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ग्रहो की समयावधि (Time Period Of Planets In Lal Kitab)
लाल किताब में जन्म से 48 वर्षों तक सभी नौ ग्रहो के नौ ऎसे विशेष वर्ष होते हैं जो ग्रह सम्बन्धित शुभ या अशुभ फल विशेष रुप से प्रदान करते हैं. कौन सा ग्रह किस वर्ष में विशेष फल (Vishesh Phal) देता हैवह इस प्रकार से है.
1) बृहस्पति ग्रह (Jupiter) का प्रभाव जातक के जीवन में सर्वप्रथम असर दिखाता है. सोलहवाँ वर्ष बृहस्पति का वर्ष (16 years Time Period Of Jupiter) होता है. इसे उदाहरण सहित समझाते हैं, मान लो किसी जातक की कुण्डली में बृहस्पति चतुर्थ भाव में उच्च का होकर (Exalted Jupiter In Fourth House) स्थित हो तो 16वें वर्ष जातक को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष लाभ (Development In Educational Field) मिलने का योग है. और यदि बृहस्पति छटे भाव (Jupiter In The Sixth House) में स्थित हो तो 16वें वर्ष शिक्षा में हानि की सम्भावना (Possibility of Educational loss) प्रतीत होती है.
2) सूर्य ग्रह (Sun) अपना विशेष शुभ या अशुभ प्रभाव आयु के 22वें वर्ष में दिखाता है. यदि कुण्डली में सूर्य उच्चादि का (Exlalted Sun In the Chart) होकर बलवान स्थिति में हो तो सरकार से सम्बन्धित कार्यों में पूर्ण रुप से लाभ (Profit In Goverment Works) मिलने की सम्भावना है. परन्तु सूर्य के नीचादि (Debilitated Sun) अशुभ स्थिति में होने पर सरकारी कार्यो में विघ्न (Obstacle In Government Works) एंव हानि की सम्भावना है.
3) चन्द्र ग्रह(Moon) अपना विशेष शुभ या अशुभ प्रभाव आयु के 24वें वर्ष में दिखाता है. कुण्डली में चन्द्रमा के उच्च या शुभ स्थिति (Exalted Moon In The Chart) में होने पर जातक को माता एंव अन्य सांसारिक सुखों (Worldly Pleasure) की प्राप्ति होती है. चन्द्रमा के अशुभ स्थिति नीचादि (Debilitated Moon) में होने पर माता के विषय में विपरीत फल (Negative Result) की प्राप्ति एंव मानसिक तनाव मिलने की सम्भावना है.
4) शुक्र (Venus) अपना शुभ या अशुभ प्रभाव आयु के 25वें वर्ष में विशेष रुप से दिखाता है. कुण्डली में शुक्र के उच्चादि (Exalted Venus) या स्वराशी (Swarashi) होकर बलवान होने पर पत्नी सम्बन्धी सांसारिक सुखों (Worldly Pleasure For Wife) के मिलने का पूर्ण योग (Full Yog) है. परन्तु शुक्र के नीचादि (Debilitated Venus) होकर अशुभ स्थिति में होने पर पत्नी सम्बन्धी सुख में बाधा एंव सांसारिक सुख में अभाव (Lack of Worldly Pleasure) रहने की सम्भावना है.
5) मंगल ग्रह (Mars) अपना शुभ या अशुभ प्रभाव (Own Auspicious And Inaspicious Influence) आयु के 28वें वर्ष में दिखाता है. कुण्डली में मंगल के उच्चादि (Exalted Mars In The Chart) होकर शुभ होने से भाई, मकान, जमीन-जायदाद से सम्बन्धित कार्यो में लाभ मिलने का योग (Profit Yog) है. जबकि मंगल के नीचादि (Debilitated Mars) होकर स्थित होने से उपरोक्त सम्बन्धित विषयों में हानि की सम्भावना है.
6) बुध ग्रह (Mercury) अपना शुभ या अशुभ प्रभाव जातक की आयु के 34वें वर्ष में दिखाता है. कुण्डली में बुध के उच्चादि (Exalted Mercury) होकर स्थित होने से व्यापार आदि में लाभ मिलने का योग (profit Yog In Business) है. जबकि बुध के नीचादि होकर (Debilitated Mercury) अशुभ प्रभाव में होने से व्यापार में हानि की सम्भावना (Possibility Of Loss In The Business) है.
7) शनि ग्रह (Saturn) अपना शुभ या अशुभ प्रभाव आयु के 36वें वर्ष में देता है. शनि यदि कुण्डली में उच्चादि होकर (Exalted Saturn) स्थित हो तो मकान, बडे व्यवसाय एंव स्वतन्त्र रुप से किये जाने वाले कार्यो में लाभ देता है. परन्तु शनि यदि कुण्डली में नीचादि (Debilitated Saturn In The Chart) होकर अशुभ हो तो उपरोक्त विषयों के सम्बन्ध में हानि देता है.
8) राहु ग्रह (Rahu) अपना शुभ या अशुभ प्रभाव आयु के 42 वें वर्ष में प्रदान करता है. कुण्डली में राहु यदि उच्चादि होकर (Exalted Rahu In The Chart) शुभ स्थित में हो राजनीति आदि के क्षेत्र में विशेष लाभ (Political Gain) देता है. लेकिन यदि राहु कुण्डली में किसी भी प्रकार अशुभ (Debilitated Rahu In The Chart) स्थिति में हो तो राजनैतिक रुप से षडयन्त्र का शिकार (Political Conspiracy) बनता है तथा मानसिक तनाव (Mental Tension) रहता है.
9) केतु ग्रह (Ketu) अपना विशेष शुभ या अशुभ प्रभाव आयु के 42वें वर्ष में दिखाता है. केतु यदि कुण्डली में उच्चादि (Exalted Ketu) होकर स्थिति हो तो सन्तान एंव मामा के सम्बन्ध में विशेष लाभ देता है. परन्तु केतु के नीचादि होकर अशुभ स्थिति (Debilitated Ketu) में होने पर उपरोक्त विषयो के सम्बन्ध में हानि देता है.
तालिकाक्र. ग्रह विशेष वर्ष
1. बृहस्पति 16वाँ
2. सूर्य 22वाँ
3. चन्द्र 24वाँ
4. शुक्र 25वाँ
5. मंगल 28वाँ
6. बुध 34वाँ
7. शनि 36वाँ
8. राहु 42वाँ
9. केतु 48वाँ
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