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जामित्र दोष और वाण पंचक दोष Jamitra Dosha and banpanchak dosha

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विवाह के लिए मुहुर्त का आंकलन करते समय देखा जाता है कि इसमें कोई दोष तो नहीं है(Before marriage ensure that Vivah muhurta is favorable for marriage)। मुहुर्त में दोष होने पर अगर विवाह संस्कार किया जाए तो कई प्रकार की बाधाएं व परेशानी वैवाहिक जीवन में आती है।

मुहुर्त दोष के अन्तर्गत आने वाले दोषों में एक दोष है मुहुर्त दोष के अन्तर्गत आने वाले दोषों में एक दोष है जामित्र दोष, आइये देखते हैं कि जामित्र दोष के होने से किस प्रकार की परेशानी आती है व यह दोष कैसे लगता है। , आइये देखते हैं कि जामित्र दोष के होने से किस प्रकार की परेशानी आती है व यह दोष कैसे लगता है।

जामित्र दोष (Jamitra Dosh)
यदि विवाह लग्न या चन्द्रमा से मुहुर्त लग्न में सप्तम भाव(Seventh House) में कोई ग्रह मौजूद हो तो जामित्र दोष लगता है (If any planet is situated in seventh house from Vivah lagna or from moon then jamitra dosha appears)।  मुहुर्त लग्न के सप्तम भाव में जो  ग्रह होता है उसके अनुसार इस दोष  की स्थिति में किस प्रकार का परिणाम प्राप्त होता है इसे  देखिए। अगर सप्तम भाव में सूर्य मौजूद हो तो स्त्री को विधवा का जीवन  बिताना पड़ता है (If sun is in Seventh House in marriage muhurta, there are chances that bride could be widow)। अगर सप्तम में मंगल स्थित हो तो पति-पत्नी में से  किसी की भी मृत्यु हो सकती है(In vivah muhurta, Mars is situated in Seventh house then chance of death of any one in Husband and Wife) , अगर सप्तम भाव में बुध हो  तो सन्तान की हानि होती है(If Mercury is situated in Seventh House it is bad for Child), इस भाव में गुरू के होने  से सौभाग्य का नाश होता है, इस  भाव में शुक्र होने पर आपके घर  में रोग का वास होता है, इस  भाव में शनि होने पर मृत्यु की आशंका रहती है तथा  राहु-केतु होने से आप  कई प्रकार के बंधनों में उलझे रहते हैं। विवाह नक्षत्र से चौदहवें नक्षत्र में पाप  ग्रह होने पर पाप जामित्र बनता है  (If Malefic Planet is Stituated in fourteenth nakshatra from Marriage Nakshatra, then jamitra dosha is created) तथा शुभ ग्रह होने पर शुभ  जामित्र बनता है। पाप जामित्र होने से  मुहुर्त दोषपूर्ण हो जाता है।

इन स्थितियों में यह दोष नहीं लगता है (Jamitra Dosha is not applicable in this conditions) :

  • 1.चन्द्रमा बलवान स्थिति में हो(If Moon is Strong)।
  • 2.जामित्र दोष बनाने वाले ग्रह पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो।
  • 3.विवाह लग्न से सप्तम में चन्द्रमा एवं बृहस्पति बलवान स्थिति में हों (Moon situated in seventh house or Jupiter is strong in marriage lagna)।
  • 4.चन्द्रमा से सप्तम भाव में बुध ग्रह स्थित हो(Mercury is situated in Seventh House from Moon)।

वाणपंचक दोष (Vanpanchak Dosha)
जामित्र दोष के बाद वैवाहिक मुहुर्त को अशुभ बनाने वाला अगला दोष है वाण पंचक दोष। वाण पंचक का अर्थ है पांच प्रकार के वाण जैसे रोग वाण (Rogvan), अग्नि वाण (Agnivan), राज बाण(Rajvan), चोर बाण(Chorvan) और मृत्यु बाण(Mrityuvan)। इन पांचों बाणों में से मृत्यु बाण का विवाह में त्याग करना चाहिए। मृत्यु वाण का निर्माण कैसे होता है आइये इसे देखें। सूर्य किसी भी राशि में 1, 10, 19 या 28 अंश पर हो तो मृत्यु वाण दोष बनता है (If Sun is in any sign on 1,10,19 or 28 degree then mrityu dosha is applicable)। बाण पंचक निकालने के लिए सूर्य की संक्रांति के तात्कालिक गतांशों से आंकलन किया जाता है। इस आंकलन में सूर्य के गतांशों को पांच जगह रखकर उनमें क्रमश: 6, 3, 1, 8, 4 जोड़ा जाता है, जोड़ से प्राप्त संख्या को 9 से भाग दिया जाता है। अगर शेष पांच बचता है तो वाण दोष होता है अन्यथा नहीं।

वाणपंचक दोष के बाद अगला दोष आता है एकार्गल दोष.....

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