आयुवर्ग विचार(Ayu Warg )
स्त्री के जीवन में पति का सुख कितना है अर्थात पति और पत्नी की आयु के सम्बन्ध में विचार हेतु जब विवाह के उद्देश्य से कुण्डली का मिलान किया जाता है तब उत्तर भारतीय रीति में अष्टम भाव से फलादेश (Prediction from Eighth House) किया जाता है। दक्षिण भारत में स्त्री और पुरूष की आयु के सम्बन्ध में फलादेश प्राप्त करने हेतु बीस कूट के अंन्तर्गत आयु वर्ग(Ayu Warg with in 20 Koot) से स्थिति का आंकलन किया जाता है।
आयु वर्ग से यह अंदाज़ा लगाया जाता है कि वधू की आयु कितनी (Prediction of Ages from Ayuwarg) और वर की आयु कितनी है अर्थात दोनों में से किसकी मृत्यु का योग पहले हैं। इस सम्बन्ध में आयु वर्ग से आंकलन का तरीका यह है कि इसमें सबसे पहले स्त्री के नक्षत्र से वर के नक्षत्र की गिनती की जाती है(Counting of Var nakshatras from Stri nakshatras)। गिनती से जो संख्या प्राप्त होती है उसे 7 से गुणा किया जाता है और फिर 28 से भाग दिया जाता है। भाग से जो शेष प्राप्त होता है वह वधू का अंक माना जाता है। वधू का अंक जिस प्रकार ज्ञात किया जाता है उसी प्रकार वर का अंक ज्ञात किया जाता है और इसके अनुसार वर-वधू की आयु का फलादेश किया जाता है।
उपरोक्त विधि के अनुसार ही आयुवर्ग से आयु का आंकलन किया जाता है। इस आंकलन के अनुसार स्त्री पुरूष में से जिसका अंक कम होगा वह पहले इस इस दुनियां का त्याग करता है। आंकलन में अगर स्त्री और पुरूष दोनों के अंक लगभग एक समान हों तो दोनों की मृत्यु लगभग कुछ समय के अंतराल में होती है अर्थात इस दम्पत्ति को अधिक समय तक एक दूसरे का वियोग नहीं सहना पड़ता है।
आयुवर्ग विधि को गहराई से समझने के लिए आप इस उदाहरण को देख सकते हैं, मान लीजिए स्त्री का नक्षत्र भरणी है और पुरूष का नक्षत्र हस्त तो स्त्री के नक्षत्र से पुरूष के नक्षत्र की गिनती करने पर जो गिनने पर संख्या 12 आती है, इस संख्या को 7 से गुणा करेंगे तो 84 प्राप्तांक होगा। इस प्राप्तांक को 28 से भाग दिया गया जिसके फलस्वरूप शेष 0 आया। स्त्री के नक्षत्र से जिस प्रकार गिनती की गयी अब उसी प्रकार पुरूष के नक्षत्र से गिनती की जाए तो संख्या 17 आएगी, इस संख्या को 7 से गुणा करने से प्राप्तांक 119 आएगा, प्रप्तांक को 28 से भाग देने पर शेष 7 आया। इस आंकलन का फलादेश यह है कि स्त्री को सुहागन मृत्यु का सौभाग्य प्राप्त होगा।
दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति में वैवाहिक कुण्डली मिलान(Kundli Matching) के अन्तर्गत आयुवर्ग से वर - वधू की आयु की स्थिति का आंकलन करने की विधि काफी प्रचलित और मान्य है। आप अगर दक्षिण भारतीय ज्योतिष परम्परा में विश्वास रखते हैं तो आप भी वैवाहिक कुण्डली मिलाप के अन्तर्गत आयुवर्ग से अपने जीवनसाथी के साथ जीवन का सुख लम्बे समय तक लेने हेतु इससे विचार कर सकते हैं।
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