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ग्रहो का आयु पर आम प्रभाव (Effects of planet's on life span)
लाल किताब पद्धति के अनुसार ब्यक्ति एक समय में दो ग्रहो के प्रभाव में रहता (Influence of two planets at the same time) है. एक तो 35 वर्षीय द्शा चक्र (Dasha chkra) होता है जो कि प्रत्येक व्यक्ति के जन्म समय के अनुसार अलग -2 होता है.
दुसरे प्रकार का ग्रह-चक्र (Grah Chakra) प्रत्येक व्यक्ति की आयु में एक ही ग्रह का रहता है. उदाहरण स्वरूप पाचँ या चालीस वर्ष कि आयु में प्रत्येक व्यक्ति शनि ग्रह से प्रभावित रहता है. जीवन के 16 से 21 वर्षो तक प्रत्येक व्यक्ति बृ्हस्पति ग्रह के प्रभाव (Influence of Jupiter on individuals) में रहता है. द्शा का यह चक्र 35 वर्षो का ही होता है. इसे हम निम्न तालिका से समझ सकते है.

मान लो अपने जीवन के 31 वें वर्ष कोई व्यक्ति केतु की दशा से गुजर रहा है तो उस पर मंगल ग्रह का भी प्रभाव रहेगा. वैसे तो लाल किताब में 12 वर्षो तक की कुण्डली को नाबालिग ग्रहो की कुण्डली (Nabalig kundli) माना जाता है. 12 वर्ष तक बच्चे पर शनि व राहु ग्रह का प्रभाव रहता है तत्पश्चात13 वें वर्ष से केतु ग्रह का प्रभाव प्रारम्भ होता है. आमतौर पर यदि व्यावहारिक रूप से देखा जाये तो जीवन के सोलहवें वर्ष में व्यक्ति पर बृ्हस्पति ग्रह का प्रभाव शुरु होता (Starting of influence of Jupiter at the age of sixteen) है जो कि उसकी शिक्षा के सम्बन्ध में फलितार्थ होता है. 16 से 21 वर्ष तक बृ्हस्पति तथा इसके पश्चात 22 वें वर्ष में सूर्य का प्रभाव प्रारम्भ होता (Influence of Sun at the age of 22 years) है जो की 23 वर्षो तक रहता है. तो बृ्हस्पति अर्थात 16 वें वर्ष से यह क्रम प्रारम्भ होकर केतु अर्थात 48 वे़ वर्ष(48 से 51 वर्ष) में समाप्त होता है. इन विशेष वर्षो में ग्रह अपना विशेष प्रभाव देते है चाहे वह प्रभाव शुभ हो या अशुभ.
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