एकार्गल, उपग्रह और युति दोष ( Ekargal, Upagrah or Yuti Dosha)
वैवाहिक मुहूर्त में कई प्रकार के दोष लगते हैं इन दोषों का आंकलन करने के बाद ही आपको विवाह की तिथि निर्घारित करनी चाहिए। अगर अप इन दोषों पर गौर नहीं करते हैं तो विवाह में कई प्रकार की परेशानी और समस्याएं आ सकती हैं। आइये देखें कुछ दोषों को।
एकार्गल दोष (Ekargal Dosha) को खार्जूर दोष (Kharjoor Dosha) के नाम से भी जाना जाता है। वैवाहिक मुहुर्त (Marriage Muhurta) में यह दोष तब लगता है जबकि मुहुर्त निकालते समय सूर्य जिस नक्षत्र में हो उस नक्षत्र से अभिजीत सहित 28 नक्षत्रों को गिनने पर चन्द्रमा जिस नक्षत्र में है उस नक्षत्र से सूर्य जिस नक्षत्र में है उस नक्षत्र तक गिनने पर उनके बीच बीच अगर 1, 3, 5, 7 के क्रम में विषम ग्रहों की दूरी हो तो यह दोष लग सकता है।
सूर्य और चन्द्र के नक्षत्र के बीच आने वाले नक्षत्रों की दूरियां विषम हो साथ ही अशुभ योग व्यतिपात, शूल, विष्कुम्भ, व्याघात, गंड, वैधृत, वज्र, परिधि एवं अतिगण्ड में से कोई नक्षत्र हो तो यह दोष प्रभावी होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर चन्द्रमा समसंज्ञक नक्षत्र में हो तो यह दोष नहीं लगता है ( As per astrology if moon is situated in Samsangyak Nakshatra, so this dosha is not effected) ।
वैवाहिक मुहुर्त में आने वाले दोषों के अन्तर्गत अगला दोष आता है
उपग्रह दोष (Upagrah Dosha)
उपग्रह दोष तब बनता है जबकि सूर्य नक्षत्र का विवाह नक्षत्र से सम्बन्ध स्थापित होता है (The Upagrah Dosha is created, When Sun Nakshatra is making relation from Marriage Nakshatra)। जब सूर्य नक्षत्र से विवाह नक्षत्र 5, 7, 8, 10, 14, 15, 18, 19, 21, 22, 23, 24 या 25वें नक्षत्र पर हों। इस दोष को आइये एक उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिए विवाह वाले दिन चन्द्रमा मृगशिरा नक्षत्र है और सूर्य अश्विनी नक्षत्र में है तो गणना करने पर गृगशिरा नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से पांचवे स्थान पर होगा अत: ऐसे में उपग्रह दोष लगेगा, जिसके कारण इस दिन विवाह नहीं करना चाहिए अन्यथा वर वधू उपग्रह दोष से पीड़ित होंगे।
उपग्रह दोष की तरह वैवाहिक मुहुर्त को दूषित करने वाला दोष है युति दोष (Yuti Dosha) आइये अब इसके विषय में बात करें।
युति दोष (Yuti Dosha)
जब विवाह के लिए मुहुर्त देखा जाता है तब पंचांग में ग्रह, नक्षत्र का आंकलन बहुत ही ध्यान से करना होता है क्योंकि विवाह मुहुर्त में कई प्रकार के दोष लगते हैं, युति दोष भी इन्हीं में से हैं। युति दोष तब लगता है जबकि विवाह वाले दिन चन्द्रमा जिस नक्षत्र में हो उस नक्षत्र के साथ पाप ग्रह यानी मंगल, राहु, केतु अथवा शनि आकर युति का निर्माण करे।
युति दोष के सम्बन्ध में कुछ ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि युति चाहे पाप ग्रहों की हो अथवा शुभ ग्रहों की किसी भी स्थिति में शुभ नहीं होती है (According to the astrologer if Yuti is Malefic Planets or Auspicious Planets each and every stage it is very Inauspicious) । युति दोष के सम्बन्ध में यह भी कहा गया है कि कुछ स्थितियों में युति दोष का प्रभाव कम हो जाता है जैसे 1.चन्द्रमा अगर अपनी राशि या उच्चराशि में हो तो यह दोष नहीं लगता है (Dosha is not encounted if moon is situated in own sign or exalted sign.) । 2.चन्द्रमा को यदि बृहस्पति देखे या चन्द्रमा-बृहस्पति के साथ केन्द्र स्थान में स्थित हो। 3. चन्द्रमा और पापी ग्रह अगर एक ही नक्षत्र में हों परंतु दोनों की राशियां भिन्न-भिन्न राशियों में हों तो मुहुर्त में युति दोष नहीं लगता है।
नोट: आप कम्पयूटर द्वारा स्वयं शुभ मुहुर्त निकाल सकते है़। इसके लिए आप मुहुर्त एक्सप्लोरर का इस्तेमाल करे। आप इसका 45 दिन तक मुफ्त उपयोग कर सकते हैं । कीमत 650 रु. जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करे




del.icio.us
Digg