दशमेश का अन्य भाव के स्वामी - Relationship of the tenth lord with the other lords of the house according to Astrology



दशमेश का सम्बध कुण्डली के जिन भावेशों से बनता है. उन भावेशों की दशा अवधि में भी व्यक्ति को आजिविका क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है. The position of the tenth lord with other lords give the person success during the period of those house-lords) जैसे:- दशमेश का पंचमेश से संबन्ध होने पर व्यक्ति के लिये दशमेश की दशा व पंचमेश की दशा दोनों ही आजिविका में उन्नति प्राप्ति के अनुकुल रहेगी. आईये देखे की दशमेश अन्य भावेशों के साथ होने पर किस प्रकार के फल देता है.

1. दशमेश का संबन्ध लग्नेश के साथ होने पर:- ( Relationship of the tenth lord with Ascendant-lord According to Jyotish)
जब कुण्डली में लग्नेश व दशमेश एक साथ स्थित हों तो व्यक्ति को अपने पुरुषार्थ से आजिविका प्राप्ति की संभावनाएं बनती है. यह योग व्यक्ति को स्वयं के बल पर आजिविका प्राप्ति के लिये समर्थ बनाता है. इस योग के व्यक्ति की सफलता में उसकी अपनी मेहनत व प्रयास अहम होते है.

सहयोग मिलने पर भी उसके लिये सहयोग लाभकारी सिद्ध नहीं होते है. इस स्थिति में व्यक्ति की सफलता का श्रेय़ स्वयं व्यक्ति को ही जाता है. ऎसा व्यक्ति आत्मनिर्भर व स्वाभिमानी होता है. (This yoga according to Astrology help the person to achieve success through his own efforts and hard-work)

एक अन्य मत के अनुसार व्यक्ति को अपने व्यवसाय आगे बढाने में अपने पिता का सहयोग प्राप्त होता है. क्योकि दशम भाव पिता का भाव भी है. इस योग के व्यक्ति को सफलता व उन्नति प्राप्ति के लिये कार्य करते रहना चाहिए. अगर व्यक्ति भाग्य वादी बन जाता है. तो आजिविका क्षेत्र में बाधाएं बनी रहती है.

2. दशमेश व द्वितीयेश का युति संबन्ध :- (Conjunction of the tenth-lord with second-lord Through Astrology)
आजिविका घर के स्वामी व दूसरे घर के स्वामी जब किसी भाव में एक साथ स्थित हों तो व व्यक्ति को कार्यक्षेत्र के कार्यो में अपने परिवार का सहयोग प्राप्त होने की संभावनाएं बनती है. दशमेश व द्वितीयेश की युति व्यक्ति के द्वारा पारिवारिक कारोबार को आगे बढाने का प्रयास करता है.

यह योग व्यक्ति की आजिविका से उसकी बचत में वृ्द्धि के भी संकेत देता है. इस योग के व्यक्ति को धन विनियोजन का कार्य करना भी लाभकारी रहता है. इन दोनों भाव के स्वामियों कां संबन्ध व्यक्ति की सफलत में परिवार के सदस्यों की अहम भूमिका होने की संभावनाएं बनाता है.

3. दशमेश व पराक्रमेश का युति संबन्ध:- (Conjunction of the tenth-lord with third-lord according to Astrology)
भाव से मिलने वाले फलों पर उसके स्वामी का नियन्त्रण होता है. जब दशम भाव का स्वामी व तीसरे घर का स्वामी दोनों की कुण्डली में युति हो रही हों तो व्यक्ति को पराक्रम से किये गये कार्यो में आजिविका प्राप्ति की संभावनाएं बनती है. (This yoga in Astrology gives the person success in work which he performed through his courage and strength)

यह योग व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में साहसी बनाने में सहयोग करता है. इसके फलस्वरुप व्यक्ति आजिविका के कार्यो को जोश व उत्साह के भाव से करने का प्रयास करता है. उसे दूर संचार व परिवहन से संबन्धित कार्यो में सफलता प्राप्त होने की संभावनाएं बनती है.

तीसरा घर छोटी यात्राओं का घर होता है. इसलिये इस योग के व्यक्ति को यात्राओं से जुडा कार्य करने से भी सफलता प्राप्त होने की सम्भावनाएं बनती है. इस योग के व्यक्ति को आजिविका क्षेत्र में अपने मित्रों का सहयोग प्राप्त हो सकता है.

4. दशमेश व चतुर्थेश का युति संबन्ध:- (Conjunction of the tenth-lord with fourth-lord Through Vedic Astrology)
कुण्डली का चतुर्थ घर सुख व वाहन का घर है. (Fourth house is the house of happiness and vehicles) सभी प्रकार की भौतिक सुख -सुविधा की वस्तुओं को इस भाव से देखा जाता है. इस भाव के स्वामी व दशम घर के स्वामी का जब कुण्डली में युति संबन्ध बन रहा हों तो व्यक्ति चतुर्थ भाव से संबन्धित वस्तुओं के कार्यक्षेत्र में काम कर लाभ प्राप्त करता है.

इस योग के व्यक्ति को अपने कार्यक्षेत्र में उच्च पद प्राप्त होने की भी संभावनाएं बनती है. चतुर्थेश व दशमेश दोनों भाव के स्वामियों का संबन्ध व्यक्ति को आजिविका में अपनी माता का सहयोग प्राप्ति के संकेत देता है. इस योग के व्यक्ति को वाहन व भूमि के क्रय-विक्रय से संबन्धित कार्य करना लाभकारी रह्ता है. (This yoga gives the person favorable results in real estate business or sale-purchase of vehicles according to Astrology)

ऎसा व्यक्ति भूमि से प्राप्त होने वाली वस्तुओं से जुडा कार्य भी कर सफलता प्राप्त कर सकता है. चतुर्थ भाव क्योकि इसके साथ-साथ शिक्षा का भाव भी है. इसलिये उसका शिक्षा क्षेत्र में काम करना भी लाभकारी सिद्ध हो सकता है.

दशमेश का सम्बध कुण्डली के जिन भावेशों से बनता है. उन भावेशों की दशा अवधि में भी व्यक्ति को आजिविका क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है. जैसे:- दशमेश का पंचमेश से संबन्ध होने पर व्यक्ति के लिये दशमेश की दशा व पंचमेश की दशा दोनों ही आजिविका में उन्नति प्राप्ति के अनुकुल रहेगी. आईये देखे की दशमेश अन्य भावेशों के साथ होने पर किस प्रकार के फल देता है. ( relationship of the tenth-lord and fifth lord give the person success in profession during period of fifth-lord or tenth-lord through jyotish)

5. दशमेश की पंचमेश के साथ युति:- (Conjunction between tenth-lord and fifth-lord according to Vedic Astrology)
जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में दशम भाव के स्वामी व पंचम भाव के स्वामी का युति संबन्ध हो रहा हो तो, व्यक्ति को पंचम भाव के आजिविका क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होने की संभावनाएं बनती है. दोनो भाव स्वामियों की दशा अवधि व्यक्ति के कार्यक्षेत्र के अनुकुल रहती है. यह योग व्यक्ति को विद्वान बनाता है. पंचम भाव क्योकि शिक्षा व ज्ञान का भाव है. ऎसे में व्यक्ति के शिक्षक बनने की संभावनाएं बनती है.

इस योग के व्यक्ति को बहुराष्ट्रिय कंपनी में अपनी योग्यता दिखाने के अवसर प्राप्त हो सकते है. पंचम भाव, नवम का नवम भाव होने के कारण व्यक्ति धार्मिक कार्यो को करने के कार्य भी कर सकता है. (Fifth house is the ninth of the ninth house therefore the person may earn his livelihood by serving himself in spiritual work)

6. दशमेश व षष्ठेश की युति:- (According to Astrology conjunction of the tenth-lord and sixth-lord)
दशम घर के स्वामी का संबन्ध छठे घर के स्वामी के साथ होने पर व्यक्ति सेवा क्षेत्र में कार्य कर आजिविका व यश प्राप्त कर सकता है. इस योग के व्यक्ति को अस्पताल, न्यायालय, धन विनियोजन का कार्य करना लाभकारी रहता है. इस योग का व्यक्ति जेल इत्यादि में भी कार्य कर अपनी आजिविका प्राप कर सकता है.

ऎसे व्यक्ति के डाँक्टर, जेलर, वकील या जज बनने की संभावनाएं बनती है. कभी कभी इस योग का व्यक्ति बेवजह वाद-विवाद में रुचि लेने की प्रवृ्ति भी रख सकता है. इस योग के व्यक्ति को मेहनत व ईमानदारी से धन कमाने का प्रयास करना चाहिए. छठे घर के स्वामी के पाप प्रभाव में होने पर कुछ इस प्रकार के फल प्राप्त हो सकते है.

7. दशमेश व सप्तमेश दोनों एक साथ:- (conjunction of the tenth-lord and seventh lord according to Vedic Astrology)
जया भाव का स्वामी व आजिविका क्षेत्र के स्वामी की युति जब एक भाव में हों तो व्यक्ति को पर्यट्न व टूर-ट्रैवल का कामों से व्यवसायिक क्षेत्र में उन्नति प्राप्त हो सकती है. सप्तम भाव क्योकि विवाह स्थान भी है. (seventh house is the house of marriage)इसलिये ऎसे व्यक्ति का मैरिज ब्यूरों का काम करना भी लाभकारी हो सकता है. विदेशों तक अपने व्यापार को बढाना इनके लिये लाभकारी रहता है.

इस योग के व्यक्ति को अपनी आजिविका क्षेत्र में अपने जीवन साथी का सहयोग लेकर चलना चाहिए. जीवन साथी का सहयोग लेने से व्यक्ति के कार्य क्षेत्र की बाधाओं में कमी होती है. यह योग व्यक्ति को रेल विभाग, परिवहन, डाकतार विभाग आदि में काम करना ही लाभकारी रहता है. इस स्थिति में किसी व्यक्ति के लिये ट्रांसपोर्ट का काम करना भी व्यक्ति को आजिविका में सफलता दिला सकता है.

8. दशमेश का अष्टमेश का एक भाव में होना:- (conjunction of tenth-lord with eighth-lord Through Astrology)
दशम भाव के स्वामी का आयु भाव के स्वामी के साथ स्थित होने पर यह योग बनता है. इस योग में दशमेश के साथ अष्टमेश का संबन्ध व्यक्ति की आजिविका के लिये अशुभ फलकारी होता है.(this yoga is not auspicious for the profession) इसके फलस्वरुप व्यक्ति की आजिविका क्षेत्र में बाधाएं, परेशानियां व अस्थिरता लेकर आता है. इस योग के व्यक्ति को आजिविका क्षेत्र में बेवजह अपयश की स्थिति से गुजरना पड सकता है.

दशमेश का अष्टमेश के साथ एक भाव में होने पर व्यक्ति को सफलता प्राप्ति के लिये अधिक मेहनत व संघर्ष करना पडता है. इस योग में अगर दशमेश का पाप प्रभाव व्यक्ति को गलत तरीके से लाभ प्राप्ति की संभावनाएं दे सकता है.

9. दशमेश की नवमेश के साथ युति:- (Conjunction of the tenth-lord with ninth-lord Through jyotish)
जिस व्यक्ति की कुण्डली में दशमेश के साथ नवम भाव के स्वामी की युति हो रही हों उस व्यक्ति को व्यवसायिक क्षेत्र में अपने पिता का सहयोग प्राप्त होता है. ऎसे व्यक्ति को कार्यक्षेत्र के कार्यो में भाग्य का सहयोग प्राप्त होने की संभावनाएं बनती है. (The conjunction of the tenth-lord with ninth-lord bless the person with good fortune at work)

नवम भाव क्योकि भाग्य व धर्म का भाव है, इसलिये इस योग के होने पर व्यक्ति को धार्मिक क्षेत्र में प्रयोग होने वाली विषय वस्तुओं से संबन्धित कार्य करना लाभकारी होता है. इसके अलावा व्यक्ति किसी धार्मिक स्थल का कार्यकर्ता भी बन सकता है.

धर्म क्षेत्रों में काम करने वाले सभी पादरी, पुजारी अथवा अन्य धर्म अधिकारी इस योग के प्रभाव क्षेत्र में आते है. नवम भाव न्यायपालिका व लम्बी दूरी की यात्राओं का भाव है. इसके कारण ऎसा व्यक्ति वकील या जज भी बन सकता है. इस योग के व्यक्ति को जनहित के कार्यो में रुचि होने की भी संभावनाएं बनती है.

10. दशमेश एकादश भाव के स्वामी के साथ:-(conjunction of the tenth-lord with eleventh lord Through Astrology)
आजिविका घर का स्वामी जब आय के स्वामी के साथ हों तो व्यक्ति के नौकरी करने की जगह व्यापार करने की अधिक संभावनाएं बनती है. (The conjunction of these two planets inclien the person towards business rather a job) इस योग का व्यक्ति व्यापारिक क्रियाओं में कुशल होता है. यह योग व्यक्ति अपनी पूंजी व्यापार के विस्तार के लिये प्रयोग कर सकता है. ऎसे व्यक्ति को नियोजन कार्य में योग्यता प्राप्त हो सकती है.

दशमेश व एकादशसे की युति व्यक्ति को महत्वकांक्षी बनाती है. वह अधिक से अधिक आय प्राप्त करने का प्रयास करता है. तथा अपने लाभों को बढाने के लिये प्रयासरत रहता है. एकादश भाव का स्वामी लाभ भाव का स्वामी होने के कारण व्यक्ति जिस भी कार्य को करता है, उसे उसमें लाभ प्राप्त होने की संभावनाएं बनती है. कार्येश व लाभेश की युति व्यक्ति के व्यापार में विस्तार व विकास के अवसर देकर धन व समृ्द्धि देती है.

11. दशमेश व द्वादश भाव के स्वामी की युति:-(conjunction of the tenth-lord with twelfth-lord according to Astrology)
कर्म भाव व व्यय भाव के स्वामियों का संबन्ध व्यक्ति की आजिविका को विदेश से जोडता है. इस योग के व्यक्ति को कार्यक्षेत्र के कार्यो से विदेश में बार-बार जाने के अवसर प्राप्त हो सकते है. तथा जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करने के लिये उसे घर से दूर रहना पड सकता है.

इस योग में कार्येश का व्यय भाव के स्वामी के साथ युति हो रही है, इसके कारण कभी कभी व्यक्ति में आलस्य भाव अधिक आने की भी संभावनाएं बनती है. द्वादश भाव के कार्यक्षेत्र में आने वाले आजिविका क्षेत्र में अस्पताल, कारागार इत्यादि आते है. ऎसा व्यक्ति इनमें से किसी एक क्षेत्र में काम कर सफलता प्राप्त कर सकता है. यह योग व्यक्ति के कार्यक्षेत्र के व्ययों में बढोतरी करने में सहयोग कर सकता है.

दशम भाव के स्वामी का व्यय भाव के स्वामी से संबन्ध होने पर व्यक्ति कभी कभी वैरागी हो जाता है. (The conjunction of the tenth-lord with the eleventh lord make the person solitary or ungregarious in nature.) ऎसे में उसे सिर्फ मोक्षवादी हो जाता है. वह संसारिक कार्यो में रुचि नहीं लेता है. काल पुरुष की कुण्डली में द्वादश भाव में मीन राशि पडती है. जब द्वादश भाव में मीन राशि हों तथा मीन राशि में केतु स्थित हों तो व्यक्ति संसारिक विषयों से परे जीवन व्यतीत करता है.

Tags

Categories


Please rate this article:

5.00 Ratings. (Rated by 1 people)


Write a Comment

View All Comments