गणकूट में समान गण सर्वोत्तम!(Gankut)
आपने देखा होगा कि जब भी आपके परिवार में किसी की शादी की बात चली होगी तब आपके माता पिता या घर के बड़े आपकी कुण्डली एवं जिस व्यक्ति के साथ शादी की बात चल रही होती है उनकी कुण्डली लेकर ज्योतिषी महोदय के पास जाते हैं ताकि वे वर और कन्या की कुण्डली का मिलान कर ज्ञात कर सकें कि दोनों की कुण्डली में कितने गुण मिल रहे हैं। गुणों का आंकलन(Assessment of Gunas) करने के लिए अष्टकूट के अन्तर्गत कुल आठ कूटों से मिलान किया जाता है उन्हीं में से एक है गणकूट।
गणकूट के विषय में गहराई से जानने के लिए सबसे पहले यह जान लीजिए कि गण कितने प्रकार के होते हैं। भारतीय शास्त्रों (Indian Mythological Books) के अनुसार गण तीन प्रकार के होते हैं जिनका नाम है देवता (Devta), मनुष्य(Manushayas) और राक्षस(Rakshas)। इन तीनों को मनुष्य के तीन गुणों सत्व(Satv), रजोगुण(Rajogun) और तमोगुण(Tmogun) का प्रतीक माना गया है। इन तीनों गुणों की प्रकृति इनका स्वभाव अलग अलग होता है।
अगर आपके मन में यह जानने की उत्सुकता जगने लगी है कि गणों का निर्घारण किस प्रकार होता है तो आपकी उत्सुकता को हम कम कर देते हैं और हम जानते हैं गण निर्घारण की प्रक्रिया को। वैदिक ज्योतिष (vedic Astrologer)के अनुसार हमारे गण का निर्धारण जन्म नक्षत्र से होता है अर्थात जिस नक्षत्र में हमारा जन्म होता है उसके अनुसार हमारा गण निर्घारित होता है। इस सम्बन्ध में आप इस लेख में दिये गये चार्ट को देख सकते हैं और जान सकते हैं कि किस नक्षत्र में जन्म लेने पर आपको कौन सा गण प्राप्त होता है।
आइये अब देखते हैं कि किस गण के साथ किसकी जोड़ी बन सकती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर वर और कन्या दोनों के गण समान(Both Gan is same of Var and kanya) हों तो विवाह के लिए बहुत ही उत्तम स्थिति होती है। गण समान होने पर अगर आप शादी करते हैं तो पति पत्नी के सम्बन्ध में प्रेम और तालमेल बना रहता है। गणकूट मिलान में अगर एक का गण देव आता है और दूसरे का मनुष्य तब भी वैवाहिक सम्बन्ध हो सकता है इसमें भी विशेष परेशानी नहीं आती है इसे सामान्य की श्रेणी में रखा गया है। शास्त्रों के अनुसार देव और मनुष्य में सम्बन्ध बन सकता है परंतु इनके लिए राक्षस गण वाले से विवाह को अशुभ(Inauspicious) बताया गया है। अगर आपकी कुण्डली में गणकूट राक्षस है तो राक्षस गणकूट वाले व्यक्ति से ही विवाह करने की सलाह दी जाती है।
गणकूट में गुणांक(Evaluate) किस प्रकार प्राप्त होता है आइये अब इसे समझते हैं:
1.वर वधू दोनों के गणकूट देव -देव गण हों तो गुणांक 6 मिलता है।
2.वर वधू दोनों के गणकूट अगर मनुष्य -मनुष्य हों तो गुणांक 6 प्राप्त होता है।
3. वर वधू दोनों के गणकूट अगर राक्षस-राक्षस हों तो गुणांक 6 प्राप्त होता है।
4.वर वधू दोनों के गणकूट अगर मनुष्य -देव हों तो गुणांक 5 प्राप्त होता है।
5.वर वधू दोनों के गणकूट अगर देव - मनुष्य हों तो गुणांक 5 प्राप्त होता है।
6.वर वधू दोनों के गणकूट अगर मनुष्य - राक्षस हों तो गुणांक 1 प्राप्त होता है।
7.वर वधू दोनों के गणकूट अगर राक्षस - मनुष्य हों तो गुणांक1 प्राप्त होता है।
8.वर वधू दोनों के गणकूट अगर देव - राक्षस हों तो गुणांक 0 प्राप्त होता है।
9.वर वधू दोनों के गणकूट अगर राक्षस - देव हों तो गुणांक 0 प्राप्त होता है।
गण दोष(Gan Dosh) निम्न स्थितियों में नहीं लगता
1.दोनों के राशीश परस्पर मित्र हों।
2.दोनों के राशीश एक हों।
3.दोनों के नवमांशेश(Lord of Navmansh) परस्पर मित्र हों।
4.दोनों के नवमांशेश एक हो।
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