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टकराव (Collision In Lal Kitab)
उपरोक्त कुण्डली में लग्न में चन्द्रमा (Moon in the Ascendant) स्थित है तथा अष्टम भाव में बृहस्पति (Jupiter In the Eighth House) है तो इस स्थिति में चन्द्रमा, बृहस्पति के फल (Result Of Jupiter) को दूषित करेगा क्योंकि चन्द्र और बृहस्पति के मध्य टकराव की दृष्टि है. इसी प्रकार की स्थिति का निर्माण सूर्य व मंगल (Sun And Mars) के मध्य भी हो रहा है. यद्यपि यदि नैसर्गिक दृष्टि (Natural Aspects) से देखा जाये तो चन्द्र और बृहस्पति तथा सूर्य और मंगल आपस में मित्रवत है, परन्तु इस दृष्टि के सिद्धान्त में इस मित्रता का कोई महत्व नहीं. यहाँ टकराव की दृष्टि वाला(Takrab Ki Dristi Wala) सिद्धान्त कार्य करेगा जिसका परिणाम अशुभ (Malefic Result) है.
यदि हम इसे वैदिक ज्योतिष के सन्दर्भ में देखें तो वहाँ पर भी एक दूसरे से छटे-अँठवे भाव (Sixth And Eighth House) में होने पर षडाष्टक नामक योग (Shadhastak Yog) बनता है जो कि प्रतिकूल परिणाम देता है. फर्क सिर्फ इतना है कि मित्र ग्रहों के बीच बनने वाला षडाष्टक योग कम अशुभ होता है जबकि परम शत्रु ग्रहों के मध्य बनने वाला षडाष्टक योग भयंकर परिणाम (Serious Result Of Shadhastak Yog) देता है. लेकिन किताब में ऎसा नहीं है, वहाँ पर जो ग्रह एक दूसरे से छटे-अँठवे हो अर्थात छटी स्थिति वाला ग्रह अष्टम स्थिति वाले ग्रह के फल को दूषित करता है तथा उसकी अशुभता एक सी होती है चाहे वो ग्रह मित्र हो या परम शत्रु.
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