1. Category archives for: वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology)

वर्ष के प्रारम्भ होते ही हमारी उत्सुकता बढ़ जाती है कि नया साल कैसा रहेगा.पूरे साल में घटने वाली घटना के लिए हम वर्ष का राशिफल देखते हैं.

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

मंगल को क्रूर ग्रह के रूप में ज्योतिषशास्त्र में मान्यता प्राप्त है. विवाह के संदर्भ में शनि, राहु, केतु, सूर्य और शुक्र भी परेशानी देना वाला होता है फिर इन ग्रहों की अपेक्षा मंगल का भय सबसे अधिक सताता है.

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

ज्योतिष 12 घर और नौ ग्रहों का शास्त्र है.इन्हीं बारह घरों में बैठकर नवग्रह अपना अपना प्रभाव दिखाते हैं.

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

20 दिसम्बर को गुरू राशि परिवर्तन करके कुम्भ राशि में प्रवेश कर रहा है. इस राशि में इसका गोचर 1 मई तक रहेगा. इस दौरान गुरू की रजत स्थिति रहेगी तथा यह कृतिका नक्षत्र के दूसरे, तीसरे तथा चौथे पद तथा रोहिणी नक्षत्र के चारों पदों में एवं मृगशिरा...

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

गुरू को नवग्रहों में शुभ ग्रह के रूप में जाना जाता है. यह धर्म और अध्यात्म का प्रतिनिधित्व करता है. विवाह, संतान की प्राप्ति, शिक्षा एवं ज्ञान के साथ ही साथ शुभता एवं खुशहाली के लिए भी गुरू की स्थिति से विचार किया जाता है. यही कारण है कि गु...

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या को दर्श के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि में जन्म माता पिता की आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव डालता है। जो व्यक्ति अमावस्या तिथि में जन्म लेते हैं उन्हें जीवन में आर्थिक तंगी का सामना करना होता है। इन्हें यश और ...

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

हमारा जीवन चक्र ग्रहों की गति और चाल पर निर्भर करता है. ज्योतिष शास्त्र इन्हीं ग्रहों के माध्य से जीवन की स्थितियों का आंकलन करता है और भविष्य फल बताता है. ज्योतिष गणना में योग का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है. कुछ योग शुभ स्थिति बताते हैं तो...

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस लग्न में व्यक्ति का जन्म होता है.उससे विभिन्न राशियों के अनुसार साझेदारी का फल मिलता है.अगर आप किसी से साझेदारी या दोस्ती करने जा रहे हैं तो यह देखिये कि क्या आपकी राशि से उस व्यक्ति की राशि में तालमेल बैठ रहा ह...

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

कुण्डली में फलादेश (future prediction from birth chart) करते समय सटीक फलादेश के लिए महादशा (major period) और अन्तर्दशा (sub-period) के साथ ग्रहों के गोचर (Transition of planet) पर दृष्टि रखना आवश्यक होता है .ऐसा इसलिए होता है कि महादशा और अ...

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

गृहस्थ जीवन में संतान सुख की कामना सभी विवाहित स्त्री पुरूष करते हैं.संतान सुख आपको मिलेगा या नहीं यह सब आपकी कुण्डली में स्थित ग्रह निर्धारित करते हैं.

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

ग्रहों के गोचर का सामान्य नियम यह है कि जब कोई ग्रह शुभ भाव में गोचर करता है तब शुभ फल देता है परंतु ग्रह का वेध होने पर शुभ फल नहीं मिल पाता है.

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

ज्योतिषशास्त्र में चन्द्रमा को शुभ और सौम्य ग्रह के रूप में मान्यता प्राप्त है. मंगल को क्रूर और अशुभ ग्रहों के रूप में स्थान दिया गया है.

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »

ग्रहों का पथ अंडाकार होने से पृथ्वी की गति से जब अन्य ग्रहों की गति कम होती है तब वे विपरीत दिशा में चलते हुए प्रतीत होते हैं जिससे ग्रहो को वक्री कहते हैं.

Posted in वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) | और पढो »