मंगल का अमंगल (Mangal ka Amangal)



मंगल को क्रूर ग्रह के रूप में ज्योतिषशास्त्र में मान्यता प्राप्त है. विवाह के संदर्भ में शनि, राहु, केतु, सूर्य और शुक्र भी परेशानी देना वाला होता है फिर इन ग्रहों की अपेक्षा मंगल का भय सबसे अधिक सताता है.

जब शादी की बात चलती है तब वर वधू के सुखद वैवाहिक जीवन के लिए सामन्य प्रक्रिया के तौर पर कुण्डली मिलान किया जाता है. अगर कुण्डली मिलान करते समय मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश में स्थित हो तो वर और वधू पक्ष वालों के चेहरे पर मायूसी साफ दिखाई देने लगती है. अगर वर और कन्या दोनों एक दूसरे को पसंद करते हो तो इस स्थिति में और भी मुश्किल हालात पैदा हो जाते हैं. मंगल की इस स्थिति के कारण हालात ऐसे बन जाते हैं कि हाथ में आयारिश्ता निकल जाता है और संजोये हुए सपने बिखर कर रह जाते है.

विवाह और मंगल दोष (Mangal Dosa or vivaah)
मंगल दोष को मंगलिक दोष के नाम से जाना जाता है यह हमेशा ही अमंगलकारी नहीं होता है. ग्रहों की विशेष स्थिति में मंगलिक दोष प्रभावहीन भी हो जाता है अत: मंगल की स्थिति को देखकर ही भयभीत होना ठीक नही है. वास्तव में मंगलिक दोष तब प्रभावकारी हो जाता है जब जन्म लग्न और चन्द्र लग्न दोनों में ही मंगलीक दोष बन रहा होता है. सत्यता यह है कि मंगल अकेला वैवाहिक जीवन में उथल पुथल नहीं मचाता है. दूसरे ग्रहों से भी इस स्थिति पर प्रभाव होता है.

मंगलिक दोष भंग (Manglik dosa bhang)
मंगलिक दोष का भय उस स्थिति में और भी सताता है जब मंगल के विषय में हमरा ज्ञान अधूरा होता है. सच भी है कि अज्ञान से अधिक अधूरा ज्ञान तकलीफ देता है. मंगलिक दोष हमेशा ही कष्टकारी नहीं होता है. ज्योतिषशास्त्र का गहराई से अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि शनि से दृष्ट होने पर मंगल ग्रह का कुप्रभाव कम हो जाता है. बृहस्पति जिस ग्रह को देखता है उसके शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है यही कारण है कि बृहस्पति से दृष्ट होने पर मंगलिक दोष का शमन होता है. मंगल के साथ चन्द्रमा की युति होने पर मंगल की क्रूरता पर चन्द्र की सौम्यता का प्रभाव होता है जिससे मंगलिक दोष का भय नहीं रहता है. मंगल के साथ पाप ग्रह राहु की युति होने पर भी मंगल का कुप्रभाव कम होता है.

नोट ध्यान देने वाली बात है कि कुण्डली मिलान करते समय अगर चन्द्र लग्न में भी मंगलिक दोष बन रहा हो तभी मंगलिक दोष समझना चाहिए. मंगल दोष होने पर भय और आशंकाओं को मन में नहीं पालें बल्कि इसका उपाय करें. ज्योतिषीय उपचार से मंगलिक दोष को शांत किया जा सकता है.

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