दशमेश का अन्य भाव के स्वामियों से सम्बन्ध विचार:- भाग--3 (Relationship of the tenth-lord with other house-lords According to Vedic Astrology: Part-3)



दशम भाव का स्वामी कुण्डली में जिस भाव के स्वामी के साथ स्थित होता है, उस भावेश की विशेषताएं भी व्यक्ति की आजिविका पर प्रभाव डालती है. जैसे:- जब कुण्डली में दशमेश के साथ चतुर्थेश हों तो व्यक्ति को समाज सेवा के कार्यो में रुचि हो सकती है. आईये देखे की दशमेश अन्य भावों के साथ स्थित होकर व्यक्ति की आजिविका को किस प्रकार प्रभावित करता है.

1. दशमेश की नवमेश के साथ युति:- (Conjunction of the tenth-lord with ninth-lord Through jyotish)
जिस व्यक्ति की कुण्डली में दशमेश के साथ नवम भाव के स्वामी की युति हो रही हों उस व्यक्ति को व्यवसायिक क्षेत्र में अपने पिता का सहयोग प्राप्त होता है. ऎसे व्यक्ति को कार्यक्षेत्र के कार्यो में भाग्य का सहयोग प्राप्त होने की संभावनाएं बनती है. (The conjunction of the tenth-lord with ninth-lord bless the person with good fortune at work)

नवम भाव क्योकि भाग्य व धर्म का भाव है, इसलिये इस योग के होने पर व्यक्ति को धार्मिक क्षेत्र में प्रयोग होने वाली विषय वस्तुओं से संबन्धित कार्य करना लाभकारी होता है. इसके अलावा व्यक्ति किसी धार्मिक स्थल का कार्यकर्ता भी बन सकता है.

धर्म क्षेत्रों में काम करने वाले सभी पादरी, पुजारी अथवा अन्य धर्म अधिकारी इस योग के प्रभाव क्षेत्र में आते है. नवम भाव न्यायपालिका व लम्बी दूरी की यात्राओं का भाव है. इसके कारण ऎसा व्यक्ति वकील या जज भी बन सकता है. इस योग के व्यक्ति को जनहित के कार्यो में रुचि होने की भी संभावनाएं बनती है.

2. दशमेश एकादश भाव के स्वामी के साथ:-(conjunction of the tenth-lord with eleventh lord Through Astrology)
आजिविका घर का स्वामी जब आय के स्वामी के साथ हों तो व्यक्ति के नौकरी करने की जगह व्यापार करने की अधिक संभावनाएं बनती है. (The conjunction of these two planets inclien the person towards business rather a job) इस योग का व्यक्ति व्यापारिक क्रियाओं में कुशल होता है. यह योग व्यक्ति अपनी पूंजी व्यापार के विस्तार के लिये प्रयोग कर सकता है. ऎसे व्यक्ति को नियोजन कार्य में योग्यता प्राप्त हो सकती है.

दशमेश व एकादशसे की युति व्यक्ति को महत्वकांक्षी बनाती है. वह अधिक से अधिक आय प्राप्त करने का प्रयास करता है. तथा अपने लाभों को बढाने के लिये प्रयासरत रहता है. एकादश भाव का स्वामी लाभ भाव का स्वामी होने के कारण व्यक्ति जिस भी कार्य को करता है, उसे उसमें लाभ प्राप्त होने की संभावनाएं बनती है. कार्येश व लाभेश की युति व्यक्ति के व्यापार में विस्तार व विकास के अवसर देकर धन व समृ्द्धि देती है.

3. दशमेश व द्वादश भाव के स्वामी की युति:-(conjunction of the tenth-lord with twelfth-lord according to Astrology)
कर्म भाव व व्यय भाव के स्वामियों का संबन्ध व्यक्ति की आजिविका को विदेश से जोडता है. इस योग के व्यक्ति को कार्यक्षेत्र के कार्यो से विदेश में बार-बार जाने के अवसर प्राप्त हो सकते है. तथा जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करने के लिये उसे घर से दूर रहना पड सकता है.

इस योग में कार्येश का व्यय भाव के स्वामी के साथ युति हो रही है, इसके कारण कभी कभी व्यक्ति में आलस्य भाव अधिक आने की भी संभावनाएं बनती है. द्वादश भाव के कार्यक्षेत्र में आने वाले आजिविका क्षेत्र में अस्पताल, कारागार इत्यादि आते है. ऎसा व्यक्ति इनमें से किसी एक क्षेत्र में काम कर सफलता प्राप्त कर सकता है. यह योग व्यक्ति के कार्यक्षेत्र के व्ययों में बढोतरी करने में सहयोग कर सकता है.

दशम भाव के स्वामी का व्यय भाव के स्वामी से संबन्ध होने पर व्यक्ति कभी कभी वैरागी हो जाता है. (The conjunction of the tenth-lord with the eleventh lord make the person solitary or ungregarious in nature.) ऎसे में उसे सिर्फ मोक्षवादी हो जाता है. वह संसारिक कार्यो में रुचि नहीं लेता है. काल पुरुष की कुण्डली में द्वादश भाव में मीन राशि पडती है. जब द्वादश भाव में मीन राशि हों तथा मीन राशि में केतु स्थित हों तो व्यक्ति संसारिक विषयों से परे जीवन व्यतीत करता है.

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