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बुनियाद (Buniyad Kundli In Lal Kitab)
कुण्डली के किसी भी भाव में स्थित ग्रह अपने से नवम भाव (Ninth House) में स्थित ग्रह उसकी बुनियाद होगा. यहाँ पर भी नैसर्गिक शत्रुता-मित्रता (Natural Enmity And Friendship) का नियम लागु नहीं होता. उपरोक्त कुण्डली में लग्न में शुक्र स्थित (Venus In the Ascendant) है एंव नवम भाव में गुरु (Jupiter In Ninth House) स्थित है.
इस स्थिति में गुरु-शुक्र ग्रह की बुनियाद होगा. वास्तव में बुनियाद (Buniyad) का अर्थ होता है आधार अर्थात शुक्र ग्रह का शुभाशुभ फल गुरु की शुभता/अशुभता पर निर्भर करेगा. इसी प्रकार कुण्डली के द्वितीय भाव में चन्द्रमा (Moon In Second House) स्थित है, मंगल ग्रह इससे नवम स्थान पर होने के कारण चन्द्रमा की बुनियाद कहलायेगा. यदि मंगल शुभ (Exalted Mars) स्थिति में है तो चन्द्रमा भी शुभ होगा और मंगल के अशुभ होने पर चन्द्रमा अशुभ फलदायी (Phaladayee) होगा. इसी प्रकार प्रत्येक ग्रह के फल अपने से नवम भाव में स्थित ग्रहों की शुभाशुभ अवस्था से प्रभावित होंगे.यदि सूक्ष्मता से विश्लेषण किया जाये तो जो ग्रह आपसी मदद (Mutual Help) करता है वही ग्रह मदद पाने वाले ग्रह की बुनियाद होता है. अब यहाँ एक बात स्पष्ट है कि कुण्डली में ग्रह का फल बुनियाद वाले ग्रह (Buniyad Wale) की स्थिति पर निर्भर करता है. यदि बुनियादी ग्रह मजबूत स्थिति में है तो वह ग्रह भी मजबूत होगा जिसकी बुनियाद यह ग्रह है. और बुनियादी ग्रह के कमजोर होने पर दूसरा ग्रह भी कमजोर होगा. शुभ स्थिति में होने पर बुनियादी ग्रह अपने गुणों की शक्ति तो दूसरे ग्रह को देता है साथ ही वह दूसरा ग्रह भी अपने गुणों का पूरी शक्ति के साथ उपयोग करता है. विपरीत स्थिति होने पर विपरीत परिणाम होता है.
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