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आय वर्ग विचार (Aye Wargh)
भारत सांस्कृतिक रूप से विश्व में श्रेष्ठ माना जाता है। भारतीय अध्यात्म और दर्शन विश्व को अपनी ओर आकर्षित करता है। भारतीय अध्यात्म और दर्शन का ही एक अंग है ज्योतिष। ज्योतिष यानी रोशनी दिखने वाला अर्थात भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों पर प्रकाश डालने वाला ज्ञान है ज्योतिष। ज्योतिष के वैदिक शाखा(Banch of Vedic) में कुण्डली से जीवन के विषय में सभी प्रकार के प्रश्नों का हल ढूंढा जाता है। भारतीय परम्परा में विवाह पूर्व वर वधू के आने वाले जीवन के विषय में आंकलन(Assessment) करने के लिए कुण्डली मिलाने(Kundli matching) की परम्परा रही है।
उत्तर भारत में ज्योतिष महोदय अष्टकूट से वैवाहिक कुण्डली का मिलान करते हैं(In North India Astrlogers Matching Kundli from Asht koot) जबकि दक्षिण भारत में 20 कूटों से इस विषय में विचार किया जाता है(South Indiand Matching Kundli from 20 Koot)। बीस कूटों में से आय वर्ग भी एक है(Aye Wargh from 20 Koot)। आइये यहां हम इसी के विषय में बात करें। आय वर्ग से कुण्डली इसलिए मिलायी जाती है क्योंकि इससे पता चलता है कि विवाह के पश्चात परिवार की आय कैसी रहेगी। उत्तर भारत में आमतौर पर इसका प्रयोग वास्तु में होता है यानी जब आप नया घर खरीदते हैं या नये घर में प्रवेश करते हैं तब आय वर्ग से आंकलन किया जाता है कि घर में रहने वाले व्यक्ति की आय कैसी रहेगी। उत्तर भारतीय परम्परा से अलग दक्षिण भारतीय ज्योतिष परम्परा में आय वर्ग का प्रयोग वर -कन्या के कुण्डली मिलान में प्रयोग किया जाता है। आय कुल आठ प्रकार के होते हैं( Total 8 types of Aye):
1. ध्वज (Dhwaj) 2.धूम (Dhoom) 3.सिंह (Singh) 4.कुक्कुट (Kukut) 5.वृष (vrish) 6.खर (khr) 7.गज (Gaj) 8.काक (Kak)
इन आठों आयों को क्रमानुसार अश्विनी से प्रारम्भ करके पूर्व दिशा से परिक्रमानुसार(Orederwise) आठ दिशाओं में तीन बार स्थापित किया जाता है। इसके पश्चात शेष तीन नक्षत्रों को भी ध्वज, धूम एवं सिंह आय में स्थापित (Three Nakshatras is also Stablished in three Aye that is Dhwaj, Dhoom and Singh) किया जाता है इसके पश्चात वर-कन्या के नक्षत्रों का आंकलन किया जाता है। आंकलन में वर कन्या के नक्षत्र जिन आयों में पड़े वे दोनों आय एक - दूसरे से पंचम(Fifth House) बैठे तो ऐसा माना जाता है कि दोनों के बीच कलह हो सकती है यही आंकलन आयवर्ग है। आयवर्ग उत्तर भारत में प्रचलित वर्ग वैर के समान माना जाता है क्योंकि वर्ग वैर से विचार करने पर अपने वर्ग से पंचम वर्ग(Fifth Warg) वैरी होता है, इसी तरह अपने से पंचम आय भी वैरी होती है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब कुण्डली मिलाने पर वैर बनता है तब विवाह के पश्चात पति-पत्नी के बीच कलह एवं विवाद की स्थिति बनी रहती है जिससे पारिवारिक जीवन में अशांति छायी रहती है। ज्योतिष के सिद्धांत(Theory of Astrologer) के अनुसार आय वर्ग चक्र के एक रेखा के दोनों सिरों पर जो नक्षत्र होते हैं उनमें आपस में विरोध (Aversion) होता है इस स्थिति के होने पर वैवाहिक जीवन में कठिनाई आती है। अगर नक्षत्र एक ही रेखा के दोनों सिरों को छोड़कर किसी अन्य रेखा पर हों तो इसे सामान्य और शुभ(Auspicious) माना जाता है अर्थात विवाह के लिए सुन्दर स्थिति कही जाती है। इसे आप दिये गये चित्र से आसानी से समझ सकते हैं।
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