Home | लाल किताब

लाल किताब

back 1 2 3 4 next total: 39 | displaying: 21 - 30
image

बुनियाद (Buniyad Kundli In Lal Kitab)

कुण्डली के किसी भी भाव में स्थित ग्रह अपने से नवम भाव (Ninth House) में स्थित ग्रह उसकी बुनियाद होगा. यहाँ पर भी नैसर्गिक शत्रुता-मित्रता (Natural Enmity And Friendship) का नियम लागु नहीं होता. उपरोक्त कुण्डली में लग्न में शुक्र स्थित (Venus In the Ascendant) है एंव नवम भाव में गुरु (Jupiter In Ninth House) स्थित है.
Full story
image

आपसी मदद (Mutual Help Kundli In Lal Kitab)

लाल किताब में दृष्टि के सम्बन्ध में कुछ विशेष नियम है जिनकी समीक्षा हम यहाँ करेंगे. ...
Full story
image

बनावटी ग्रह (Banawati Planets In Lal Kitab)

लाल किताब पद्वति मे बनावटी ग्रहो (Bnawati Planets) का प्रयोग किया जाता हे। बनावटी ग्रह दो अन्य ग्रहो के आपस में युति सम्बन्ध बनाने पर बनते हैं। जब मूल ग्रह (Mula Grah) किसी कारण से पीडित होता है तो उसे शुभ या बलवान बनाने के लिए बनावटी ग्रह का उपाय (Remedies For Banawati Planets) किया जाता हे। ...
Full story

कुर्बानी के बकरे (Kurbane Ke Bakre In Lal Kitab)

लाल किताब की अपनी एक पद्वति (Own method Of Lal Kitab) है. इसमें जब कोई ग्रह अपने शत्रु ग्रह (Shatru Grah) द्वारा पीडित होता है तो वह अपना अशुभ प्रभाव किसी अन्य ग्रह द्वारा प्रदर्शित करता है. जिस ग्रह के द्वारा वह पीडित ग्रह अपना प्रभाव प्रकट करता है उसे कुर्बानी का बकरा (Kurbane ke Bakre) कहा जाता है. अर्थात पीडित ग्रह (Afflicted Planets) अपनी बलाऎं अपने किसी मित्र पर डालकर स्वयं साफ बच निकलता है. कौन सा ग्रह किस अन्य को कुर्बान करता है वह इस प्रकार से है:- ...
Full story

सोया ग्रह (Sleepy Planets In Lal KItab)

जब पहले भावों (प्रथम से छटे भाव तक) में कोई ग्रह न हो तो (Absent Of Planets Starting From First House To Sixth House) बाद के भावों (सप्तम से द्वादश भाव) (From Seventh House To Twelveth House) के ग्रह सोए हुए माने जाते हैं अर्थात उन ग्रहों का शुभ या अशुभ प्रभाव सिर्फ उसी भाव में होगा जिस भाव में वो स्थित है. ...
Full story

दृष्टियाँ (Aspects In Lal Kitab)

लाल किताब (Lal kitab) में दृष्टि का सिद्धान्त वैदिक ज्योतिष पद्वति से सर्वथा भिन्न है. लाल किताब पद्वति में एक भाव की दृष्टि दूसरे भाव पर होती है. इसमें मुख्यतः तीन प्रकार की दृष्टि (Aspects) होती है. 1) पूर्ण दृष्टि (Full Aspect) 2) अर्द्ध दृष्टि (Half Aspect) 3) चौथाई दृष्टि ( One-Quarter Aspect) ...
Full story
image

नाबालिग ग्रहो वाली कुण्डली (Nabalig Graho Wali Kundali In Lal Kitab)

बालक के जन्म समय से लेकर 12 वर्ष की उम्र तक की कुण्डली को भी नाबालिग माना जाता है. इस स्थिति में एक से बारह वर्ष की आयु तक फलित देखने का नियम इस प्रकार से है:- ...
Full story
image

धोखा देने वाले ग्रह (Dhoka Dene Wale Grah In Lal Kitab)

जब व्यक्ति की कुण्डली नाबालिग (Nabalig) होती है तो उसे बारह वर्षों तक प्रत्येक वर्ष कौन सा ग्रह धोखा देता है उसका विवरण इस प्रकार है:- ...
Full story
image

मुकाबले के ग्रहो वाली कुण्डली (Mukable Ke Graho Wali Kundli In Lal Kitab)

वो ग्रह जिनमें आपस में नैसर्गिक मित्रता (Natural Friendship) हो उनमें से किसी एक ग्रह की राशी या भाव (Sign & Bhava) में कोई शत्रु ग्रह बैठ जाये तो दोनो मित्र ग्रहो की आपस में शत्रुता पैदा हो जायेगी तथा वह कुण्डली मुकाबले के ग्रहो वाली कुण्डली (Mukable Ke Graho Wali Kundli) कहलायेगी. ...
Full story

साथी ग्रहो वाली कुण्डली (Sathi Graho Wali Kundli In Lal Kitab)

जब किसी कुण्डली में ग्रह एक दूसरे की राशी में या एक दूसरे के पक्के घरों में अदल-बदल कर बैठ जायें तो ऎसी कुण्डली साथी ग्रहों वाली कुण्डली (Sathi Graho wali Kundli) कहलाती है. ...
Full story
back 1 2 3 4 next total: 39 | displaying: 21 - 30