:
Home | मूहूर्त | केशान्त संस्कार(Keshant Sanskar)

केशान्त संस्कार(Keshant Sanskar)

Font size: Decrease font Enlarge font
image केशान्त संस्कार(Keshant_Sanskar)

शास्त्रों में वर्णित सोलह संस्कारों में एक संस्कार है "केशान्त संस्कार"। केशान्त संस्कार को गोदान संस्कार भी कहा जाता है (Keshant Sanskar is known as Godan Sanskar)। बालक जब 16 वर्ष का हो जाता है तब यह संस्कार किया जाता है (This Sanskar is perform when child completed the age of 16)।

वास्तव में यह संस्कार गुरूकुल में वेदाध्ययन पूर्ण करने के पश्चात सम्पन्न किया जाता था। इस संस्कार में छात्र दाढ़ी बनाते थे उसके पश्चा पवित्र जल में स्नान करते थे। इन क्रियाओ के बाद छात्रों को स्नातक की उपाधि दी जाती थी एवं उन्हें गृहस्थ आश्रम में प्रवेश की आज्ञा दी जाती थी।

इस संस्कार में दाढ़ी बनाने के पश्चात उन बालों को या तो गाय के गोबर में मिला दिया जाता था या गौशाला में गढ्ठा खोदकर दबा दिया जाता था अथवा किसी नदी में प्रवाहित कर दिया जाता था। इस प्रकार की क्रिया इसलिए की जाती थी ताकि कोई तांत्रिक उन बालों पर अपनी तान्त्रिक क्रिया के द्वारा नुकसान न पहुंचा सके। इस संस्कार के बाद गुरू को गाय दान दिया जाता था। यह संस्कार शुभ मुहुर्त देखकर आयोजित किया जाता था(This Sanskar is perform  in Auspicious Muhurat)। मुहुर्त का आंकलन किस प्रकार किया जाता था चलिए इसे जानते हैं(Assessment of Muhurta Are as follows)।

(Nakshatras):
केशान्त संस्कार उस मुहुर्त में किया जाता था जिसमें स्वाती(Swati), पुनर्वसु(Punarvasu), श्रवण(Sravan), घनिष्ठा(Ghanista), शतभिषा(Shatbhisha), हस्त(Hast), अश्विनी(Ashvini), पुष्य, मृगशिरा(Mrigshira), रेवती(Raivti), चित्रा (Chitra) और ज्येष्ठा (Jayeshta) में से कोई नक्षत्र मौजूद होता। इन नक्षत्रों में से किसी नक्षत्र की मौजूदगी में यह संस्कार आयोजित किया जाता था। आप भी इस संस्कार के लिए इन नियमों को अपना सकते हैं।

(Date):
द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथि को इस संस्कार हेतु उपयुक्त तिथि माना जाता था(Second,Third,Fifth,Seventh,Tenth,Eleventh and Thirteen dates are very Auspicious for this Sanskar। आज भी छात्र उपरोक्त नक्षत्र और तिथि का ध्यान करते हुए वार और लग्न को दखते हुए पहली बार दाढ़ी बनाएं तो उनके लिए शुभ होगा।

वार (Day):
वार के रूप में इस संस्कार के लिए सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को शुभ माना गया है (Monday, Wednesday, Thursday and Friday is Auspicious for this Sanskar)।

लग्न (Ascendent):
केशान्त संस्कार के लिए मुहुर्त देखते समय लग्न का विचार करना भी बहुत आवश्यक होता था(Consideration of Ascendent at the time of Muhurta for Keshant Sanskar)। इस संस्कार के लिए शुभ लग्न तब माना जाता था जबकि जन्म राशि और जन्म राशि से अष्टम राशि के लग्न नहीं हों, अर्थात इस संस्कार के लिए सभी लग्न शुभ माने जाते थे सिर्फ जन्म राशि और उससे आठवीं राशि के लग्न का त्याग किया जाता था।

निषेध (Nishadeh):
इस संस्कार के लिए चन्द्र एवं तारा शुद्धि का विचार करना आवश्यक होता था(Consideration of Evacuation of Moon and Star for this Sanskar)। चतुर्थ, अष्टम एवं द्वादश का चन्द्र होने पर चन्द्र दोष होता है अत: इनका त्याग किया जाता था। तृतीय, पंचम एवं सप्तम का तारा भी दोषपूर्ण होता था अत: इनका भी त्याग किया जाता था।

नोट: आप कम्पयूटर द्वारा स्वयं शुभ मुहुर्त निकाल सकते है़। इसके लिए आप मुहुर्त एक्सप्लोरर का इस्तेमाल करे। आप इसका 45 दिन तक मुफ्त उपयोग कर सकते हैं । कीमत 650 रु. जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करे