निष्क्रमण संस्कार(Nishkraman Sanskar)
निष्क्रमण संस्कार को पोड्ष संस्कार में 6 स्थान प्राप्त है(Nishkraman Sanskar is the sixth place in podash Sanskar) , अर्थात यह संस्कार सनातन धर्म में छठा संस्कार माना जाता है। नामकरण के पश्चात सनातन धर्म में निष्क्रमण संस्कार किया जाता है(This Sanskar is doing after Namkaran Sanskar)।
यह संस्कार शिशु के जन्म से 12 वें दिन से लेकर 4 महीने तक कभी भी किया जा सकता है (This Sanskar is doing Twelveth day from birth till fourth Month)। इस संस्कार का उद्देश्य शिशु को ईश्वर की सुन्दर दुनियां से रूबरू करना है। इस संस्कार के अन्तर्गत शिशु को सूर्य तथा चन्द्रमा की ज्योति दिखाकर उनसे आशीर्वाद लेने का विधान है।
सूर्य से आशीर्वाद का उद्देश्य है कि शिशु को सूर्य देव के समान तेज प्राप्त हो और चन्द्रमा से कोमल हृदय और शीतलता प्राप्त हो। संक्षेप में कहें तो इस संस्कार के द्वारा ईश्वर से यह आशीर्वाद मांगा जाता है कि संतान तेजस्वी होने के साथ ही विनम्र हो। इस शुभ संस्कार को किस मुहुर्त में करना चाहिए इसके लिए ज्योतिषशास्त्री बताते है कि, ज्योतिषशास्त्र में इस संस्कार के लिए मुर्हुत ज्ञात करने हेतु कुछ नियम बताये गये हैं( As per our Aistrology there is some rules to know the Muhurt of this Sanskar) आप इस संस्कार के लिए मुहुर्त का विचार किस प्रकार से कर सकते हैं आइये इसे देखें।
नक्षत्र का आंकलन(Assessment of Nakshatras):
जैसा कि आपने जाना है यह संस्कार 12 वें दिन से 4 महीने तक कभी भी किया जा सकता है परंतु जिस दिन यह संस्कार आप आयोजित करें उस दिन ध्यान रखें कि नक्षत्र के रूप में श्रवण(Sharavan), मृगशिरा(Mrigshira), हस्त(Hast), अनुराधा(Anuradha), पुष्य(Pushaya), पुनर्वसु(Punarvasu), अश्विनी(Ashvini), रेवती(Raivti) या घनिष्ठा(Ghanishta) में से कोई भी नक्षत्र मौजूद हो। इन नक्षत्रों को इस संस्कार हेतु बहुत ही शुभ माना जाता है।
तिथि(Date):
नक्षत्र के समान तिथि का आंकलन भी इसमें बहुत आवश्यक होता है। ज्योतिषशास्त्र कहता है निष्क्रमण संस्कार के लिए सभी तिथि शुभ होती है (According to the Aistrology all Date are very Auspicious for this Sanskar)परंतु रिक्ता यानी चतुर्थ, नवम व चतुर्दशी तिथि इसके लिए शुभ नहीं मानी जाती है (Ninerh and Fourth date are Inauspicious for this Sanskar)ज्योतिष विधा में इस तिथि का त्याग करने हेतु परामर्श दिया जाता है। इस शुभ शुभ संस्कार के लिए अमावस्या तिथि का त्याग करना चाहिए ऐसी सलाह भी दी जाती है। रिक्ता(Rikta) और अमावस्या(Amavasya) को छोड़कर आप किसी भी तिथि में यह संस्कार कर सकते हैं।
वार(Day):
रविवार, सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार इस संस्कार के लिए शुभ माने गये हैं(Sunday,Monday,Wednesday,Thursday and Friday are very Auspicious for this Sanskar)। मंगलवार और शनिवार को इस संस्कार के लिए अच्छा नहीं माना जाता(Tuesday and saturday is good for this sanskar)है। आप इन दो वारों को छोड़कर किसी भी वार को अगर उपरोक्त तिथि व नक्षत्र हो तो यह संस्कार सम्पन्न कर सकते हैं।
निषेध(Nishadeh):
ज्योतिषशास्त्र में निष्क्रमण संस्कार के लिए तृतीय, पंचम व सप्तम का तारा शुभ नहीं माना गया है(As per our Aistrology Third, Fifth or Seventh Star is very Auspicious)। भद्रा तिथि को भी इस कर्म हेतु अशुभ कहा गया है(Bhadra Tithi is very Inauspicious for this Sanskar)। जिस दिन अशुभ योग हो उस दिन यह संस्कार नही करना चाहिए ऐसा ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है।
विशेष(vishaesh):
निष्क्रमण संस्कार के साथ ही इस अवधि में कई उपसंस्कार भी किये जाते हैं जिसकी चर्चा भी उल्लेखनीय है(Another Sanskar is also doing with th mean time of Nishkarma Sanskar)। जातकर्म और निष्क्रमण के मध्य होने वाले उपसंस्कारों में षष्टी पूजन जो कि जन्म से छठे दिन होता है इसमें देवी कात्यायनी दुर्गा को प्रसन्न करने हेतु विधान किया जाता है। शिशु के जन्म से दसवें, बारहवें, सोलहवें, अठारहवें अथवा बत्तीसवें दिन एक संस्कार किया जाता है जिसे डोला आरोहन(Dola Arohan) के नाम से जाना जाता है। इन उपसंस्कारों के लिए भी वही नक्षत्र, तिथि और वार शुभ माने जाते हैं जो निष्क्रमण संस्कार के लिए कहे गये हैं। इन संस्कारों के लिए सूर्य से पांच नक्षत्र आगे व सात नक्षत्र पीछे के नक्षत्र शुभ गये हैं ।
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