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वर्तमान समय में लाल किताब का उपयोगिता (Relevance of Lal Kitab in present time)

image वर्तमान समय में लाल किताब का उपयोगिता (Relevance of Lal Kitab in present time)

ज्योतिष के अन्तर्गत समय को जानने का बहुत सारी बिधाएं हैं. ज्योतिष की प्रत्येक शाखा में अपने -2 तरीके से उपाय करने का विधान (Two types of methods in astrology) हैं जैसे कि रत्नो के द्वारा भी कमजोर ग्रहो का उपाय (Remedies by ratna) किया जाता हैं, जबकी वैदिक जोतिष (Vedic astrology) में जप, तप, व्रत, दान, यज्ञ पूजा इत्यादि को महत्व दिया जाता हैं.

वैदिक ज्योतिष के उपाय द्यपि शास्त्रोक्त होते हैं परन्तु श्रम साध्य और ज्ञान की आवश्यकता होने के कारण ये उपाय आम आदमी की पहुँच के बाहार होते हैं. फिर इन उपायो को करने में धन का व्यय भी अधिक होता हैं. तथा वैदिक उपाय के लिए एक कर्मकाण्डी बिद्वान की भी आवश्यकता होती हैं.

परन्तु ज्योतिष की एक नई शाखा लाल किताब में ग्रहो के उपायों (Planets remedies in Lal Kitab) को बडे़ ही सरल ढं से प्रस्तुत किया गया हैं, जिसे एक सामान्य व्यक्ति बिना किसी अन्य व्यक्ति की सहायता के स्वयं कर सकता हैं. इन उपायों को लगातार 40 से 43 दिनो तक या 40 से 43 सप्ताहो तक किया जाता हैं. इन उपायों के लिए किसी भी मन्त्र इत्यादि की आवश्यकता नहीं पडती बल्कि मात्र बहते पानी (दरिया) में ग्रह विशेष से सम्बन्धित वस्तुओ़ं को 40-43 दिनो तक बहाने (घोडे़ जाने से) अथवा किसी जगंल से सम्बन्धित वस्तुओ़ं को बाने से कार्य की सिद्धि होती हैं.

जो वस्तुएं दरिया मे़ बहायी या जगंल में दवाई जाती हे वो आधिक किमत की नहीं होती इस कारण इतना सस्ता सरल और आम आदमी के द्वारा आसानी से किए जाने के कारण यह र्तमान समय में दिनोदिन प्रसिद्धी प्राप्त कर रहा है. इस उपाय का केवल एक ही कमजोर पहलू है कि यदि 40 दिनो के बीच में उपाय का कोई दिन नागा रह जाता है तो यह उपाय भंग हो जाता है तथा इसे फिर से दोबारा प्रारम्भ करना पडता है. अर्थात 40 से 43 दिनो तक यदि इस एक दोष को छोड़ दिया जाये तो लाल किताब व्यवहारिक रूप से बहुत ही उपयोगी (Lal Kitab is useful for day-to-day life) है. लाल किताब के उपायों को आम बोल चाल की भाषा में टोटके भी कहा जाता है. इन टोटके को करने वक्त सबसे अच्छी बात यह भी है कि किसी विशेष नियम (40- 43 दिनो/ सप्ताह को छोड़कर) की आवश्यकता भी नही पड़ती.

जाति, भाषा,सम्प्रदाय की बाध्यता न होना भी इस किताब की प्रसिद्धि का एक अन्य कारण है. एक अन्य विशेषता जो इस किताब मे़ हैं वो है बनावटी ग्रह (Banawati Planets), दो ग्रहो की युति से बनने वाला ग्रह जो कि किसी अन्य ग्रह का प्रभाव रखता बनावटी कहलाता है.

अब यदि किसी ब्यक्ति की कुण्ड़ली में किसी ग्रह का दोष है तो उसके बनावटी ग्रहो का उपाय (Remedies for banawati planets) करके भी उस ग्रह के दोष से मुक्त हुआ जा सकता है़. स्त्रियां भी इन उपायों को आसानी से कर सकती है क्योंकी वैदिक ज्योतिष में शुचिता सम्बन्धी रखना अति आबश्यक है अन्यथा उपाय भंग हो जाता है तो बच्चे, बुढे, जवान, स्त्रियां सभी के लिए सर्व सुलभ होने के कारण भी लाल किताब की प्रासंगिकता या स्वीकार्यता (Relevance and recognition of Lal Kitab) बढ़ जाती है. अत: वर्तमान समय में लाल किताब बहुत उपयोगी (Lal Kitab is useful for nowadays) है.

आपके कमेन्ट्स (2 मिले):

rajkumar on 31 December, 2009 01:46:23
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43 dino ka niyam agar ghar ke sadasyo me se koi bhi sadasya part wise kare to kya shubh phal me koi kami hogi
hermender singh gandhi on 16 January, 2010 03:55:01
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I have a child of 2year( Girl Jaskirat). at the time of birth dt 29.02.2008 at 10.05pm in indore.some dirty water went in hermouth & she cried very slow. Now she is facing problem. Now she cant sit, not stand, not speak properly.& please suggest if any solution in your book

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