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रत्नों द्वारा रोग का उपचार भाग एक (Gemstone Therapy part 1)

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भूलने की बीमारी और रत्न चिकित्सा (Memory lapse and Gemstone)
इस रोग में बीती हुई बहुत सी घटनाएं अथवा बातें याद नहीं रहती है.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुण्डली में जब लग्न और लग्नेश पाप पीड़ित होते हैं तो इस प्रकार की स्थिति होती है.सूर्य और बुध जब मेष राशि में होता है और शुक्र अथवा शनि उसे पीड़ित करते हैं तो स्मृति दोष की संभावना बनती है.साढे साती के समय जब  शनि की महादशा चलती है उस समय भी भूलने की बीमारी की संभावना प्रबल रहती ह.रत्न चिकित्सा पद्धति के अनुसार मोती और माणिक्य धारण करना इय रोग मे लापप्रद होता है.

सफेद दाग़ और रत्न चिकित्सा(Leucoderma and Gem therapy)
सफेद दाग़ त्वचा सम्बन्धी रोग है.इस रोग में त्वचा पर सफेद रंग के चकत्ते उभर आते हैं.यह रोग तब होता है जब वृष, राशि में चन्द्र, मंगल एवं शनि का योग बनता है.कर्क, मकर, कुम्भ और मीन को जल राशि के नाम से जाना जाता है.चन्द्रमा और शुक्र जब इस राशि में युति बनाते हैं तो व्यक्ति इस रोग से पीड़ित होने की संभावना रहती है.बुध के शत्रु राशि में होने पर अथवा वक्री होने पर भी इस रोग की संभावना बनती है.इस रोग की स्थिति में हीरा, मोती एवं पुखराज धारण करने से लाभ मिलता है.

गंजापन और रत्न चिकित्सा( Baldness and Gem Therapy)
गंजापन बालों के झड़ने से सम्बन्धित रोग है.आनुवांशिक कारणों के अलावा यह रोग एलर्जी अथवा किसी अन्य रोग के कारण होता है.जिनकी कुण्डली के लग्न स्थान में तुला अथवा मेष राशि में स्थित होकर सूर्य शनि पर दृष्टि डालता है उन्हें गंजेपन की समस्या से पीड़ित होने की संभावना अधिक रहती है.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार नीलम और पन्ना धारण करके इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है.

मधुमेह और रत्न चिकित्सा(Diabetes and Gem Therapy)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मधुमेह यानी डयबिटीज का सामना उस स्थिति में करना होता है जबकि कर्क, वृश्चिक अथवा मीन राशि में पाप ग्रहों की संख्या दो या उससे अधिक रहती है.लग्नपति के साथ बृहस्पति छठे भाव में हो तुला राशि में पाप ग्रहों की संख्या दो अथवा उससे अधिक हो तो इस रोग की संभावना बनती है.अष्टमेश और षष्ठेश कुण्डली में जब एक दूसरे के घर में होते हैं तब भी इस रोग का भय रहता है.रत्न चिकित्सा के अन्तर्गत इस रोग में मूंगा और पुखराज धारण करना लाभप्रद होता है.

दन्त रोग और रत्न ज्योतिष (Dental Problem and Gemstone)
दांतों का स्वामी बृहस्पति होता है.कुण्डली में बृहस्पति के पीड़ित होने पर दांतों में तकलीफ का सामना करना होता है.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बृहस्पति जब नीच राशि में होता है अथवा द्वितीय, नवम एवं द्वादश भाव में होता है तब दांत सम्बन्धी तकलीफ का सामना करना होता है.मूंगा और पुखराज इस रोग में लाभदायक होता है.लोहे का कड़ा घारण करना भी इस रोग में अनुकूल लाभ देता है.

नोट रत्न धारण करने से पहले किसी रत्न विशेषज्ञ की सलाह लेना लाभकारी रहता है. 

 

Comments (2 posted):

Yogesh Bhavsar on 16 May, 2010 11:47:17
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aap ne is blog me ratno duwara rogo ka upchar ke bare me bataya hai accha laga padkar krpiya batay safed dag se rog ka upchar karna hai uske bare me batay me mail id per vistar se bataye ....me safed dag se pidit hoo.. 5 month seey..
ratna varma on 22 November, 2010 02:48:34
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namste pandit ji,
mera naam ratna hai.mai shastri nagar kanpur mai rahti hu.mere pat m dard hota hai doctor kahte hai alsar hai kripa upaye bataye pat gas ki problem bhi bahut rahti hai.mere sharir mai bahut takleef hai.mere liye koi ratan ho to bataye plz...........

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