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लाल किताब में सोया हुआ भाव/ ग्रह् (Sleepy House/Planets In Lal Kitab)

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब कोइ ग्रह सुर्य के समीप आता है तो अस्त (Retrograde) हो जाता है. इसका आधार ग्रहो के अंश (Degree of Planets) होते हैं. चूकि लाल किताब (Lal Kitab) अंश के सिद्धान्त (Result of Degree) को मानती नही है अतः यहाँ पर भाव/ ग्रह के सोये होने (Sleepy Condition of House/ Planets ) का नियम लागू होता है.

लाल किताब में भाव की प्रधानता (Importance on House in Lal Kitab) है, ग्रह गौण होता है. ग्रह के सोने में दृष्टि (Planet's aspects in sleepy Condition) की बहुत महत्ता है. लाल किताब में जो दृष्टि का सिद्धान्त (Result of Aspect) है, वह तय करता है कि कौन सा ग्रह सोया हुआ है. ग्रह के सोया होने का तात्पर्य यह है कि ग्रह शुभ परिणाम देने में कमजोर हो जाता है. एसा लगता है जैसे कि मानो ग्रह को बाँध दिया गया हो व्यक्ति की चाहे खूब क्षमता हो और वह अथक परिश्रम करें परन्तु उसको परिणाम आशा के अनुरुप प्राप्त नही होता. जब कोइ भी ग्रह सोया हुआ हो तो उसे बलवान बनाने या क्रियाशील करने के लिए उस ग्रह का उपाय (Remedy of planet) किया जाता है जिससे वह ग्रह शुभ फलदायी बन जाता है.

इसके लिए लाल किताब की कुण्डली (Kundali in Lal Kitab) में अन्य विशेष ग्रह को भाव में बैठाना पडता है. जब ग्रह स्वंय की राशी, उच्च राशी या अपने पक्के घर (Pakka Ghar) में बैठा हो तो सदा जागृ्त अवस्था में रहता है.

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