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पात दोष (Paat Dosha)
विवाह के लिए मुहुर्त का विचार करते समय कुछ दोषों से बचने की जरूरत होती है, इन्हीं में से एक दोष है पात दोष (As per astrology you should take care from some dosha related from marriage, that is Paat Dosha)। पात दोष कैसे लगता है आइये इसे समझें। चन्द्रमा जिस नक्षत्र में हो उस नक्षत्र के साथ अगर हर्षण (Harsan), वैधृति (Vaidhiriti), व्यातिपात (Vyatipaat), शूल व गण्ड (Shool or Gand) योग बने तो पात दोष लगता है। उपरोक्त योग सूर्य व चन्द्रमा की दूरी से बनते हैं। अत: पात दोष का आंकलन करने के लिए विवाह वाले दिन के नक्षत्र की सूर्य के नक्षत्र से तुलना की जाती है और इस दोष का विचार किया जाता है।
चन्द्र और सूर्य के नक्षत्र किन स्थितियों में होते हैं तो यह दोष लगता है आइये इसे देखे:
1. चन्द्र रोहिणी नक्षत्र में हो और सूर्य आर्द्रा, पुनर्वसु, शतभिषा, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा और मूल नक्षत्र में हो तो पात दोष लगता है (Paat Dosha created when the moon situated in Rohini Nakshatra or Sun in Punarvashu, Satvisha, Purvafalguni, Chitra, and Mool Nakshatra) ।
2.चन्द्र अगर मृगशिरा नक्षत्र में हो और सूर्य भी मृगशिरा अथवा आर्दा, ज्येष्ठा, घनिष्ठा, मघा अथवा हस्त नक्षत्र में हो तो पात दोष बनता है।
3.चन्द्र का नक्षत्र हो मघा और सूर्य अश्विनी, मृगशिरा, ज्येष्ठा, पुष्य, हस्त अथवा रेवती नक्षत्र में हो तो यह दोष लगता है।
4.उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में चन्द्रमा हो और कृतिका, आर्द्रा, विशाखा, पू. फा., उ. फा. अथवा पूर्वाभाद्रपद में सूर्य हो तो पात दोष बनता है जिससे विवाह संस्कार नहीं किया जाना चाहिए।
5.हस्त नक्षत्र में चन्द्रमा हो सूर्य नक्षत्र में भरणी, मृगशिरा, शतभिषा, पूर्वाभाद्र., स्वाती या मघा हो तो यह दोष उत्पन्न होता है।
6.स्वाति नक्षत्र में चन्द्र विराजमान हो और कृतिक, श्रवण, घनिष्ठा, पुष्य, हस्त या रेवती नक्षत्र में सूर्य विराजमान हों तो यह दोष कायम होता है।
7.अनुराधा नक्षत्र में चन्द्रमा हो और सूर्य नक्षत्र में अश्विनी, आर्दा, उ.षा. पूर्वाफा., पू.षा., पूर्वाभाद्रपद हो तो विवाह मुहुर्त पात दोष से पीड़ित होता है।
8.चन्द्रमा अगर शादी वाले दिन मूल नक्षत्र में हो और सूर्य उस दिन रोहिणी, ज्येष्ठा, घनिष्ठा, आश्लेषा, मूल, उत्तराभाद्रपद में हो तो यह विवाह के शुभ मुहुर्त नहीं होता है क्योकि इसमें पात दोष लगता है।
9.विवाह के दिन चन्द्रमा अगर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में हों और सूर्य भरणी, पुनर्वसु, शतभिषा, विशाखा, अनुराधा अथवा उ.षा. नक्षत्र में हो तो विवाह मुहुर्त में पात दोष पैदा करता है (Date of Marriage is affected from Paat dosha when the moon situated in Uttrasadha or Sun in Bharni, Punarvashu, Satvisha, Vishakha, Anuradha or Uttrasadha)।
10.विवाह के दिन अगर चन्द्रमा उत्तराभाद्रपद में हो और सूर्य भरणी, शतभिषा, विशाखा, उ.फा., मूल या पूर्वा फा. नक्षत्र में हो तो विवाह मुहुर्त पात दोष से पीड़ित होता है।
11.विवाह के दिन चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में स्थित हो और सूर्य अश्वनी, मघा, घनिष्ठा, ज्येष्ठा, स्वाति या पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में हो तो इस मुहुर्त के पात दोष से पीड़ित होने के कारण विवाह नहीं करने की सलाह दी जाती है।
पात दोष के बाद युति दोष (Yuti Dosha) आता है जो विवाह मुहुर्त को पीड़ित करता है, आइये देखें कि कैसे बनता है व कैसा प्रभाव उत्पन्न करता है युति दोष।
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