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बीसकूटों से कुण्डली मिलान (Kundli Matching from 20 Koot)

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image बीसकूटों से कुण्डली मिलान (Kundli Matching from 20 Koot)

उत्तर भारतीय संगीत और दक्षिण भारतीय संगीत की अपनी कुछ विशेषता है उसी प्रकार उत्तर भारतीय ज्योतिष और दक्षिण भारतीय ज्योतिष की भी अपनी विशेषता है। हम यहां विवाह के सम्बन्ध में कुण्डली मिलान की बात करते हैं और इस विषय में दोनों जगह की ज्योतिष विधि (Astrology)का विचार करें तो पाते हैं कि उत्तर भारत में जहां अष्टकूट से कुण्डली मिलान की जाती है वहीं दक्षिण भारत में और 12 कूटों(12 Koota) को जोड़ कर 20 कूटों(20 koota) से दुल्हा दुल्हन की कुण्डली मिलायी जाती है।

उत्तर भरतीय पद्धति और दक्षिण भारतीय पद्धति में एक अंतर यह भी है कि जहां उत्तर भारतीय पद्धति में गुण मिलान में गुणांको से विचार किया जाता है जबकि, दक्षिण भारत में गुणांकों का प्रयोग नहीं होता है। दक्षिण भारत में कुण्डली मिलान के समय सिर्फ शुभ और अशुभ से फलादेश(prediction) किया जाता है।

दक्षिण भारत में अष्टकूट के अलावा जिन कूटों का प्रयोग कुण्डली मिलान में किया जाता है उन्हीं में से एक है "पूर्व, मध्य और परभाग योगिनी नक्षत्र(Parbhag Yogini Nakshatra)" यहां हम अपनी चर्चा का विषय इसे ही बना रहे हैं। सबसे पहले आइये देखें कि पूर्व, मध्य और परभाग योगिनी नक्षत्र के अन्तर्गत किस प्रकार नक्षत्रों का विभाजन किया गया है।

1.पूर्व नक्षत्र: रेवती, अश्वनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी और मृगशिरा ये 6 नक्षत्र पूर्वभाग कहलाते हैं।

2.मध्य नक्षत्र: आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा एवं अनुराधा ये 12 नक्षत्र मध्य भाग कहलाते हैं।

3.परभाग योगिनी नक्षत्र: ज्येष्ठा, मूल, पर्वाषाठा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद एवं उत्तराभाद्रपद ये 9 नक्षत्र परभाग योगिनी नक्षत्र कहलाते हैं।

नक्षत्रों के विभाजन पर अगर आप ध्यान दें तो पाएंगे कि उत्तर भारतीय ज्योतिष में अष्टकूट के अन्तर्गत नक्षत्रों का विभाजन जब भी होता है उनकी संख्या बराबर बराबर होती है अर्थात इनमें प्रत्येक समूह में नक्षत्र की संख्या बराबर होती है। दक्षिण भारतीय पद्धति में नक्षत्रों का विभाजन समान नहीं होता है यहां प्रत्येक क्षेणी में नक्षत्रों की संख्या असमान होती है जिसका उदाहरण आपके सामने है पर्वा नक्षत्र में 6 नक्षत्र हैं तो मध्य में 12 और परभाग योगिनी में 9।

ज्योतिषशास्त्र (Astrologer) के अनुसार उपरोक्त योगिनियों का प्रभाव इस प्रकार होता है। अगर कुण्डली मिलाने पर वर-वधू की कुण्डली(kundli) में पूर्व भाग योगिनी नक्षत्र आता है तो विवाह के पश्चात पत्नी अपने पति के प्रति विशेष प्रेम और अनुराग रखती है। वर वधू की कुण्डली का आंकलन(Assessment) करने से अगर वर वधू की कुण्डली में मध्य योगिनी का निर्माण होता है तो शादी के बाद पति पत्नी के बीच काफी प्रेम होता है, इसी प्रकार अगर कुण्डली में परभाग योगिनी नक्षत्र होता है तो विवाह के बाद पत्नी को अपने पति से विशेष प्रेम मिलता है।

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Comments (1 posted):

meenu maheshwari on 22 February, 2009 10:25:39
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