शनि का कन्या राशि मे प्रवेश: मिथुन राशि के कंटक शनि (Saturn's Transit into Virgo: Kantak Shani for Gemini)



10 सितम्बर से शनि कन्या मे आ चुके है. इस घर मे शनि के आने से मिथुन राशि वालो की लघु कल्याणी ढैय्या शुरु हो जायेगी (Kantak Shani transit will commence for Gemini from 10 September). शनि की लघु कल्याणी ढैय्या को कंटक शनि (Kantak Shani) के नाम से भी जाना जाता है.

गोचर मे शनि का किसी राशि से चौथे व आंठवे घर मे आने पर उस राशि की शनि की ढैय्या आरम्भ होती है (Dhaiyya starts when the Saturn is in 4th or 8th house from the birth Moonsign). शनि एक राशि मे लगभग ढाई साल तक रहते है. इस लिए सामान्य शब्दो मे इस अवधि को शनि की ढैय्या कहा जाता है. शनि की साढेसाती की तरह ही शनि की ढैय्या से मिलने वाले फल भी शुभ हो सकते है. यह कुण्डली की स्थिति पर निर्भर करता है.

जमीन जायदाद से जुडी योजनाएं पूरी होगी
मिथुन राशि का स्वामी बुध है. शनि व बुध का संबध मित्रो का है. इसलिए शनि की यह अवधि मिथुन राशि वालो के लिए बहुत अशुभ नही रहेगी (Gemini's lord Mercury is friendly to Saturn). मिथुन राशि के लिए शनि आंठवे घर व नवम घर के स्वामी होकर चौथे घर मे गोचर कर रहे है. इसलिए इस समय मे जमीन जायदाद से जुडी योजनाएं पूरी होने की संभावनाए बन रही है. घर व मकान को बनाने या खरीदने का इस समय मे विचार बनाना अच्छा हो सकता है.

पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखे. 
शनि की ढैय्या का यह समय मिथुन राशि के जातको के लिए पिता के स्वास्थय के पक्ष से अच्छा नही है. इस समय मे व्यक्ति के पिता को अपने स्वास्थय मे थोडी भी कमी को अनदेखा नही करना चाहिए.व्यक्ति को भाग्य को अपने पक्ष मे करने के लिए अपने गुरुओ को सम्मान देना चाहिए (Dhaiyya transit is not good for the health of the father).

मिथुन राशि से शनि की एक राशि अष्टम मे व एक राशि नवम (त्रिकोण ) मे पडती है. बनी हुई स्थिति के अनुसार शनि मिश्रित फल देगे. क्योकि शनि नवमेश होने से शुभ है पर अष्टमेश होने से अशुभ है. नवम घर से भाग्य के साथ साथ व्यक्ति की धर्म मे रुचि भी दर्शाता है. इसलिए व्यक्ति को अपने भाग्य को अपने पक्ष मे करने के लिए धर्म की ओर अपना रुख करना चाहिए.

ऋणो मे वृ्द्धि हो सकती है. 
कन्या राशि से शनि अपनी तीसरी दृ्ष्टि से मिथुन के छ्ठे घर को देख रहे है (Saturn has a third-aspect on the sixth house from Gemini Moonsign) . जिसमे वृ्श्चिक राशि स्थित है. वृ्श्चिक राशि का स्वामी मंगल है जिसकी दूसरी राशि ग्यारहवे घर मे है. यहां मंगल की दोनो राशियां अशुभ घरो मे है. तथा शनि व मंगल दोनो के संबध भी मधुर नही है. इस स्थिति मे आय मे कमी के रहते कर्ज लेने की स्थिति आने की संभावना बन रही है.

व्यवसाय मे बाधाएं आ सकती है. 
शनि अपनी सांतवी दृ्ष्टि से मिथुन राशि के दसंवे घर को देख रहे है (Saturn has the seventh aspect on the 10th house from Gemini). दसवे घर को आजिविका व व्यवसाय का घर कहते है. इस घर मे गुरु की मीन राशि है. गुरु की दूसरी राशि धनु सांतवे घर मे है. दोनो घरो को केन्द स्थान कहा जाता है. केन्द्रो को फल के पक्ष से शुभ माना गया है.

तथा सांतवा व दसवां दोनो घर व्यवसाय व व्यापार से जुडे हुए घर होते है (7th and 10th house are for business and profession).शनि व गुरु के आपस के संबध मित्रो के नही है. इसलिए मिथुन राशि के व्यक्तियों के लिए आने वाला यह समय व्यवसाय के लिए बाधाए लेकर आयेगा. इस समय मे आपको व्यवसाय मे भाग्य पर कम विश्वास करके कर्म को महत्व देना चाहिए. ऎसा करने से व्यवसाय की बाधाएं दूर होने की संभावनाएं बनेगी.

जन्म राशि से चौथे घर पर शनि के गोचर को इसलिए भी महत्व पूर्ण माना जाता है क्योकि शनि यहां से अपनी दसंवी दृ्ष्टि से जन्म राशि को देख रहा होता है (Saturn has the tenth aspect on the birth Moonsign). शनि के कन्या राशि मे होने से शनि बुध की एक राशि मे बैठकर बुध की दूसरी राशि मिथुन को देख रहे होते है. इसलिए इस समय मे व्यक्ति को अपनी बुद्धि का शुभ फल मिलता है.

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