दशमेश का अन्य भाव के स्वामियों से सम्बन्ध विचार:- भाग--2 (Relationship of the tenth-lord with other house-lords according to Astrology: Part-2)



व्यक्ति की आजिविका के विषय में विचार करने के लिये दशम भाव के स्वामी को विशेष महत्व दिया जाता है. पराशर ऋषि के अनुसार दशमेश आजिविका भाव का स्वामी होने कारण व्यक्ति की आजिविका को प्रभावित करने की पूर्ण योग्यता रखता है.

दशमेश का सम्बध कुण्डली के जिन भावेशों से बनता है. उन भावेशों की दशा अवधि में भी व्यक्ति को आजिविका क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है. जैसे:- दशमेश का पंचमेश से संबन्ध होने पर व्यक्ति के लिये दशमेश की दशा व पंचमेश की दशा दोनों ही आजिविका में उन्नति प्राप्ति के अनुकुल रहेगी. आईये देखे की दशमेश अन्य भावेशों के साथ होने पर किस प्रकार के फल देता है. ( relationship of the tenth-lord and fifth lord give the person success in profession during period of fifth-lord or tenth-lord through jyotish)

1. दशमेश की पंचमेश के साथ युति:- (Conjunction between tenth-lord and fifth-lord according to Vedic Astrology)
जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में दशम भाव के स्वामी व पंचम भाव के स्वामी का युति संबन्ध हो रहा हो तो, व्यक्ति को पंचम भाव के आजिविका क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होने की संभावनाएं बनती है. दोनो भाव स्वामियों की दशा अवधि व्यक्ति के कार्यक्षेत्र के अनुकुल रहती है. यह योग व्यक्ति को विद्वान बनाता है. पंचम भाव क्योकि शिक्षा व ज्ञान का भाव है. ऎसे में व्यक्ति के शिक्षक बनने की संभावनाएं बनती है.

इस योग के व्यक्ति को बहुराष्ट्रिय कंपनी में अपनी योग्यता दिखाने के अवसर प्राप्त हो सकते है.  पंचम भाव, नवम का नवम भाव होने के कारण व्यक्ति धार्मिक कार्यो को करने के कार्य भी कर सकता है. (Fifth house is the ninth of the ninth house therefore the person may earn his livelihood by serving himself in spiritual work)

2. दशमेश व षष्ठेश की युति:- (According to Astrology conjunction of the tenth-lord and sixth-lord)
दशम घर के स्वामी का संबन्ध छठे घर के स्वामी के साथ होने पर व्यक्ति सेवा क्षेत्र में कार्य कर आजिविका व यश प्राप्त कर सकता है. इस योग के व्यक्ति को अस्पताल, न्यायालय, धन विनियोजन का कार्य करना लाभकारी रहता है. इस योग का व्यक्ति जेल इत्यादि में भी कार्य कर अपनी आजिविका प्राप कर सकता है.

ऎसे व्यक्ति के डाँक्टर, जेलर, वकील या जज बनने की संभावनाएं बनती है. कभी कभी इस योग का व्यक्ति बेवजह वाद-विवाद में रुचि लेने की प्रवृ्ति भी रख सकता है. इस योग के व्यक्ति को मेहनत व ईमानदारी से धन कमाने का प्रयास करना चाहिए. छठे घर के स्वामी के पाप प्रभाव में होने पर कुछ इस प्रकार के फल प्राप्त हो सकते है.

3. दशमेश व सप्तमेश दोनों एक साथ:- (conjunction of the tenth-lord and seventh lord according to Vedic Astrology)
जया भाव का स्वामी व आजिविका क्षेत्र के स्वामी की युति जब एक भाव में हों तो व्यक्ति को पर्यट्न व टूर-ट्रैवल का कामों से व्यवसायिक क्षेत्र में उन्नति प्राप्त हो सकती है. सप्तम भाव क्योकि विवाह स्थान भी है. (seventh house is the house of marriage)इसलिये ऎसे व्यक्ति का मैरिज ब्यूरों का काम करना भी लाभकारी हो सकता है. विदेशों तक अपने व्यापार को बढाना इनके लिये लाभकारी रहता है.

इस योग के व्यक्ति को अपनी आजिविका क्षेत्र में अपने जीवन साथी का सहयोग लेकर चलना चाहिए. जीवन साथी का सहयोग लेने से व्यक्ति के कार्य क्षेत्र की बाधाओं में कमी होती है. यह योग व्यक्ति को रेल विभाग, परिवहन, डाकतार विभाग आदि में काम करना ही लाभकारी रहता है. इस स्थिति में किसी व्यक्ति के लिये ट्रांसपोर्ट का काम करना भी व्यक्ति को आजिविका में सफलता दिला सकता है.

4. दशमेश का अष्टमेश का एक भाव में होना:- (conjunction of tenth-lord with eighth-lord Through Astrology)
दशम भाव के स्वामी का आयु भाव के स्वामी के साथ स्थित होने पर यह योग बनता है. इस योग में दशमेश के साथ अष्टमेश का संबन्ध व्यक्ति की आजिविका के लिये अशुभ फलकारी होता है.(this yoga is not auspicious for the profession) इसके फलस्वरुप व्यक्ति की आजिविका क्षेत्र में बाधाएं, परेशानियां व अस्थिरता लेकर आता है. इस योग के व्यक्ति को आजिविका क्षेत्र में बेवजह अपयश की स्थिति से गुजरना पड सकता है.

दशमेश का अष्टमेश के साथ एक भाव में होने पर व्यक्ति को सफलता प्राप्ति के लिये अधिक मेहनत व संघर्ष करना पडता है. इस योग में अगर दशमेश का पाप प्रभाव व्यक्ति को गलत तरीके से लाभ प्राप्ति की संभावनाएं दे सकता है.

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