वैवाहिक
कुल रेसिपीज:
29
| इस पेज पर:
1 - 29
शुभ और अशुभ भकूट (Auspicious Bhakoot & malefic Bhakoot in Marriage Compatibility)
ज्योतिष के अनुसार वर और कन्या की कुण्डली मिलायी जाती है। कुण्डली मिलान से पता चलता है कि वर कन्या की कुण्डली मे कितने गुण मिलते हैं, कुल 36 गुणों में से 18 से अधिक गुण मिलने पर यह आशा की जाती है कि वर वधू का जीवन खुशहाल और प्रेमपूर्ण रहेगा.
मांगलिक दोष का उपचार (Remedies of Manglik Dosha or Kuja Dosha)
मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार मे उन्नति एवं प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है. वैवाहिक जीवन में शनि को विशेष अमंलकारी माना गया है....बृहस्पति एवं शुक्र का दाम्पत्य जीवन पर प्रभाव (Impact of Jupiter & Venus on Married Life)
बृहस्पति और शुक्र दो ग्रह हैं जो पुरूष और स्त्री का प्रतिनिधित्व करते हैं.मुख्य रूप ये दो ग्रह वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख, संयोग और वियोग का फल देते हैं. ...शनि एवं विवाह (Saturn and Marriage)
विवाह एवं वैवाहिक जीवन के विषय में ग्रहों की स्थिति काफी कुछ बताती है.सप्तम भाव को विवाह एवं जीवनसाथी का घर कहा जाता है.इस भाव एवं इस भाव के स्वामी के साथ ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यक्ति को शुभ और अशुभ फल मिलता है....प्रेम विवाह में ग्रहयोग (Planetary Combinations and Love Marriage)
ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की युति भी प्रेम को विवाह की परिणिति तक लेजाने में मददगार होती है....मंगली दोष (Manglik Dosha)
मंगल उष्ण प्रकृति का ग्रह है.इसे पाप ग्रह माना जाता है. विवाह और वैवाहिक जीवन में मंगल का अशुभ प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है....सप्तमांश से विवाह समय निर्घारण (Finding the time of marriage from Saptamansh)
ज्योतिषशास्त्र में विवाह के लिए नवमांश को ही आधार माना गया है और इसी के आधार पर विवाह समय का निर्घारण किया जाता है. लेकिन नवमांश के साथ ही सप्तमांश का अध्ययन भी इस संदर्भ महत्वपूर्ण है. ...वैवाहिक जीवन में बाधा डालने वाले ग्रह योग
जब एक स्त्री और पुरूष वैवाहिक जीवन में प्रवेश करते हें तब उनके कुछ सपने और ख्वाब होते हैं. कुण्डली में मौजूद ग्रह स्थिति कभी कभी ऐसी चाल चल जाते हैं कि पारिवारिक जीवन की सुख शांति खो जाती है. ...कन्या की कुण्डली में वैवाहिक स्थिति (Girls Kundali & Marriage Match Making)
कन्या के माता पिता को अपनी पुत्री की शादी के सम्बन्ध में सबसे अधिक चिन्ता रहती है. कन्या भी अपने भावी जीवन, पति, ससुराल एवं उससे सम्बन्धित अन्य विषयों को लेकर फिक्रमंद रहती है....योगिनी कूट (Yogini Koot)
हमारे देश में ज्योतिष परम्परा के अनुसार जब स्त्री और पुरूष की शादी की बात चलती है तब सबसे पहले दोनों की कुण्डली मिलायी जाती है। कुण्डली मिलाने से ज्ञात होता है कि वर और वधू की कुण्डली में ग्रह, नक्षत्र एवं राशियों में किस तरह का सम्बन्ध बन रहा है। ग्रह नक्षत्र एवं राशियो के मध्य सम्बन्ध का विश्लेषण इसलिए किया जाता है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि ग्रह, नक्षत्र एवं राशियों के बीच जैसा सम्बन्ध होता है वैसा ही प्रभाव हमारे जीवन पर होता है (Astrology says Relation between Planets, Nakshatra and Rashi are very important in astrology, the type of relation between them, decide the type of effect on our life) यानी इनके बीच मित्रता पूर्ण सम्बन्ध है तो आपके बीच भी प्रेमपूर्ण सम्बन्ध रहता है और अगर इनमें दुश्मनी है तो आपके गृहस्थ जीवन में विवाद और कलह होता रहता है।...विवाह के संदर्भ में वश्य कूट मिलान का औचित्य (Importance of Vasya Koota in marriage matching system)
हमारा समाज मूल रूप से पुरूष प्रधान है। पुरूष प्रधान समाज में यह आशा रखी जाती है कि स्त्रियां पुरूष के अधीन रहे, इसके लिए स्त्रियों पर कई प्रकार की पाबंदियां लगायी जाती है एवं मर्यादा की बेड़ियों में जकड़ने की कोशिश की जाती है। ...पंच पक्षी विचार(Panch Pakshi Vichar)
स्त्री हो या पुरूष सभी शादी से पूर्व यही सपना देखते हैं कि उनका वैवाहिक जीवन प्रेम से परिपूर्ण हो। जीवनसाथी उन्हें और उनकी भावनाओं को समझे और गृहस्थ जीवन में सुख और आनन्द की बरसात होती रहे। विवाह के पश्चात बहुत से लोगों का यह सपना सच होता है तो बहुत से लोगों को मायूसी हाथ लगती है अर्थात उनका वैवाहिक जीवन कलह और अशांति से भरा रहता है। वैवाहिक जीवन में कलह का नज़ारा कई बार ऐसा हो जाता है कि घर-घर नहीं अखाड़ा नज़र आने लगता हैं। ...वेधवर्ग विचार(Vedh Vargh Vichar)
शादी के समय पवित्र अग्नि के सम्मुख स्त्री और पुरूष सदा एक दूसरे का साथ निभाने का वचन देते हैं और संकल्प लेते हैं कि जीवन में सुख की घड़ी हो या दु:ख की दोनों एक दूसरे का दामन थामे रहेंगे फिर कौन सी ऐसी बात होती है जिसके कारण वचन टूट जाते हैं और रिश्ते बिखर जाते हैं। ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कि उपरोक्त स्थिति का कारण अशुभ ग्रहों(Inauspicious Planets) का प्रभाव होता है। अगर शादी के पूर्व स्त्री और पुरूष की कुण्डली का सही से मिलान किया जाए और उसके अनुसार वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किया जाए तो विवाह की सफलता की संभावना अधिक रहती है(For Happy Married it is very important that Kundli matching in a perfect way)। ...लिंग वर्ग विचार (Ling Vargh Vichar)
भारतीय ज्योतिष परम्परा के अन्तर्गत ग्रहों एवं नक्षत्रों को अलग अलग वर्ण और विभागों में बॉटा गया है। ज्योतिष के अन्तर्गत नक्षत्रों का लिंगभेद भी किया गया है। अगर आप दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति के विषय में जानते हैं तो आपको पता होगा कि वहां 20 कूट के अन्तर्गत एक कूट आता है लिंग वर्ग।...जातिकूट (Jati Koot)
विवाह के प्रसंग में कुण्डली मिलाने की प्रथा उत्तर भारत में भी प्रचलित है और दक्षिण भारत में भी (Tradition of Kundli Matching in North India and South India)। कुण्डली मिलाने की इस प्रथा में कई बातें दोनों जगह समान हैं तो कई जगह दोनों में कुछ अंतर भी है। बात करें जातिकूट की तो यह उत्तर भारत में भी मान्य है और दक्षिण में भी परंतु दोनों में कुछ विभेद है। उत्तर भारतीय जातिकूट पद्धति और दक्षिण भारतीय जातिकूट में विभेद को ही हम अपना विषय बनाकर चर्चा को आगे बढ़ाते हैं, तो आइये चर्चा शुरू करें। ...रज्जुवर्ग विचार(Rajju vargh)
दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति के अनुसार जब किसी व्यक्ति की वैवाहिक कुण्डली मिलायी जाती है तब 20 कूटों(Kundli matching according to 20 Koot) से विचार किया जाता है। 20 कूटों के अन्तर्गत एक कूट आता है रज्जुवर्ग। रज्जु वर्ग से जब स्त्री-पुरूष की कुण्डली का विश्लेषण (Analysis)किया जाता है तो किस विषय में फलादेश प्राप्त होता है और इससे फलादेश प्राप्त करने का तरीका क्या है यहां हम इसी पर रोशनी डालते हैं। ...गणकूट में समान गण सर्वोत्तम!(Gankut)
आपने देखा होगा कि जब भी आपके परिवार में किसी की शादी की बात चली होगी तब आपके माता पिता या घर के बड़े आपकी कुण्डली एवं जिस व्यक्ति के साथ शादी की बात चल रही होती है उनकी कुण्डली लेकर ज्योतिषी महोदय के पास जाते हैं ताकि वे वर और कन्या की कुण्डली का मिलान कर ज्ञात कर सकें कि दोनों की कुण्डली में कितने गुण मिल रहे हैं। गुणों का आंकलन(Assessment of Gunas) करने के लिए अष्टकूट के अन्तर्गत कुल आठ कूटों से मिलान किया जाता है उन्हीं में से एक है गणकूट। ...भूत वर्ग विचार (Bhoot varg)
दुनियां में जितने भी रिश्ते हैं उनमें सबसे नाजुक रिश्ता पति पत्नी का रिश्ता होता है। इस रिश्ते में अगर जरा सी चूक हो जाए तो जीवन एक एक पल बिताना कठिन हो जाता है, यही कारण है कि इस नाजुक रिश्ते की गांठ में बंधने से पहले बहुत अधिक जांच परख की जाती है। आपने देखा होगा कि जब आपके घर में किसी की शादी की बात चलती है तब आपके घर के प्रमुख लोग जाकर देखते हैं कि जिस लड़के अथवा लड़की से शादी की बात चल रही है उनका स्वभाव कैसा है, क्या उन दोनों की जोड़ी सही रहेगी, क्या वे एक दूसरे के योग्य हैं, फिर जाकर शादी की बात आगे बढ़ती है। इतना सब कुछ जांच परख करने के बाद भी कई बार ऐसा देखने में आता है कि पति पत्नी के बीच मनमुटाव है और दोनों अलग हो रहे हैं। ...आयुवर्ग विचार(Ayu Warg )
हमारे देश में महिलाएं अपने पति यानी अपने सुहाग की लम्बी आयु के लिए कामना करती हैं। करवा चौथ(karva Chot), गौरी पूजन(Gauri Pujan), वटसावित्री(Vatsavitri) और न जाने कितने ही व्रत महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए करती हैं। इन तमाम व्रतों एवं पूजन का मुख्य उद्देश्य यह है कि शास्त्रों में बताया गया है कि सुहागन मृत्यु को प्राप्त होना बहुत ही सौभाग्य की बात है। सुहागन मृत्यु होने पर स्त्री को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। ...आय वर्ग विचार (Aye Wargh)
भारत सांस्कृतिक रूप से विश्व में श्रेष्ठ माना जाता है। भारतीय अध्यात्म और दर्शन विश्व को अपनी ओर आकर्षित करता है। भारतीय अध्यात्म और दर्शन का ही एक अंग है ज्योतिष। ज्योतिष यानी रोशनी दिखने वाला अर्थात भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों पर प्रकाश डालने वाला ज्ञान है ज्योतिष। ज्योतिष के वैदिक शाखा(Banch of Vedic) में कुण्डली से जीवन के विषय में सभी प्रकार के प्रश्नों का हल ढूंढा जाता है। भारतीय परम्परा में विवाह पूर्व वर वधू के आने वाले जीवन के विषय में आंकलन(Assessment) करने के लिए कुण्डली मिलाने(Kundli matching) की परम्परा रही है। ...महेन्द्र कूट (Mahendra Koot)
भारतवर्ष भारतीय महाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। इस देश की विशालता और अनेकता में एकता विश्व के लिए आदर्श स्वरूप है क्योंकि भारत जितना विशाल है उतनी ही विस्तृत इसकी सभ्यता, संस्कृति, भाषा, ज्ञान और चिंतन है। ज्ञान, चिंतन एवं संस्कृति के विस्तृत और विविध होने के बावजूद इसका मूल स्वरूप एक ही है। चिंतन की बात करें तो उत्तर भारत में भगवान शिव के बड़े पुत्र को कार्तिकेय के नाम से पूजा जाता है तो दक्षिण(South) में कर्तिकेय मुरूगन स्वामी(Murugan Swami) के नाम से पूजित होते हैं। भगवान कृष्ण की बात करें तो उत्तर में माधव, गोपाल, कृष्ण के नाम से जाने जाते हैं तो दक्षिण में वेणु गोपाल के नाम से विख्यात हैं यानी नाम चाहे कुछ हो परिणाम और विषय वस्तु समान है, यही बात ज्योतिष में भी लागू है। ...राशीश मैत्रीकूट(Rashish Maitrikoot)
विवाह के उद्देश्य से जन्मपत्री से जब कुण्डली में अष्टकूट मिलान(Ashtkoot in kundli) किया जाता है तब भिन्न भिन्न कूटों से गुणों का आंकलन किया जाता है। विवाह से पहले गुणों का आंकलन कुण्डली में इसलिए किया जाता है ताकि पति पत्नी के तौर पर जब हम आप पारिवारिक जीवन में प्रवेश करें तब हमारे दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य का भाव बना रहे, कुल मिलाकर एक शब्द में कहें तो कुण्डली में गुणों का मिलान इसलिए किया जाता है ताकि पारिवारिक जीवन में सुख शांति बनी रहे। जब गुणों का आंकलन किया जाता है उस समय अष्टकूट के अन्तर्गत राशीश मैत्रीकूट से भी विचार किया जाता है। ...स्त्री दीर्घ से वैवाहिक जीवन का आंकलन (Assessment of Married Life from Stri Dirgh)
सभी माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों का जीवन सुखमय और आनन्दमय गुजरे, इसके लिए माता पिता अपनी ओर से हर संभव प्रयास करते हैं। जब बात हो शादी की तब विषय और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि यह जीवन भर का मामला होता है। शादी के मामले में जरा सी चूक से बच्चों की ज़िन्दग़ी प्रभावित हो सकती है, यही कारण है कि माता पिता विवाह के विषय को गंभीरता से लेते हुए कुण्डली मिलान करवाते हैं। कुण्डली मिलान के क्रम में दक्षिण भारतीय पद्धति (South Indian Kundli Matching System) में बीस कूटों (Bees Koota) के अन्तर्गत स्त्री दीर्घ (Stri Dirgha) से भी विचार किया जाता है। ...योनिकूट से कुण्डली में गुण मिलान (yoni Koot)
इस धरती पर जितने भी जीव हैं वे किसी न किसी योनि से सम्बन्धित हैं अर्थात बकरी, बैल, हाथी, सिंह, चूहा या फिर मनुष्य सभी ईश्वर द्वारा बनायी गयी योनियां हैं। हर योनि की अपनी विशेषता और अपना गुण (Characteristic) है, परंतु यहां हम जीवों की योनियों की बात नहीं कर रहे हैं, बात कर रहे हैं नक्षत्रों की योनियों(Yoniya of Nakshatras) की। ज्योतिष के अनुसार योनि का सम्बन्ध नक्षत्रों से मानी गयी हैं (According to the Astrologer relationship of Yoni from Nakshatras) । ...नाड़ीकूट विचार (Narikoot)
बड़े बूढे कहते हैं कि विवाह के पश्चात व्यक्ति नये जीवन में प्रवेश करता है, बुजुर्गों का यह कहना काफी हद तक सही भी है क्योंकि जैसे जन्म के पश्चात नया माहौल नया परिवेश और कुछ रिश्ते हमसे जुड़ जाते हैं ठीक उसी प्रकार विवाह के पश्चात व्यक्ति एक नये परिवेश और माहौल से रूबरू होता है जहां कई नये रिश्ते और नई बातें सामने आती हैं। विवाह के पश्चात शुरू होने वाले नये जीवन में खुशहाली के लिए कुण्डली मिलान किया जाता है। कुण्डली मिलान के क्रम में अष्टकूट से विचार किया जाता है, इन अष्टकूटों(Ashtkoot) में आठवां और अंतिम कूट है नाड़ी कूट। ...दिनकूट विचार (Din koot)
कहावत है कि शादी व्याह गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं है, यानी यह रंचमंच का नाटक या 3 घंटे का फिल्मी ड्रामा नहीं है। शादी व्याह जीवन भर का नाता होता है, जिसके साथ दो आत्माओं का मिलन होता है और 2 परिवारों के मध्य सम्बन्ध स्थापित होता है। विवाह के संदर्भ में यह कहा गया है कि कन्या जब युवावस्था में प्रवेश कर जाए तब उसे किसी योग्य हाथों में सौंप देना चाहिए यानी कन्या के योग्य वर की तलाश करके कन्या की शादी कर देनी चाहिए, जो माता पिता इस कर्तव्य का पालन करते हैं और कन्या दान करते हैं उन्हें बहुत ही पुण्य मिलता है। ...बीसकूटों से कुण्डली मिलान (Kundli Matching from 20 Koot)
उत्तर भारतीय संगीत और दक्षिण भारतीय संगीत की अपनी कुछ विशेषता है उसी प्रकार उत्तर भारतीय ज्योतिष और दक्षिण भारतीय ज्योतिष की भी अपनी विशेषता है। हम यहां विवाह के सम्बन्ध में कुण्डली मिलान की बात करते हैं और इस विषय में दोनों जगह की ज्योतिष विधि (Astrology)का विचार करें तो पाते हैं कि उत्तर भारत में जहां अष्टकूट से कुण्डली मिलान की जाती है वहीं दक्षिण भारत में और 12 कूटों(12 Koota) को जोड़ कर 20 कूटों(20 koota) से दुल्हा दुल्हन की कुण्डली मिलायी जाती है। ...Ashtkut Milan for Happy Married Life सुखी वैवाहिक जीवन के लिए अष्टकूट मिलान
हम सभी चाहते हैं कि वैवाहिक जीवन में सौहार्द एवं परस्पर सामंजस्य बना (Astrology for marriage compatibility) रहे। परंतु कई बार वैवाहिक जीवन में इस तरह गतिरोध उत्पन्न होने लगता है कि पति पत्नी के बीच दूरियां बढ़ती चली जाती हैं और सम्बन्ध विच्छेद तक हो जाता है। ...कुण्डली मिलान (Kundali Matching) सफल विवाह की गारंटी है क्या?
शादी से पहले कुण्डली मिलान करवाना आम प्रचलन में है. लेकिन कुण्डली मिलना सफल विवाह की गारंटी नहीं. क्योंकि ज्योतिष अनुसार भी बहुत सारे दूसरे कारण विवाह को सफल या असफल बनाते हैं....
कुल रेसिपीज:
29
| इस पेज पर:
1 - 29
अन्य पोस्टें
- राहु-कालम : शुभ कार्यो में विशेष रुप से त्याज्य (Rahu Kalam: Aboondoned for Auspicious Events)
- गुरू के राशि परिवर्तन का प्रभाव (Effect of Jupiter's Transit Into Aquarius)
- कन्या राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Kanya Rashi)
- वृष राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Vrisha Rashi)
- वृश्चिक राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Vrishchika Rashi)
- धनु राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Dhanu Rashi)
- तुला राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Tula Rashi)
- सिंह राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Simha Rashi)
- मिथुन राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Mithuna Rashi)
- मकर राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Makara Rashi)
- कर्क राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Karka Rashi)
- मेष राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Mesha Rashi)
- कुम्भ राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Kumbha Rashi)
- मीन राशि के लिए वर्ष 2010 (2010 Horoscope Forecast for Meena Rashi)
- साफ्टवेयर प्रोग्रामर कैरियर के लिये ज्योतिष योग (Astrology Yoga for Software Programmer Carrer)
1
कुल
381
:
1 - 15
- आपकी कुंडली में शुभ योग (Shubh Yoga in your Kundli)
- हस्तरेखा से जानिए अपना भाग्य (Know your fortune through Palmistry)
- प्रश्न कुण्डली से विवाह विचार (Marriage Analysis From The Horary Chart)
- दैनिक - ज्योतिष (Daily Astrology)
- कालसर्प योग (Kal Sarp Yoga) भी शुभ फल देता है
mera date of birth dec 1/ 1989 plz aap mughe mera future kab se aacha hoga ...or money kitna kamasakuga..
My DOB IS 20.11.1983 & TIMING 9:20PM.In my Horoscope there is kalsarpyog as per priest.I am not getting job from last 2 months..suggest remedies for ...
me janna chahti hu meri nokri kab lagege muje apna bahbisya janna hai
my birth on shivratri in 1978 what was the date ?
ME LIFE KE BARE ME JANANA CHATI HU MERA JIVAN KAISA HAI


