रवार के दिन अगर यह योग बनता है तो तिथि कोई भी यह योग नष्ट नहीं होता है अन्यथा कुछ विशेष तिथियों में यह योग निर्मित होने पर यह योग नष्ट भी हो जाता है.सोमवार के दिन रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा, अथवा श्रवण नक्षत्र होने पर सर्वार्थ सिद्धियोग बनता है जबकि द्वितीया और एकादशी तिथि होने पर यह शुभ योग अशुभ मुहूर्त में बदल जाता है.

अमृत सिद्धियोग (Amrti Siddhi Yoga)
अमृत सिद्धियोग अपने नामानुसार बहुत ही शुभयोग है.इस योग में सभी प्रकार के शुभ कार्य किये जा सकते है.यह योग वार और नक्षत्र के तालमेल से बनता है.इस योग के बीच अगर तिथियों का अशुभ मेल हो जाता है तो अमृतयोग नष्ट होकर विषयोग में परिवर्तित हो जाता है.सोमवार के दिन हस्त नक्षत्र होने पर जहां शुभयोग से शुभ मुहूर्त बनता है लेकिन इस दिन षष्ठी तिथि भी हो तो विषयोग बनता है.

गुरू पुष्ययोग (Guru Pusya yoga)
गुरूवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग से निर्मित होने के कारण इस योग को गुरू पुष्य योग के नाम से सम्बोधित किया गया है.यह योग गृह प्रवेश, ग्रह शांति, शिक्षा सम्बन्धी मामलों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है.यह योग अन्य शुभ कार्यों के लिए भी शुभ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है.

रवि पुष्ययोग (Ravi Pusya yoga)
इस योग का निर्माण तब होता है जब रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र होता है.यह योग शुभ मुहूर्त का निर्माण करता है जिसमें सभी प्रकार के शुभ कार्य किये जा सकते हैं.इस योग को मुहूर्त में गुरू पुष्ययोग के समान ही महत्व दिया गया है.

पुष्कर योग (Puskar yoga)
इस योग का निर्माण उस स्थिति में होता है जबकि सूर्य विशाखा नक्षत्र में होता है और चन्द्रमा कृतिका नक्षत्र में होता है.सूर्य और चन्द्र की यह अवस्था एक साथ होना अत्यंत दुर्लभ होने से इसे शुभ योगों में विशेष महत्व दिया गया है.यह योग सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम मुहूर्त होता है.

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4 Comments

1-10 Write a comment

  1. 09 October, 2010 10:14:10 AM gulab

    sir mera nam-gulab,dob-15oct1975,place-berla,dist-durg(cg).deepawali ke bad novembe mahine me griha pravesh ka shubh muhurt bataye?

  2. 17 July, 2010 11:07:08 PM Lokesh K Nahar

    23rd July 2010 Griha Pravesh ke liye kaisa hai

  3. 27 November, 2009 12:27:31 AM shashi

    please guide me about nakshatras.

  4. 19 June, 2009 11:49:34 PM sanjay meena

    Muhurta my fakatree ke leye