1. Category archives for: वैशिष्टय (Feature)

जैमिनी ज्योतिष (Jaimini Jyotish) में आत्मकारक ग्रह नवमांश कुण्डली में जिस राशि में होता है वह कारकांश राशि (Karkamsha Rashi) कहलाती है. कारकांश राशि को लग्न माना जाता है और अन्य ग्रहों की स्थिति जन्म कुण्डली की तरह होने पर जो कुण्डली तैयार ...

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जिस प्रकार कुण्डली में राजयोग सुख, वैभव, उन्नति और सफलता देता है उसी प्रकार विपरीत राजयोग भी शुभ फलदायी होता है. ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार जब विपरीत राजयोग (Vipreet Rajyoga) बनाने वाले ग्रह की दशा चलती है तब परिस्थितयां तेजी से बदलती है ...

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सभी व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते है। लेकिन मानव शरीर मशीन के समान है इसलिए समय समय पर स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां आती रहती हैं। स्वास्थ्य में जल्दी सुधार नहीं होने पर चिंता होती है।

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ग्रहों का पथ अंडाकार होने से पृथ्वी की गति से जब अन्य ग्रहों की गति कम होती है तब वे विपरीत दिशा में चलते हुए प्रतीत होते हैं जिससे ग्रहो को वक्री कहते हैं.

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