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कैसे बनता है सूर्य और चन्द्र के मध्य योग (How is yoga generated between sun and Moon)
ज्योतिषशास्त्री कहते हैं जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी प्रकार योग के भी दो पहलू होते हैं, सभी योग सभी काम लिए जैसे शुभ नहीं होते हैं उसी प्रकार सभी योग सभी प्रकार के काम के लिए अशुभ नहीं होते हैं। बातों का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए हम यहां सूर्य और चन्द्रमा की दूरी से बनने वाले योग की चर्चा करने जा रहे हैं।
ज्योतिष गणित के अनुसार ब्रह्माण्ड का व्यास 3600 है (As per astrology diameter of sun is 36 hundred)। सूर्य और चन्द्र के मध्य अलग अलग योग का निर्माण इनके बीच अलग अलग दूरी के आधार पर होता है। सूर्य और चन्द्र के मध्य बनने वाले योग के लिए 130 20' की दूरी आवश्यक होती है (It is necessary there is a distance of 130 20' between Sun and Moon to make a yoga)। तथ्यों से स्पष्ट होता है कि सूर्य और चन्द्र के मध्य बनने वाले हर योग में इनके बीच 30 20' का अंतर होता है।
सूर्य और चन्द्र के मध्य बनने वाले योग की बात करें तो सबसे पहला योग है विष्कुम्भ (Vishkumbha Yoga)। इस योग में सूर्य और चन्द्र के बीच130 20' की दूरी होती है। इसके बाद इससे इतनी ही दूरी पर यानी 260 40' पर दूसरा योग बनता है "प्रीति योग"। इसी क्रम में सूर्य और चन्द्र से बनने बाले क्रमश: 27 योगों का निर्माण होता है।
सूर्य और चन्द्र से दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम पर गौर करें तो ये क्रमश: इस प्रकार हैं (There are 27 yoga which are generated due to the distance between Sun and Moon)।
1. विष्कुम्भ 2. प्रीति 3. आयुष्मान 4.सौभाग्य 5.शोभन 6.अतिगण्ड 7.सुकर्मा 8. धृति 9.शूल 10.गण्ड 11.वृद्धि 12.ध्रुव 13.व्याघात 14.हर्षण 15.वज्र 16.सिद्धि 17.व्यतीपात 18.वरीयान 19.परिघ 20.शिव 21.सिद्ध 22.साध्य 23.शुभ 24.शुक्ल 25.ब्रह्म 26.इन्द्र 27.वैधृति।
इन योगों के नाम इनसे प्राप्त होने वाले शुभ और अशुभ प्रभाव के आधार पर दिया गया है। 27 योगों में से कुल 9 योगों को अशुभ माना जाता है तथा सभी प्रकार के शुभ कामों में इनसे बचने की सलाह दी जाती है (Nine yoga are known as inauspiciou in total 27 yoga of sun and moon)। अशुभ योग हैं:
1. विष्कुम्भ 2.अतिगण्ड 3.शूल 4.गण्ड 5.व्याघात 6.वज्र 7. व्यतीपात 8. परिघ 9. वैधृति इन अशुभ योगों का शुभफल भी है अगर आप अशुभ कार्य करने जा रहे हैं तो उसमें यह योग शुभ परिणाम देते हैं। इस तरह कार्य के अनुरूप योगों से लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
आप वार और तिथि से बनने वाले योग के विषय जानना चाहते हैं तो इसके अगले भाग में देंखें....वार और तिथि से बनने वाले योग
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