- आपकी जन्म कुंडली
- कुंडली फलादेश
- कालसर्प दोष चैक
- वर्ष कुंडली
- वर्षफल
- राशिफल
- आज का राशिफल
- मासिक राशिफल
- दैनिक ज्योतिष
- चौघड़िया
- राहुकाल
- आज का पंचाग
- वैवाहिक ज्योतिष
- विवाह मिलान
- मांगलिक दोष
- लाल किताब
- लालकिताब कुंडली
- लालकिताब कुंडली
- अंक ज्योतिष
- आपका नाम
- आपका जन्मदिन
- नाम सलाह
- अन्य
- शुभ राशि रत्न
- शुभ रुद्राक्ष
लाल किताब में ग्रहो की दृष्टियाँ (Aspects of Planets in Lal-Kitab)
वैदिक ज्योतिष में दृ्ष्टियो के सम्बन्ध में अपना एक अलग सिद्धान्त है. यहाँ पर दृष्टि ग्रह की होती है भाव की नहीं. दूसरे पूर्ण दृष्टि ही मान्य है आधी-अधूरी नही. वैदिक ज्योतिष के एक अन्य सिद्धान्त में नैसर्गिक ग्रहो की मित्रता एंव शत्रुता स्थायी होती है तथा एक-दूसरे पर दृष्टि का आधार भी नैसर्गिक होता है. परन्तु लाल किताब अपने विशेष सिद्धान्त पर कार्य करती है.
लाल किताब के सिद्वांत:
1) यहाँ दृष्टि भावों की होती है ग्रहो की नही. भाव विशेष में ग्रह के होने से ग्रह को भाव की दृष्टि मिलती है. उदाहरण के लिए प्रथम भाव सप्तम भाव को पुर्ण दृ्ष्टि (100%) से देखता है, तो यदि कोइ भी ग्रह लग्न भाव मे़ आ जाये तो वह भी सप्तम भाव को पुर्ण दृ्ष्टि से देखेगा. परन्तु उस ग्रह के अन्य भाव में जाने पर यह नियम लागू नही होगा.
2) लाल किताब के आधार पर भाव की पुर्ण (100%), आधी (50%) एंव चौथाई दृ्ष्टि होती है(25%)
3) वैदिक ज्योतिष के विपरीत लाल किताब में नैसर्गिक ग्रहो की मित्रता एंव शत्रुता अस्थाई होती है. उदाहरण के लिए सुर्य एंव शनि में नैसर्गिक शत्रुता है. लाल किताब की कुण्डली में सुर्य प्रथम भाव तथा शनि नवम भाव में स्थित है. चूंकि शनि, सुर्य से नवम भाव में स्थित है तो शनि सुर्य की बुनियाद है अतः यहाँ पर शनि, सुर्य से मित्रता का भाव रखते हुए उसकी भरपूर मदद करेगा. अब हम यहाँ दूसरा उदाहरण लेते हैं. सुर्य एंव मंगल आपस में नैसर्गिक मित्र हैं. लाल किताब की कुण्डली मे सुर्य पंचम भाव तथा मंगल दशम भाव में स्थित है. तो इस स्थिति में मंगल अपनी आँठवी टकराव की दृ्ष्टि से सुर्य को हानि पहुचायेगा.
इस बात से सिद्ध होता है कि लाल किताब में ग्रहो की नैसर्गिक मित्रता एंव शत्रुता का कोइ अर्थ नही है क्योकि भावो की दृष्टि या दो या दो से अधिक ग्रहो के मध्य बनने वाली दृष्टियो के फलस्वरुप विभिन्न ग्रहो के आपसी सम्बन्धो में परिवर्तन आ जायेगा.
वैदिक ज्योतिष से लाल किताब का एक और अन्तर स्पष्ट होता है. वैदिक ज्योतिष के सिद्धान्त में प्रत्येक ग्रह की सप्तम दृष्टि होती है. मान लो सुर्य तृ्तीय भाव में स्थित होकर नवम भाव में स्थित चन्द्रमा को देख रहा है तो नवम भाव का चन्द्रमा भी तृ्तीयस्थ सुर्य को सप्तम दृष्टि से देखेगा अर्थात सुर्य व चन्द्र दोनो ग्रहो की एक दूसरे पर दृष्टि होगी. परन्तु लाल किताब में एसा नहीं है. तृ्तीय भाव का सुर्य नवम भावस्थ चन्द्रमा को देखता है परन्तु चन्द्रमा सुर्य को नही देखेगा. लाल किताब में परस्पर दृष्टि सम्बन्ध नही होता तथा ना ही भाव की विपरीत दृष्टि होती है. इस प्रकार आप लाल किताब को बहुत अच्छी प्रकार समझ सकते हैं.
नोट: लाल किताब की संर्पूण गणनाये, फलित व उपाय लाल किताब एक्सप्लोरर में उपलब्ध हैं।आप इसका 45 दिन तक मुफ्त उपयोग कर सकते हैं । कीमत 1750 रु. जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करे
- शुक्र ग्रह की शान्ति के उपाय- Remedies for Venus
- Monthly Horoscope September 2010 - मासिक होरोस्कोप
- पंचक - Panchak
- शनि साढेसाती के तीन चरण - Three Steps of Shani Sade Sati and you
- कालसर्प शान्ति के लिये नाग पंचमी पूजा- Nag Panchmi 2010: An Occasion to Pacify Kalsarp Dosha
- सोये ग्रह के लिये उपाय - Lal Kitab Remedies for Sleepy Planets
- गुरु वक्री:- 23 जुलाई 2010 कुम्भ में वापसी - Retrograde Jupiter re-enters Aquarius sign: 23rd July 2010
- मंगल का कन्या राशि में प्रवेश Mars Enters Virgo 20 July 2010
- Raksha Bandhan Muhurat - 24th August 2010 - रक्षा बंधन मुहूर्त 24 अगस्त 2010
- प्रेम विवाह - Love Marriage analysis through the Birth Chart
- विवाह समय निर्धारण - Calculating the time of marriage through Mahadasha
- विवाह के तीन सूत्र ग्रह : गुरु, शुक्र व मंगल (Three keys to marriage astrology : Jupiter, Venus and Mars)
- बुध व गुरु ग्रह की शान्ति के उपाय (Remedies for Mercury and Jupiter according to Vedic Astrology)
- विवाह से पूर्व प्रश्न कुण्डली से जानिए भावी दम्पत्ति का स्वभाव (Know the nature of the married couple through Horary astrology)
- विवाह के लिए प्रश्न कुण्डली में ग्रह स्थिति (The position of planets in the Prashna kundali)


del.icio.us
Digg