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वार और तिथि से बनने वाला योग - सिद्धयोग - Sidhhayoga

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 अगर योग अनुकूल (Applicable yoga) होता है तो शुभ (Auspicious) कहलाता है और अगर कार्य की दृष्टि से प्रतिकूल होता है तो अशुभ (Inauspicious) कहलाता है। यहां हम दिन और तिथि के मिलने से बनने वाले सिद्ध योग की बात करते हैं जो शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है।

सिद्ध योग का निर्माण (Erection of Sidh yog) किस प्रकार होता है  सबसे पहले इसे जानते हैं।
1. अगर शुक्रवार के दिन नन्दा तिथि अर्थात प्रतिपदा, षष्ठी या एकादशी (Shashthi or Ekadshi) पड़े तो बहुत ही शुभ होता है ऐसा होने पर सिद्धयोग का निर्माण होता है।

2.भद्रा तिथि (Badhra Tithi) यानी द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी अगर बुधवार के दिन हो तो यह सिद्धयोग का निर्माण करती है।

3.जया तिथि (Jaya Tithi) यानी तृतीय, अष्टमी या त्रयोदशी अगर मंगलवार के दिन पड़े तो यह बहुत ही मंगलमय होता है इससे भी सिद्धयोग का निर्माण होता है।

4.ज्योतिषशास्त्र के अन्तर्गत चतुर्थ, नवम और चतुर्दशी को रिक्ता तिथि के नाम से जाना जाता है(Comprises of Astrologer Fourth,Nineth and Fourteen are known as Rikta Tithi), अगर शनिवार के दिन रिक्ता तिथि पड़े तो यह भी सिद्धयोग(Sidh Yog) का निर्माण करती है।

5.पंचमी, दशमी, पूर्णिमा, अमावस को ज्योतिषशास्त्र के अन्तर्गत पूर्णा तिथि (Comprises of Astrologer Panchmi, Dashmi , Amavas and Purnima are known as Purna Tithi) के नाम से जाना जाता है। पूर्णा तिथि बृहस्पतिवार के दिन उपस्थित होने से भी सिद्ध योग बनता है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सिद्धयोग बहुत ही शुभ होता है(According to the Astrologer Sidhyog is very Auspicious)। इस योग के रहते कोई भी शुभ कार्य सम्पन्न किया जा सकता है, यह योग सभी प्रकार के मंगलकारी कार्य के लिए शुभफलदायी कहा गया है।

वार और तिथि से ही बनने वाला एक योग है मृत्यु योग(Yog which making according to the  Day and Date is known as Mritu Yog)  इसे जानने के लिए देखें  मृत्यु यो

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