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	<title>hindijyotish.com</title>
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		<title>hindijyotish.com</title>
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						<title>योगिनी कूट (Yogini Koot)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/yogini_koot.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Tue, 03 Jun 2008 14:57:00 +0530</pubDate>
						<description>हमारे देश में ज्योतिष परम्परा के अनुसार जब स्त्री और पुरूष की शादी की बात चलती है तब सबसे पहले दोनों की कुण्डली मिलायी जाती है। कुण्डली मिलाने से ज्ञात होता है कि वर और वधू की कुण्डली में ग्रह, नक्षत्र एवं राशियों में किस तरह का सम्बन्ध बन रहा है। ग्रह नक्षत्र एवं राशियो के मध्य सम्बन्ध का विश्लेषण इसलिए किया जाता है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि ग्रह, नक्षत्र एवं राशियों के बीच जैसा सम्बन्ध होता है वैसा ही प्रभाव हमारे जीवन पर होता है (Astrology says Relation between Planets, Nakshatra and Rashi are very important in astrology, the type of relation between them, decide the type of effect on our life) यानी इनके बीच मित्रता पूर्ण सम्बन्ध है तो आपके बीच भी प्रेमपूर्ण सम्बन्ध रहता है और अगर इनमें दुश्मनी है तो  आपके गृहस्थ जीवन में विवाद और कलह होता रहता है।</description>
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						<title>विवाह के संदर्भ में वश्य कूट मिलान का औचित्य (Importance of Vasya Koota in marriage matching system)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/vasya_koota_in_marriage_matching_system.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Fri, 06 Jun 2008 18:43:00 +0530</pubDate>
						<description>हमारा समाज मूल रूप से पुरूष प्रधान है। पुरूष प्रधान समाज में यह आशा रखी जाती है कि स्त्रियां पुरूष के अधीन रहे, इसके लिए स्त्रियों पर कई प्रकार की पाबंदियां लगायी जाती है एवं मर्यादा की बेड़ियों में जकड़ने की कोशिश की जाती है। </description>
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						<title>पंच पक्षी विचार(Panch Pakshi Vichar)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/panch_pakshi_vichar.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Tue, 03 Jun 2008 08:19:00 +0530</pubDate>
						<description>स्त्री हो या पुरूष सभी शादी से पूर्व यही सपना देखते हैं कि उनका वैवाहिक जीवन प्रेम से परिपूर्ण हो। जीवनसाथी उन्हें और उनकी भावनाओं को समझे और गृहस्थ जीवन में सुख और आनन्द की बरसात होती रहे। विवाह के पश्चात बहुत से लोगों का यह सपना सच होता है तो बहुत से लोगों को मायूसी हाथ लगती है अर्थात उनका वैवाहिक जीवन कलह और अशांति से भरा रहता है। वैवाहिक जीवन में कलह का नज़ारा कई बार ऐसा हो जाता है कि घर-घर नहीं अखाड़ा नज़र आने लगते हैं। 
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						<title>वेधवर्ग विचार(Vedh Vargh Vichar)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/vedh_vargh_vichar.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Tue, 03 Jun 2008 04:54:00 +0530</pubDate>
						<description>शादी के समय पवित्र अग्नि के सम्मुख स्त्री और पुरूष सदा एक दूसरे का साथ निभाने का वचन देते हैं और संकल्प लेते हैं कि जीवन में सुख की घड़ी हो या दु:ख की दोनों एक दूसरे का दामन थामे रहेंगे फिर कौन सी ऐसी बात होती है जिसके कारण वचन टूट जाते हैं और रिश्ते बिखर जाते हैं। ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कि उपरोक्त स्थिति का कारण अशुभ ग्रहों(Inauspicious Planets) का प्रभाव होता है। अगर शादी के पूर्व स्त्री और पुरूष की कुण्डली का सही से मिलान किया जाए और उसके अनुसार वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किया जाए तो विवाह की सफलता की संभावना अधिक रहती है(For Happy Married it is very important that Kundli matching in a perfect way)। 
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						<title>लिंग वर्ग विचार (Ling Vargh Vichar)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/ling_vargh_vichar.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Thu, 05 Jun 2008 08:53:00 +0530</pubDate>
						<description>भारतीय ज्योतिष परम्परा के अन्तर्गत ग्रहों एवं नक्षत्रों को अलग अलग वर्ण और विभागों में बॉटा गया है। ज्योतिष के अन्तर्गत   नक्षत्रों का लिंगभेद भी किया गया है। अगर आप दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति के विषय में जानते हैं तो आपको पता होगा कि वहां 20 कूट के अन्तर्गत एक कूट आता है लिंग वर्ग।</description>
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						<title>जातिकूट (Jati Koot)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/jati_koot.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Tue, 13 May 2008 02:13:00 +0530</pubDate>
						<description>विवाह के प्रसंग में कुण्डली मिलाने की प्रथा उत्तर भारत में भी प्रचलित है  और दक्षिण भारत में भी (Tradition of Kundli Matching in North India and South India)। कुण्डली मिलाने की इस प्रथा में कई बातें दोनों जगह समान हैं तो कई जगह दोनों में कुछ अंतर भी है। बात करें जातिकूट की तो यह उत्तर भारत में भी मान्य है और दक्षिण में भी परंतु दोनों में कुछ विभेद है। उत्तर भारतीय जातिकूट पद्धति और दक्षिण भारतीय जातिकूट में विभेद को ही हम अपना विषय बनाकर चर्चा को आगे बढ़ाते हैं, तो आइये चर्चा शुरू करें।  </description>
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						<title>रज्जुवर्ग विचार(Rajju vargh)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/rajju_vargh.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Mon, 12 May 2008 18:18:00 +0530</pubDate>
						<description>दक्षिण भारतीय ज्योतिष पद्धति के अनुसार जब किसी व्यक्ति की वैवाहिक कुण्डली मिलायी जाती है तब 20 कूटों(Kundli matching according to 20 Koot) से विचार किया जाता है। 20 कूटों के अन्तर्गत एक कूट आता है रज्जुवर्ग। रज्जु वर्ग से जब स्त्री-पुरूष की कुण्डली का विश्लेषण (Analysis)किया जाता है तो किस विषय में फलादेश प्राप्त होता है और इससे फलादेश प्राप्त करने का तरीका क्या है यहां हम इसी पर रोशनी डालते हैं।  
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						<title>गणकूट में समान गण सर्वोत्तम!(Gankut)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/gankut.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Mon, 12 May 2008 16:34:00 +0530</pubDate>
						<description>आपने देखा होगा कि जब भी आपके परिवार में किसी की शादी की बात चली होगी तब आपके माता पिता या घर के बड़े आपकी कुण्डली एवं जिस व्यक्ति के साथ शादी की बात चल रही होती है उनकी कुण्डली लेकर ज्योतिषी महोदय के पास जाते हैं ताकि वे वर और कन्या की कुण्डली का मिलान कर ज्ञात कर सकें कि दोनों की कुण्डली में कितने गुण मिल रहे हैं। गुणों का आंकलन(Assessment of Gunas) करने के लिए अष्टकूट के अन्तर्गत कुल आठ कूटों से मिलान किया जाता है उन्हीं में से एक है गणकूट। 
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						<title>भूत वर्ग विचार (Bhoot varg)</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/bhoot_varg.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Sat, 10 May 2008 18:50:00 +0530</pubDate>
						<description>दुनियां में जितने भी रिश्ते हैं उनमें सबसे नाजुक रिश्ता पति पत्नी का रिश्ता होता है। इस रिश्ते में अगर जरा सी चूक हो जाए तो जीवन एक एक पल बिताना कठिन हो जाता है, यही कारण है कि इस नाजुक रिश्ते की गांठ में बंधने से पहले बहुत अधिक जांच परख की जाती है। आपने देखा होगा कि जब आपके घर में किसी की शादी की बात चलती है तब आपके घर के प्रमुख लोग जाकर देखते हैं कि जिस लड़के अथवा लड़की से शादी की बात चल रही है उनका स्वभाव कैसा है, क्या उन दोनों की जोड़ी सही रहेगी,  क्या वे एक दूसरे के योग्य हैं, फिर जाकर शादी की बात आगे बढ़ती है। इतना सब कुछ जांच परख करने के बाद भी कई बार ऐसा देखने में आता है कि पति पत्नी के बीच मनमुटाव है और दोनों अलग हो रहे हैं। </description>
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						<title>आयुवर्ग विचार(Ayu Warg )</title>
						<link>http://hindijyotish.com/marriage-astrology/ayu_warg.html</link>
						<category>वैवाहिक</category>
						<pubDate>Sat, 10 May 2008 17:52:00 +0530</pubDate>
						<description>हमारे देश में महिलाएं अपने पति यानी अपने सुहाग की लम्बी आयु के लिए कामना करती हैं। करवा चौथ(karva Chot), गौरी पूजन(Gauri Pujan), वटसावित्री(Vatsavitri) और न जाने कितने ही व्रत महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए करती हैं। इन तमाम व्रतों एवं पूजन का मुख्य उद्देश्य यह है कि शास्त्रों में बताया गया है कि सुहागन मृत्यु को प्राप्त होना बहुत ही सौभाग्य की बात है। सुहागन मृत्यु होने पर स्त्री को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। </description>
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<description>hindijyotish.com</description>
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