शुभ योग है अमृतसिद्धि और सर्वर्थसिद्ध योग (Amritsidhi and Sarvarth siddhi yoga are auspicious)
जब कोई मांगलिक कार्य करना होता है तब हम देखते हैं कि समय कार्य हेतु शुभ है अथवा नहीं। शुभ समय में शुभ कार्य करने की बात ज्योतिषशास्त्र इसलिए कहता है क्योंकि जब हम अच्छे समय में काम की शुरूआत करते हैं तब उसका परिणाम भी अनुकूल होता है। ज्योतिशास्त्र में अच्छा समय शुभ योग कहलता है। शुभ योग में अमृतसिद्धि योग और सर्वार्थसिद्धि योग सभी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। सर्वाथ सिद्ध योग नाम से ही ज्ञात होता है कि यह योग सभी प्रकार की मनोकामना को पूरा करने वाला योग है। इस योग के विषय में ज्योतिषशास्त्र कहता है कि इस योग के दौरान अगर आप कोई शुभ कार्य शुरू करें तो आपको सम्बन्धित काम में अवश्य सफलता मिलती है। यह योग किस प्रकार निर्मित होता है आइये इसे जानें:
अमृतसिद्धि योग और सवार्थसिद्धि योग दोनों ही तिथि और वार के संयोग से बनने वाले योग हैं। यह शुभ योग कैसे बनता है इस विषय में बातों का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले हम देखते हैं कि अमृतसिद्धि योग किन स्थितियों में बनता है।
1.हस्त नक्षत्र (Hast Nakshatra) जब रविवार के दिन पड़े तो तिथि और वार का संयोग बनता है जिससे यह शुभ योग बनता है।
2. मृगशिरा नक्षत्र जब सोमवार के दिन पड़ता है तब वार और तिथि के मध्य संयोग बनता है जिससे यह योग बनता है (When Mrigashira Nakshatra appear on monday, it makes a combination of var and tithi in consequence Amritsiddhi yoga is created)।
3.मंगलवार को गोचरवस अश्विनी नक्षत्र आने से अमृत सिद्धि योग बनता है (In transit when mars is in Ashwani Nakshatra it generates Amritsiddhi yoga)
4 बुधवार को जब अनुराधा नक्षत्र के साथ संयोग बनता है तब इय दशा में भी इस योग का निर्माण होता है (Combination of wednesday and Anuradha Nakshatra makes Amrtisiddhi yoga)।
5. गोचरवश जब कृतिका नक्षत्र का बृहस्पतिवार के साथ मिलाप होता है तो अमृतसिद्धि नामक शुभ योग बनता है (In transit Kritika Nakshatra and Thursday make combination, it results in Amrtisiddhi yoga )।
6.शुक्रवार के दिन गोचर में जब रेवती नक्षत्र आता है तब यह शुभ योग निर्मित होता है।
7.गोचरवश जब रोहिणी नक्षत्र का संयोग शनिवार से होता है तब अत्यंत शुभ अमृतसिद्ध योग बनता है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह योग किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम है। इस योग के रहते जो भी कार्य शुरू किया जाता है उसमें शुभ फल की प्राप्ति होती है।
नक्षत्र और वार के संयोग से बनने वाला एक अन्य शुभ योग है सर्वार्थसिद्ध योग। अब हम इसी शुभ योग पर बातों का सिलसिला आगे ले चलते हैं।
सर्वार्थसिद्ध योग (SarvarthSiddh Yoga)
सर्वाथ सिद्ध योग नाम से ही ज्ञात होता है कि यह योग सभी प्रकार की मनोकामना को पूरा करने वाला योग है (Sarvarth siddh Yoga means, that yoga which is capable to fulfill all the desires)। इस योग के विषय में ज्योतिषशास्त्र कहता है कि इस योग के दौरान अगर आप कोई शुभ कार्य शुरू करें तो आपको सम्बन्धित काम में अवश्य सफलता मिलती है। यह योग किस प्रकार निर्मित होता है आइये इसे जानें:
1. रविवार के साथ जब हस्त, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, पुष्य अथवा आश्लेषा नक्षत्र का संयोग होता है तब सर्वार्थ सिद्ध योग बनता है (When Hast, Mool, Uttrafalguni, Uttrasadha, Uttrabhadrapada, Pushya or Ashlesha Nakshatra appear on sunday it makes SarvarthSiddh Yoga)।
2. सोमवार के साथ श्रवण(Sravan), रोहिणी(Rohini), मृगशिरा(Mrigshira), पुष्य(Pushay) अथवा अनुराधा नक्षत्र(Anuradha Nakshatras) जब मिलते है तब यह योग निर्मित होता है।
3.मंगलवार के साथ अश्विनी(Ashvini), उत्तराभाद्रपद(Uttrabhadrapada),कृतिका(Kritika) अथवा आश्लेषा(Ashlesha) नक्षत्र का संयोग होने पर शुभ सर्वार्थ सिद्ध योग बनता है।
4. बुधवार के साथ गोचरवश जब रोहिणी, अनुराधा, हस्त, कृतिका अथवा मृगशिरा का संयोग होता है तब यह योग बनता है।
5. बृहस्पति के साथ जब गोचरवश रेवती, अनुराधा, अश्विनी, पुनर्वसु अथवा पुष्य का संयोग होता है तब यह योग बनता है।
6.शुक्रवार के साथ जब रेवती, अनुराधा, पुनर्वसु, अश्विनी अथवा श्रवण का मिलाप होता है तब सर्वार्थ सिद्ध योग बनता है।
7.शनिवार के साथ जब श्रवण, रोहिणी या स्वाति का संयोग होता है तब यह शुभ योग बनता है (In transit sravan, rohini or swati nakshatra appear on saturday, its result is Sarvarthsiddhi yoga)
अबतक आप जान गये होंगे कि नक्षत्र और वार के संयोग से चार योग बनते हैं जिनमें दो शुभ होते हैं और दो अशुभ।
नक्षत्र और वार के संयोग से बनने वाले योग के बाद अब बात करेंगे वार, तिथि एवं नक्षत्र के मिलने से बनने वाले योग के विषय में, इस श्रृंखला में सबसे पहले आता है मधु सर्पिस योग:.........
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