शनि की साढेसाती : सोने से कुण्दन बनने के साढेसात साल (Saturn's Sadesati : 7 1/2 Years of Endurance Test)


शनि की महादशा व्यक्ति के संघर्ष व मेहनत की आग मे तपा कर सोने से कुण्दन बनाने के समान काम करती है. चन्द्र के ज्योतषि शास्त्र मे मन व मानसिक स्थिति का कारक कहा गया है (Moon is the karak for the heart and mental status as per Jyotish). तथा शनि के जन्मों का न्याय करके कष्ट देने वाला ग्रह कहा गया है.
शनि की साढेसाती की अवधि मे चन्द्र जिसे कोमल मन कहा है. तथा शनि को भारी पत्थर के समान कहा जाता है. साढेसाती की अवधि मे व्यक्ति के फूल समान मन पर शनि के कष्टों का भार पत्थर के समान पडता है. इस स्थिति मे कष्ट होना तो स्वभाविक ही है.

अलग अलग व्यक्तियों की कष्टों के सहने की क्षमता अलग अलग होती है. कुछ इस परीक्षा मे तप कर कुन्दन बन जाते है. और उन्हे जीवन मे सफलता की ऊंचाईयां छूने का अवसर मिलता है. और जो ऐसा नही कर पाते है. उन्हे निराशा का सामना करना पडता है.

शनि की साढेसाती अनेक बिन्दुऔ से प्रभावित होती है. जन्मागं मे शनि का योंगकारक होकर शुभ स्थिति मे होना. तथा शनि की महादशा मे शनि की साढेसाती आने पर व्यक्ति अपने जीवन की सर्वोच्च उन्नति व सफलता के प्राप्त करता है (A person gets the opportunity to reach new heights during Sadesati). कुण्डली मे राजयोग व धनयोग अधिक होने पर शनि महादशानाथ होकर शनि की साढेसाती मे शुभ फल मिलने की संभावनाए बढ जाती है.

कोई भी गोचर का ग्रह अकेला फल नही देता और न ही घटना के घटित करता है (No planet's transit yields results individually, but they are modified by the position and transit of other planets). वह जन्मागं मे अपनी स्थिति के अनुसार शुभ फलों के कम या ज्यादा करता है. इसलिए कुण्डली मे शनि के शुभ होने पर साढेसाती भी अच्छी ही रहती है.

ज्योतष शास्त्र के अनुसार शनि देव जब अपनी राशि के अंत यानि २० अंश से ३० अंश के मध्य होते है. तभी फलों मे शुभता मे कमी या बढोतरी करते है. साढेसाती के पूरे साढेसात साल की अवधि मे नही. इस लिए पूरी साढेसात साल की अवधि से घबराने की आवश्यकता नही है.
जन्मागं मे शनि के अशुभ रुप मे स्थित होने पर भी अगर गोचर के शनि शुभ फल देने की स्थिति मे है. तो अशुभ फलों मे अपने आप कमी आ जायेगी. इसके विपरीत कुण्डली मे अशुभ होने पर, गोचर मे भी स्थिति अच्छी न हो तो मिलने वाले अवश्य ही अशुभ फल रहेगे. इस स्थिति मे भी शनि का वक्री या मार्ग होना फलों मे परिवर्तन कर देगा (Saturn's direct or retrograde motion also influences the results).

शनि की साढेसाती की अवधि के अशुभ फल देने वाली न मानकर व्यक्ति के उसके शुभ बिन्दुओं पर विचार करके अधिक मेहनत व लगन से स्वयं के इस अवधि मे सोने से कुण्दन बनाने का प्रयास करना चाहिए

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