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यात्रा का मुहुर्त-1 - नक्षत्र, तिथि, करण एवं वार विचार - Muhurta for journey - Nakshatra, Tithi, Karan and Var vichar

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image Nakshatra, Tithi, Karan and Var vichar

मनुष्य विभिन्न उद्देश्यों और कार्यों से जीवन में समय समय पर यात्रा करते। जब हम किसी विशेष उद्देश्य या कार्य से यात्रा करते हैं तो हमारी अपेक्षा रहती है कि जिस प्रयोजन मे हम यात्रा कर रहे हें उसमें हमें सफलता प्राप्त हो।

यात्रा कैसी होगी व यात्रा से अनुकूल परिणाम प्राप्त होगा या नहीं यह उस मुहुर्त पर निर्भर करता जिसमें हम यात्रा करते हैं।  ज्योतिषशास्त्री कहते हैं कि यात्रा के विषय में जब मुहुर्त का आंकलन किया जाता है तब देखा जाता है कि

  • यात्रा का उद्देश्य क्या है,
  • कितनी दूरी तक यात्रा करनी है,
  • यात्रा का मार्ग क्या है अर्थात जलमार्ग, वायु मार्ग, सड़क मार्ग या रेल मार्ग में से किस मार्ग से आप यात्रा कर रहे हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि दैनिक या रोजमर्रा की यात्रा के प्रसंग में मुहुर्त का विचार नहीं किया जाता है।
ज्योतिषशास्त्री कहते हैं कि यात्रा के प्रसंग में मुहुर्त देखने के  निम्न सामान्य नियम है

1.नक्षत्र आंकलन (Assessment of Nakshatra):
यात्रा पर जाने से पहले नक्षत्रों की स्थिति का विचार करना चाहिए। अगर यात्रा के दिन हस्त(Hast), अश्विनी(Ashwani), पुष्य(Pushya), मृगशिरा(Mrigshira), रेवती(Raivti), अनुराधा(Anuradha), पुनर्वसु(Punarvashu), श्रवण (Sravan), घनिष्ठा (Ghanistha) नक्षत्र हो तो यात्रा अनुकूल और शुभ रहता है आप इस नक्षत्र में यात्रा कर सकते है। इन नक्षत्रों के अलावा आप उत्तराफाल्गुनी(Uttrafalguni), उत्तराषाढ़ा(Uttrasadha), उत्तराभाद्रपद (Uttravadrapad) में भी यात्रा कर सकते हैं हलांकि ये नक्षत्र इस प्रसंग में मध्यम स्तर के माने जाते हैं।

2.नक्षत्र शूल (Nakshatra Shool):
यात्रा करते समय दिशा का विचार भी करना भी जरूरी होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सभी नक्षत्रों की अपनी दिशा होती है, जिस दिन जिस दिशा का नक्षत्र हो उस दिन उस दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए. आइये इसके लिए एक उदाहरण देखें:
  • अ.ज्येष्ठा नक्षत्र की दिशा पूर्व होती है अत: जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन पूर्व दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • ब्.पूर्वाभाद्रपद की दिशा दक्षिण होती है, अत: पूर्वाभाद्रपद वाले नक्षत्र के दिन दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। दक्षिण के अलावा आप इस नक्षत्र में किसी भी दिशा में यात्रा कर सकते हैं।
  • स्.रोहिणी नक्षत्र की दिशा पश्चिम होती है। इस दिशा में रोहिणी नक्षत्र में यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • द्.उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र की दिशा उत्तर है। जिस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र हो उस दिन उत्तर दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। इस नक्षत्र में उत्तर दिशा के अलावा किसी अन्य नक्षत्र में यात्रा कर सकते हैं।

जिस दिशा में आपको यात्रा करनी हो उस दिशा का नक्षत्र होने पर नक्षत्र शूल लगता है अत: नक्षत्र की दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए।

3.तिथि विचार (Tithi Vichar)
जब आप यात्रा के लिए मुहुर्त का विचार करें तो ध्यान रखें कि तिथि कौन सी है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यात्रा के लिए द्वितीया, तृतीया, पंचमी, दशमी, सप्तमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथि बहुत ही शुभ मानी गयी है। कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि भी यात्रा के संदर्भ में उत्तम मानी जाती है । उपरोक्त तिथियों के अलावा जो भी तिथियां हैं वे यात्रा के लिए शुभ नहीं मानी जाती हैं।

4.करण (Karana)
विष्टि करण होने से भद्रा दोष लगता है, इस स्थिति में यात्रा नहीं करनी चाहिए.

5.वार विचार (Var Vichar)
यात्रा के लिए बृहस्पति और शुक्रवार को सबसे अच्छा माना जाता है। रविवार, सोमवार और बुधवार को यात्रा की दृष्टि से मध्यम माना जाता है। ज्योतिर्विदों के अनुसार मंगलवार और शनिवार यात्रा के लिए शुभ नहीं होते हैं अत: संभव हो तो इस तिथि में यात्रा नहीं करें.

चार भाग में लिखी यह श्रंखला निम्नानुसार है

Comments (3 posted):

guru on 20 January, 2009 07:39:11
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agar mujhe apna bhavishya dekhna ho to main kis prakaar dekhoon,

kundali kese milate hai
jugal on 30 May, 2010 12:15:52
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guwahati yatra for service 0r business jana chahiye ya fir abhi jo chal raha hai use hi chalana chahiye abhi sthiti jyada badhiya nahi hai so mujhe kya karana chahiye
Animesh on 22 November, 2010 09:59:18
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var ke anusar kin disao me yatra karni chayie.

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