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दग्ध योग(Dagdh Yog)

image दग्ध योग(Dagdh Yog)

जिस तरह वार और तिथि के संयोग से योग का निर्माण(Making Yog with Day and Date) होता है उसी प्रकार वार और नक्षत्र का संयोग होने पर योग का निर्माण होता है। नक्षत्रों की संख्या 27 हैं इन नक्षत्रों का जिस वार के साथ संयोग होता है उसी प्रकार उनका शुभ अथवा अशुभ प्रभाव (Auspicious and Inauspicious effect) हमारे ऊपर होता है।

नक्षत्र एवं वार के संयोग से बनने वाले योगों के क्रम में आइये सबसे पहले हम अशुभ दग्ध योग की बात करें। आपने वार और तिथि से बनने वाले योग को देखा होगा तो आपको पता होगा कि तिथि और वार के संयोग से भी दग्ध योग बनता है। नक्षत्र और तिथि से बनने वाला दग्ध योग(Making of Dagdh Yog from Day and Date) और तिथि से बनने वाला दग्ध योग अलग अलग है परंतु परिणाम में दोनों ही सगे सम्बन्धी यानी समान हैं।

आइये अब नक्षत्र एवं वार के मिलन से बनने वाले दग्ध योग पर एक नज़र डालें।
1.रविवार के दिन जब भरणी नामक नक्षत्र(Brahni Nakshatras) पड़ता है तब यह योग बनता है।

2. चित्रा नक्षत्र जब सोमवार के दिन पड़ता तब वह दिन दग्ध योग के प्रभाव में माना जाता है।

3.उत्तराषाढ़ा नक्षत्र (Utrashada Nakshatras) का संयोग जब मंगलवार से होता है तो इस योग का प्रादुर्भाव (Pradubrhav) होता है।

4.बुधवार के दिन जब घनिष्ठा नक्षत्र (Ghnishtha Nakshatras) आये तो यह अशुभ संयोग होता है क्योंकि इससे दग्ध योग बनता है।

5.बृहस्पतिवार के दिन जब उ.फा.(Utra Phalguni) नक्षत्र हो तो वह दिन भी शुभ कार्य के लिए वर्जित होता है, कारण यह है कि इस स्थिति में भी दग्ध नामक अशुभ योग बनता है।

6.ज्येष्ठा नाम नक्षत्र (Jaysht Nakshatras )जब गोचरवश (Gocharvash)  शुक्रवार के दिन पड़ता है तो उस दिन को शुभ कार्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि इस स्थिति में दग्ध नामक अशुभ योग बनता है।

7.शनिवार के साथ अगर गोचरवश रेवती नक्षत्र (Gocharvash Raivti Nakshatras) का संयोग होता है तो इनके फल के रूप में इस योग का जन्म होता है।

इस योग में सभी प्रकार के शुभ कार्य सहित यात्रा नहीं करने की सलाह दी जाती है। यात्रा के सम्बन्ध में यह योग बहुत ही अशुभ माना जाता है।

नक्षत्र एवं वार के संयोग से बनने वाला एक अन्य अशुभ योग है यमघण्ट योग (Yamghanta Yog)। आइये देखें कि यह योग कैसे बनता है।

1. रविवार के दिन के साथ जब मघा नक्षत्र (Madha Nakshatras) का संयोग होता है तो इसके फल के रूप में यमघण्ट नामक अशुभ योग बनता है।

2.सोमवार के दिन साथ जब विशाखा नक्षत्र (Vishakha Nakshatras)  का मिलाप होता है तो अशुभ यह योग जन्म लेता है।

3.आर्द्रा नक्षत्र(Ardra Nakshatras) जब गोचरवश मंगल के साथ संयोग करता है तब इस स्थिति में यमघण्ट नामक योग बनता है।

4.बुधवार और मूल नक्षत्र जब मिलता है तब भी यह अशुभ योग बनता है।

5.कृतिका नक्षत्र (Kritika Nakshatras) जब बृहस्पतिवार को पड़ता है तो उस दिन को शुभ काम के लिए वर्जित माना जाता है क्योंकि इन स्थितियों में यमघण्ट नामक योग बनता है।

6.जिस शुक्रवार को रोहिणी नक्षत्र(Rohini) पड़ता वह शुक्रवार इस योग के प्रभाव में रहता है।

7.गोचरवश जब शनिवार हस्त नक्षत्र में पड़ता है तो उस दिन को मांगलिक कार्य के लिए शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि नक्षत्र और वार के संयोग से यमघण्ट नामक अशुभ योग बनता है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस योग में यात्रा सहित कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए।

तिथि और वार के संयोग से बनने वाले इन अशुभ योगों के बारी आती है शुभ योग की, इसके अन्तर्गत पहले आता है अमृत सिद्ध योग.......

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