लाल किताब
लाल किताब में बृ्हस्पति का प्रत्येक भाव के लिए उपाय (Lal Kitab Remedies for Jupiter in each house)
आमतौर पर वैदिक ज्योतिष में जब ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति (Debilitated and inaspicious position of planets) मे़ होता है तो उसका उपाय किया जाता है.
लाल किताब में दशा पद्धति (35 वर्ष) ( Methods of 'Dasha' in Lal kitab) (35 years)
वैदिक ज्योतिष मे दशा तीन प्रकार (Three types of dashas in vedic astrology) से निकाली जाती है। विंशोत्तरी दशा अष्टोत्तरी दशा (Vinshottori dasha and astottari dasha) एंव योगिनी दशा (Nagini dash)। तथा दशा चन्द्रमा के ऩक्षत्र (Dasha based on nakshatra of Moon) के आधार पर निकाली जाती है। ...वर्तमान समय में लाल किताब का उपयोगिता (Relevance of Lal Kitab in present time)
ज्योतिष के अन्तर्गत समय को जानने का बहुत सारी बिधाएं हैं. ज्योतिष की प्रत्येक शाखा में अपने -2 तरीके से उपाय करने का विधान (Two types of methods in astrology) हैं जैसे कि रत्नो के द्वारा भी कमजोर ग्रहो का उपाय (Remedies by ratna) किया जाता हैं, जबकी वैदिक जोतिष (Vedic astrology) में जप, तप, व्रत, दान, यज्ञ पूजा इत्यादि को महत्व दिया जाता हैं. ...लाल किताब में ग्रहों का उपाय और इलाज (Remedial methods for planets In Lal Kitab)
पहले घर मे़ बृ्हस्पति(Jupiter in the first house) शुभ फल देने वाला माना गया है परन्तु सातवां घर खाली होने के कारण बृ्हस्पति शुभ होते हुए भी निष्फल होगा अब ऎसे में शादी होने पर सातवें घर में शुक्र कायम होगा और उसके बाद यह ग्रह अपना शुभ फल देने लगेगा. ...लाल किताब के अनुसार दान की महत्ता (Importance Of Donation According To Lal Kitab)
भारतीय संस्कृति में दान को एक आवश्यक कर्म माना जाता है। शास्त्रो में तो यहाँ तक कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय का 10% गरीबो व जरुरतमन्दो को दान करना चाहिए। ...लाल किताब का इतिहास एंव वैदिक ज्योतिष से फलादेश से भिन्नता (History Of Lal Kitab And Its Difference From Vedic Prediction)
यह अठारहवीं सदी की बात है जब वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में प. गिरधारी लाल जी शर्मा अंग्रेजी हुकूमत में सरकारी पद पर आसीन थे. तो उस समय लाहौर में जमीन खोदने सम्बन्धित कार्य चल रहा था, खुदाई के दौरान उस जमीन में से ताम्बे की पाटिकाए प्राप्त हुई जिन पर उर्दू एंव फारसी भाषा में कुछ खुदा हुआ था. ...लाल किताब में ग्रहो के वक्रत्व की अवहेलना (Negligence Of Retrogression Of Planets In Lal Kitab)
वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रहो (Retrograde Planets In Vedic Jyotish) का महत्वपुर्ण रोल होता है. जब सुर्य एंव ग्रह विशेष में निश्चित अंशो की दूरी होती है तब ग्रह वक्री (Retrogression Of Planets) कहलाता है. कुछ ज्योतिर्वेदो के अनुसार ग्रह वक्री होने पर और अधिक बलवान हो जाता है अर्थात शुभग्रह वक्री होने (Retrogression Of Auspicious Planets) पर शुभ बलशाली एंव क्रुर ग्रह वक्री (Retrogression Of Inauspicious Planets) होने पर अशुभ बलशाली हो जाता है. ग्रह अपने वक्रत्व काल (Bakratwa Kal) में विशेष फल देता है. ...लाल किताब में अलग अलग ॠण (Different Types of Rins In Lal Kitab)
लाल किताब के अनुसार ऋण-पितृ (Pitru Rin) से तात्पर्य कुण्डली वाले व्यक्ति पर उसके अपने पूर्वजो के पाप का गुप्त प्रभाव होता है. कुण्डली में जिस ग्रह की राशी (Rashi Of Planet) में उसका दुश्मन ग्रह (Malefic Planet) बैठ जाये तथा वह ग्रह स्वंय भी अशुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति ऋण-पितृ से ग्रस्त होगा. ...लाल किताब में ग्रहो की दृष्टियाँ (Aspects of Planets in Lal-Kitab)
वैदिक ज्योतिष में दृ्ष्टियो के सम्बन्ध में अपना एक अलग सिद्धान्त है. यहाँ पर दृष्टि ग्रह की होती है भाव की नहीं. दूसरे पूर्ण दृष्टि ही मान्य है आधी-अधूरी नही. वैदिक ज्योतिष के एक अन्य सिद्धान्त में नैसर्गिक ग्रहो की मित्रता एंव शत्रुता स्थायी होती है तथा एक-दूसरे पर दृष्टि का आधार भी नैसर्गिक होता है. परन्तु लाल किताब अपने विशेष सिद्धान्त पर कार्य करती है....लाल किताब में सोया हुआ भाव/ ग्रह् (Sleepy House/Planets In Lal Kitab)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब कोइ ग्रह सुर्य के समीप आता है तो अस्त (Retrograde) हो जाता है. इसका आधार ग्रहो के अंश (Degree of Planets) होते हैं. चूकि लाल किताब (Lal Kitab) अंश के सिद्धान्त (Result of Degree) को मानती नही है अतः यहाँ पर भाव/ ग्रह के सोये होने (Sleepy Condition of House/ Planets ) का नियम लागू होता है. ...अन्य पोस्टें
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