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मधु सर्पिस योग (Madhusarpish yoga)
मधु सर्पिस योग एक अशुभ योग होता है। इस योग के बनने के लिए तीन तत्वों की आवश्यकता होती है वह है वार, तिथि और नक्षत्र (Combination of Var, Tithi, and Nakshatra are necessary for Madhusarpish yoga)। जब इनका संयोग होता है तब शुभफल प्रदान करने वाले योग भी अशुभ हो जाते हैं जैसे शहद के अंदर विष घोल दिया गया हो, यही कारण है कि इस योग को मधु सर्पिस योग के नाम से जाना जाता है।
आइये जानें कि यह योग किस प्रकार बनता है और कैसे यह योग वार और नक्षत्र के संयोग से बनने वाले अमृतसिद्ध नामक अत्यंत शुभ योग को अशुभ (Come to know, how Amrtisiddhi yoga changes from auspicious to inauspicious Madhusarpish yoga) बना देता है।
1.हस्त नक्षत्र जब रविवार के दिन पड़ता है तब अमृत सिद्ध योग बनता है (When Hast Nakshatra makes a combination with Sunday it creats Amritsiddhi yoga)। लेकिन जब यह योग पंचमी तिथि को बनता है तब यह अशुभ मधु सर्पिस योग बन जाता है (If Amrtsiddhi yoga is created on panchmi tithi then it transforms into madhusarpish yoga)।
2.मृगशिरा नक्षत्र जब सोमवार के दिन पड़ता है तो शुभ योग होता लेकिन षष्टी तिथि में जब यह योग बनता है तो अमृत सिद्धि नामक शुभ योग के प्रभाव को नष्ट कर देता है क्योंकि यह अशुभ मधु सर्पिस योग बन जाता है (Combination of Mrigshira Nakshatra and Monday generates Auspicious Amrtisiddhi yoga, if shasti tithi is combined with them too it makes inauspicous Madhusarphis yoga)।
3.मंगलवार के दिन अगर सप्तमी तिथि हो और गोचरवश अश्विनी नक्षत्र(Ashwani Nakshatra) आ जाए तो यह योग बन बनाता है।
4.बुधवार और अनुराधा नक्षत्र का संयोग होने पर शुभ अमृतसिद्वि योग (Amritsiddhi Yoga) बनता है लेकिन अष्टमी तिथि में जब यह योग बनता है तो अशुभ हो जाता है।
5.गोचरवश जब कृतिका नक्षत्र(Kritika Nakshatra) का गुरूवार के साथ मिलाप होता है तो अमृतसिद्धि नामक शुभ योग बनता है लेकिन, अगर यह शुभ योग नवमी तिथि को बनता है तो अशुभ मधु सर्पिस योग बन जाता है जो अमृत सिद्धि नाम शुभ योग के प्रभाव को निगल जाता है (When kritika nakshatra and Jupiter meet, it's results in Amritsiddhi yoga, if Navmi tithi is also in combination, then it is changed into inaupicious madhusarpish yoga)।
6. दशमी तिथि में जब शुक्रवार और रेवती नक्षत्र(Raivti Nakshatras) का संयोग होता है तो यह अशुभ योग बनता है (Combination of Dushmi tithi, Friday and Revti Nakshatra forms inauspicious Madhusarpish yoga) ।
7.गोचरवश जब रोहिणी नक्षत्र(Rohini Nakshatras) का संयोग शनिवार से होता है और तिथि होती है एकादशी तो अमृत सिद्ध योग मधु सर्पिस योग में परिवर्तित हो जाता है।
इस तरह हम देखते हैं कि मधुसर्पिस योग किस प्रकार अमृतसिद्ध नामक शुभ योग को अशुभ बना देता है। इस योग में कोई भी काम नहीं करना चाहिए ऐसी सलाह दी जाती है (Amritsiddhi yoga is inauspicious for all auspicious work)।
इस योग के पश्चात वार, तिथि एवं नक्षत्रों के संयोग से बनने वाले दो योग आते हैं द्विपुष्कर योग (Dwipushkar yoga) व त्रिपुष्कर योग (Tripushkar yoga)। आइये अब देखते हैं द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर योग को.......
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