दृष्टियाँ (Aspects In Lal Kitab)
1) पूर्ण दृष्टि (Full Aspect)पूर्ण दृष्टि का अर्थ होता है 100 प्रतिशत दृष्टि. इसके अन्तर्गत प्रथम भाव (First House) अपनी 100 प्रतिशत दृष्टि से सप्तम भाव (Seventh House) को देखता है. चतुर्थ भाव (Fourth House) 100 प्रतिशत दृष्टि से दशम भाव (Tenth House) को देखता है. और अष्टम भाव (Eighth House) उल्टा 100 प्रतिशत दृष्टि से द्वितीय भाव (Second House) को देखता है. 100 प्रतिशत की दृष्टि की हालत में 2 ग्रह एक-दूसरे के ज्यादा निकट होकर पूर्ण प्रभाव डालते है.
2) अर्द्ध दृष्टि (Half Aspect)
अर्द्ध दृष्टि का अर्थ होता है 50 प्रतिशत दृष्टि. इसके अन्तर्गत तृतीय भाव (Third House) अपनी 50 प्रतिशत दृष्टि से नवम (Ni एंव एकादश भाव (Ninth And Eleventh House) को देखता है. इसी प्रकार पंचम भाव अपनी 50%(प्रतिशत) दृष्टि से नवम भाव को देखता है. इस प्रकार के दृष्टि सम्बन्ध में दोनो ग्रह का प्रभाव आधा रह जाता है.

3) एक चौथाई दृष्टि(One-Quarter Aspect)
एक चौथाई दृष्टि का अर्थ होता है 25 प्रतिशत दृष्टि. इसके अन्तर्गत द्वितीय भाव 25 प्रतिशत की दृष्टि से षष्ट भाव (Sixth House) को देखता है. षष्ट भाव अपनी 25 प्रतिशत की दृष्टि से द्वादश भाव (Tenth House) को देखता है तथा अष्टम भाव (Eighth House) भी 25 प्रतिशत की दृष्टि से द्वाद्श भाव (Tenth House) को देखता है. 25 प्रतिशत की दृष्टि होने पर सम्बन्धित भाव दूसरे भाव पर अपना केवल एक चौथाई प्रभाव ही डाल पाता है.

दृष्टि के सम्बन्ध में यहाँ कुछ अपवाद भी है, जैसे कि बुध यदि बारहवे भाव (Mercury In Twelveth House) में हो तो वह अपना प्रभाव छटे भाव( Aspect on Sixth House) पर डालता है. तथा बुध नवम भाव (Mercury In Ninth House) में होकर तृतीय भाव (Aspect On Third House) को प्रभावित करता है. शनि यदि छटे भाव में (Saturn In Sixth House) हो तो वह अपना प्रभाव दूसरे भाव (Aspect On Second House) पर डालता है.
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