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साम्पत्तिक काल क्या है (Sidereal time)

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सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है जिसके चारों तरफ अन्य ग्रह परिक्रमा करते हैं। ज्योतिषशास्त्र इसे ग्रह मानता है लेकिन लेकिन खगोल विज्ञान की दृष्टि में यह तारा है। हम जिस पृथ्वी पर निवास करते हैं वह पृथ्वी भी सूर्य की परिक्रमा करता है और इसी से दिन और रात एवं आयन में परिवर्तन होता है। 

साम्पत्तिक काल का रहस्य पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा में छुपा हुआ है। पृथ्वी अपने अक्ष पर 24 घंटे घूमता रहता है इसे परिक्रमण कहते हैं। पृथ्वी अपने अक्ष पर एक दिन में सूर्य की परिक्रमा करते हुए 360 डिग्री घूमती है। पृथ्वी द्वारा 360 डिग्री घूमने पर एक दिन पूरा होता है जिसे सौर दिवस कहते हैं। हलांकि आदर्श रूप में यह कह दिया जाता है कि 24 घंटे का एक परिक्रमण समय होता है जबकि यह अवधि 23 घंटे, 56 मिनट और 4.09 सेकेण्ड का होता है शेष बचा 3 मिनट 56 सेकेण्ड साम्पत्ति दिवस कहलाता है जो सौर दिवस का बचा हुआ भाग होता है। संक्षेप में साम्पत्तिक दिवस को परिभाषित करते हुए कह सकते हैं कि माध्यमिक बिन्दु से एक समय अंतराल से दसरे समय अंतराल तक पहुंचने में जो समय लगता है उसके बीच का बचा हुआ भाग साम्पत्तिक दिवस कहलाता है। 

साम्पत्तिक समय का ज्योतिषशास्त्र में महत्व (Sidereal time in Astrology)
एक साम्पत्तिक दिवस 24 साम्पत्ति घंटों से मिलकर बनता है। समय गणना के अनुसार यह पद्धति साम्पत्तिक समय कहलाती है। ज्योतिष गणना में साम्पत्तिक समय का बहुत ही महत्व है क्योंकि माना जाता है कि प्रति दिन किसी भी देश और स्थान का जो साम्पत्तिक काल होता है उस समय जो राशि चक्र की स्थिति होती है वही समान स्थिति अगले चक्र की भी होती है यानी एक साम्पत्तिक समय में जो राशियों की स्थिति होती है ठीक वही स्थिति अगले 24 घंटे के दौरान होगी। इसमें लग्न, दशम भाव एवं चतुर्थ भाव की स्थिति भी समान होगी। यही कारण है कि ज्योतिषशास्त्रियों को कुण्डली तैयार करते समय शुद्ध साम्पत्तिक समय की आवश्यकता होती है ताकि फलादेश शुद्ध प्राप्त हो सके। 

साम्पत्तिक दिवस की अपेक्षा सौर दिवस बड़ा होने का कारण (Solar day and Sideral day): 
साम्पत्तिक दिवस की अपेक्षा सौर दिवस बड़ा होता है जिसका कारण यह है कि पृथ्वी एक चक्र एक साम्पत्तिक दिवस में पूरा करती है और इस अवधि में सूर्य राशि चक्र में एक 10 घूम जाता है। सूर्य के 10 घूमने से पृथ्वी को सूर्य की स्थिति में पहुंचने के लिए उसे भी इतना ही अधिक और घूमना होता है जिसके लिए पृथ्वी को अतिरिक्त 4 मिनट का समय लगता है यानी सूर्य को 360.9860 घूमना होता है। 

Comments (1 posted):

sukant on 13 January, 2009 12:49:04
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this is very good wab sied for educ. & jyotish knowlage

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