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जानिए मुहुर्त और लत्ता दोष क्या है (Konw the Muhurta and Latta Dosha)
जन्मकुण्डली की भांति मुहुर्त का भी ज्योतिषशास्त्र में महत्वपूर्ण स्थान है( Muhurta is as important as Janmkundli in Jyotish)। इसे कुछ समय का भाग्य भी कहा जाता है (Muhurta also known as Short time of Luck)। इसका निर्माण मनुष्य स्वयं करता है। जैसे कुण्डली से व्यक्ति के भाग्य को देखा जाता है उसी प्रकार पंचांग से मुहुर्त का विश्लेषण किया जाता है।
हम आप जब कोई काम करने की सोचते तो मन में दो तरह के सवाल जन्म लेते हैं जिनमें एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक होता है यानी कार्य सफल होगा या असफल। ज्योतिषशास्त्री कहते हैं अगर हम कार्य के सम्बन्ध में पंचांग से मुहुर्त का विचार करके कार्य करें तो सफलता की संभावना अधिक रहती है क्योंकि इसमें शुभ लग्न, शुभ नक्षत्र, शुभ तिथि, शुभ वार एवं शुभ योग का आंकलन करके सम्बन्धित विषय का मुहुर्त निकाला जाता है।
जैसे आप कोई व्यवसाय करने जा रहे हैं और जानना चाहते हैं कि इस समय यह व्यवसाय शुरू करना सही होगा या नहीं तो इसके लिए मुहुर्त देखा जाएगा और इससे फलादेश किया जाएगा।
विवाह हमारे जीवन का अहम फैसला होता है। वैवाहिक जीवन सफल और सुखमय रहे व विवाह में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आए इसके लिए विवाह के सम्बन्ध में मुहुर्त का आंकलन बहुत जरूरी हो जाता है (For happy Married life, you should marry in Good Muhurta) विवाह के लिए मुहुर्त निकालते समय काफी सावधानी रखनी चाहिए अन्यथा दोष लगता हैं।
विवाह के लिए मुर्हुत कैसे निकाला जाए और इसमें कैसे दोष आते हैं इसकी चर्चा हम इस श्रृंखला में कर रहे हैं। आइये देखें कि वैवाहिक मुहुर्त कैसे निकालना चाहिए व इसमें कैसे दोष लगता है।
लत्ता दोष (Latta Dosha)
विवाह के लिए जब मुहुर्त निकाला जाता है तब देखा जाता है कि अमुक दिन और समय में विवाह के सम्बन्ध में कोई बाधा या अड़चन तो नहीं है। वैवाहिक मुहुर्त में आने वाले दोषों में सबसे पहला नाम आता है लत्ता दोष का, लत्ता का मतलब है लात यानी "पैर"। यदि विवाह वाले दिन नक्षत्र को कोई ग्रह लात मारता है तो लत्ता दोष कहलाता है (On the day of marriage, if any Planet struck nakshatra, is known as Latta Dosha)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रह जिस नक्षत्र में होता है उससे आगे अथवा पीछे किसी नक्षत्र को जब लात मारता है तब लत्ता दोष लगता है। ग्रह किस प्रकार से नक्षत्रों को लात मारते हैं इसे देखिए: सूर्य जिस नक्षत्र में होता है उससे आगे 12 वें नक्षत्र को लात मारता है। सूर्य की भांति मंगल भी जिस नक्षत्र में होता है उससे आगे तीसरे नक्षत्र को लात मारता है। गुरू और शनि भी आगे की ओर क्रमश: 6ठे और आठवें नक्षत्र को लात मारते हैं। इनके अलावे जो ग्रह हैं वे पीछे की ओर लात मारते हैं जैसे पूर्ण चन्द्रमा अपने नक्षत्र से पीछे के 22वें नक्षत्र को लात मारता है। बुध अपने नक्षत्र से पीछे सातवें नक्षत्र को, शुक्र अपने नक्षत्र से पीछे पांचवें नक्षत्र को तथा राहु अपने नक्षत्र से पीछे के नौवें नक्षत्र को लात मारता है।
ज्योतिष सिद्धांत में यूं तो किसी भी ग्रह की लत्ता या लात अच्छी नहीं होती है परंतु पाप ग्रहों की लत्ता अधिक दोषपूर्ण होती है (Latta of Melafic Planets is very Inauspicious)। पाप ग्रहों की लत्ता होने पर विवाह नहीं करना चाहिए ऐसी सलाह दी जाती है उदाहरणस्वरूप मान लीजिए बृहस्पति कृतिका नक्षत्र में है तो वह अपने नक्षत्र से आगे के छठे नक्षत्र यानी पुष्य को लात मारेगा, इसी प्रकार शुक्र अगर कृतिका नक्षत्र में है तो वह अपने से पीछे के पांचवें नक्षत्र यानी उत्तराभाद्रपद (Uttra bhadrapad) को लात मारेगा इस स्थिति में लत्ता दोष लगता है, इस दोष में विवाह करने की सलाह नहीं दी जाती है ( You should not marry in Latta Dosha)
लत्ता दोष में ग्रहों के भिन्न नक्षत्रों को लात मारने से किस प्रकार का प्रभाव उत्पन्न होता है इसके लिए आप चार्ट देख सकते हैं।
वैवाहिक मुहुर्त में लगने वाले दोषों में अगला दोष है पात दोष (Paat Dosha):
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