जामित्र दोष और वाण पंचक दोष Jamitra Dosha and banpanchak dosha
यदि विवाह लग्न या चन्द्रमा से मुहुर्त लग्न में सप्तम भाव(Seventh House) में कोई ग्रह मौजूद हो तो जामित्र दोष लगता है (If any planet is situated in seventh house from Vivah lagna or from moon then jamitra dosha appears)। मुहुर्त लग्न के सप्तम भाव में जो ग्रह होता है उसके अनुसार इस दोष की स्थिति में किस प्रकार का परिणाम प्राप्त होता है इसे देखिए। अगर सप्तम भाव में सूर्य मौजूद हो तो स्त्री को विधवा का जीवन बिताना पड़ता है (If sun is in Seventh House in marriage muhurta, there are chances that bride could be widow)। अगर सप्तम में मंगल स्थित हो तो पति-पत्नी में से किसी की भी मृत्यु हो सकती है(In vivah muhurta, Mars is situated in Seventh house then chance of death of any one in Husband and Wife) , अगर सप्तम भाव में बुध हो तो सन्तान की हानि होती है(If Mercury is situated in Seventh House it is bad for Child), इस भाव में गुरू के होने से सौभाग्य का नाश होता है, इस भाव में शुक्र होने पर आपके घर में रोग का वास होता है, इस भाव में शनि होने पर मृत्यु की आशंका रहती है तथा राहु-केतु होने से आप कई प्रकार के बंधनों में उलझे रहते हैं। विवाह नक्षत्र से चौदहवें नक्षत्र में पाप ग्रह होने पर पाप जामित्र बनता है (If Malefic Planet is Stituated in fourteenth nakshatra from Marriage Nakshatra, then jamitra dosha is created) तथा शुभ ग्रह होने पर शुभ जामित्र बनता है। पाप जामित्र होने से मुहुर्त दोषपूर्ण हो जाता है।
इन स्थितियों में यह दोष नहीं लगता है(Dosha is not applicable in this conditions) : 1.चन्द्रमा बलवान स्थिति में हो(If Moon is Strong)। 4.चन्द्रमा से सप्तम भाव में बुध ग्रह स्थित हो(Mercury is situated in Seventh House from Moon)।
वाण दोष के बाद अगला दोष आता है एकार्गल दोष.....
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