मूहूर्त
विवाह संस्कार (Vivaha Sanskar Part I)
सोलह संस्कार में विवाह संस्कार का प्रमुख स्थान है(Vivah Sanskar is very important part in Sixteen Sanskar)। इस संस्कार के पश्चात व्यक्ति गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है। विवाह के पश्चात व्यक्ति को पारिवारिक व सामाजिक जीवन का निर्वाह करना होता है।
अन्नप्राशन संस्कार(Ann Prashan Sanskar)
हम सभी जानते हैं कि इस शरीर रूपी मशीन को चलाने के लिए उर्जा और शक्ति की आवश्यक होती है(Energy is very essential for our Body)। उन्न और भोज्य पदार्थों से हमें उर्जा और शक्ति मिलती है। सनातन ध्रर्म के अनुसार जब बच्चों के दांत निकलने शुरू होते हैं और वह पहली बार दूध के अलावा ठोस आहार लेता है तब यह संस्कार किया जाता है, अर्थात पहली बार जब बच्चा शास्त्रोक्त तरीके से अन्न ग्रहण करता है उस संस्कार को अन्नप्राशन संस्कार के नाम से जाना जाता है। ...सोलह संस्कार (Sixteen Sanskar)
हिन्दु धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल सोलह संस्कार बताए गये हैं(According to the Hindu dharma there are 16 Sanskars till Death)। इन संस्कारों का इतिहास अति प्राचीन है, इन संस्कारों का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व है(Sanskars is very essential in our Life)। प्रत्येक संस्कार हमारे जीवन में बहुत महत्व रखते है। प्रत्येक संस्कार के मुहुर्त में कौन-कौन से नक्षत्र, तिथि आदि का उपयोग होता है अर्थात किस नक्षत्र, तिथि में कौन सा संस्कार किया जाना चाहिए यहां इसका उल्लेख किया जा रहा है। सबसे पहला संस्कार है गर्भधारण संस्कार.......(First sanskar is garbhdharan)।...दाह संस्कार (Daha Sanskar)
सोलह संस्कार वास्तव में एक चक्र है जो समय के साथ चलता रहता है(In reality 16 Sanskar is like a chakra which working according to the Time)। यह गर्भधारण से शुरू होता है और विभिन्न चरणों से गुजरते हुए शरीर के अंत के साथ समाप्त हो जाता है। हमारे शास्त्र, पुराण बताते हैं कि आत्मा अमर है यह निरन्तर एक शरीर से दूसरे शरीर में भ्रमण करता है जबतक कि आत्मा अपने परम अंश अर्थात परमात्मा को प्राप्त न कर ले। आत्मा की सदगति के लिए व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात हिन्दू धर्म में दाह संस्कार किया जाता है। ...चूड़ाकरण या मुण्डन संस्कार का आधार बौद्धिक विकास..( Chudakarana or Mundan Sanskar)
हमारे मनिषियों ने जितने भी संस्कार बनाये हैं उनका कहीं न कहीं वैज्ञानिक आधार है(Sanskar which is created by Munishaya that all are based on हमारे मनिषियों ने जितने भी संस्कार बनाये हैं उनका कहीं न कहीं वैज्ञानिक आधार है(Hindu sanskar is based on science) बात करें चूड़ाकरण या मुण्डन संस्कार की तो इस संस्कार के पीछे भी कई सिद्धान्त छिपे हैं। पहली नज़र में देखें तो इस संस्कार के द्वारा जन्म के पश्चात पहली बार बाल उतारा जाता है, इससे सिर की सफाई हो जाती है यानी स्वच्छता का सिद्धान्त यहां लागू होता है। इस संस्कार के उद्देश्य की गहराई में देखें तो बहुत सी गूढ़ बातें सामने आती है...........करण (Abstraction)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पंचांग से समय का आंकलन किया जाता है(Assessment of time according to the Panchang)। किसी कार्य के लिए समय शुभ है अथवा नहीं यह भी पंचांग से देखा जाता है क्योंकि पंचांग बताता है कि ग्रह, नक्षत्र की स्थिति कैसी है और उसका परिणाम कैसा होने वाला है। पंचांग को लेकर हमारे मन में कई बार यह उत्सुकता जगती है कि पंचांग को पंचांग क्यों कहा जाता है। ज्योतिर्विद बताते हैं कि पंचांग के पांच अंक अर्थात तत्व होने से इसे पंचांग कहा जाता है। हम यहां इन्हीं पांच अंगों में से एक अंग करण के विषय में बात करने जा रहे हैं, आइये इस अंग के विषय में विस्तार से जानें.......। ...व्यक्तित्व, स्वभाव एवं व्यवहार पर गण का प्रभाव (Significance of Gana on personality, nature and behavior)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार धरती पर जितने भी व्यक्ति हैं उन पर किसी न किसी गण का प्रभाव रहता है। गण तीन प्रकार के होते हैं। मनुष्य गण, देवगण व राक्षसगण। ज्योतिषशास्त्री कहते हैं कि हमारा जन्म किस गण में हुआ है यह हमारे व्यवहार और शारीरिक बनावट को देखकर बताया जा सकता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि यह कैसे संभव है तो आइये देखें......। ...जामित्र दोष और वाण पंचक दोष Jamitra Dosha and banpanchak dosha
विवाह के लिए मुहुर्त का आंकलन करते समय देखा जाता है कि इसमें कोई दोष तो नहीं है(Before marriage ensure that Vivah muhurta is favorable for marriage)। मुहुर्त में दोष होने पर अगर विवाह संस्कार किया जाए तो कई प्रकार की बाधाएं व परेशानी वैवाहिक जीवन में आती है। मुहुर्त दोष के अन्तर्गत आने वाले दोषों में एक दोष है जामित्र दोष, आइये देखते हैं कि जामित्र दोष के होने से किस प्रकार की परेशानी आती है व यह दोष कैसे लगता है। ...द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर योग का प्रभाव (Effects of Dwipushkar and Tripushkar Yoga)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर आप अपना काम शुभ मुहुर्त में करते हैं तो आपको कार्य का परिणाम कई गुणा बेहतर मिलता है। मुहुर्त के विषय में ज्योतिषशास्त्र यह भी कहता है कि कुछ योग ऐसे भी होते हैं जिनमें किये गये काम को पुन: दुहराना पड़ता है। यहां हम इसी प्रकार के कुछ योगों की बात कर रहे हैं। यह योग कैसे बनता है, इस योग का प्रभाव क्या होता है और इन योगों का व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव होता है आइये हम मिलकर देखते हैं। ...वार और तिथि से बनने वाला योग है सिद्धयोग (Combination of Day and Date makes Siddhayoga)
जब आप कोई मंगल कार्य करने की सोच रहे होते हैं तब आप ज्योतिषी महोदय से मिलकर शुभ दिन निकालने की बात करते हैं। शुभ दिन के आंकलन हेतु ज्योतिषी महोदय कई विषयों पर विचार करते हैं। इन विषयों में योग भी काफी महत्वपूर्ण स्थान रखते है। ...Log in



