पुंसवन संस्कार(PunsvanSanskar)
संस्कार का प्रयोजन यह है कि व्यक्ति को समाज के योग्य बनाया जाए(purpose of punsvan Sanskar is to enable a person for the society), उनमें अच्छे गुण हों जिससे व्यक्ति और समाज को लाभ मिल सके और विकास का क्राम आगे बढ़े। पुंसवन संस्कार गर्भाधान के बाद आने वाला संस्कार है जो गर्भ धारण के तीन महीने पश्चात किया जाता है।
पुंसवन संस्कार तीन महीने के पश्चात इसलिए आयोजित किया जाता है क्योंकि गर्भ में तीन महीने के पश्चात गर्भस्थ शिशु का मस्तिष्क विकसित होने लगता है(Punsvan sanskar is be perform after three month of pregnancy)। इस समय पुंसवन संस्कार के द्वारा गर्भ में पल रहे शिशु के संस्कारों की नींव रखी जाती है। मान्यता के अनुसार शिशु गर्भ में सीखना शुरू कर देता है, इसका उदाहरण है अभिमन्यु जिसने माता द्रौपदी के गर्भ में ही चक्रव्यूह की शिक्षा प्राप्त कर ली थी।
संस्कारों एवं सभी प्रकार के कर्मों के लिए वैदिक ज्योतिष में शुभ मुहुर्त बताया गया है और अशुभ मुहुर्त से बचने के लिए कहा गया है। पुंसवन संस्कार के लिए मुहुर्त का विचार करते समय हमें किन किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए आइये इसे समझें।
नक्षत्र(Nakshatras):
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पुंसवान संस्कार उस दिन करना चाहिए जिस दिन का नक्षत्र मृगशिरा(Mrighshira),पुष्य(pushaya),मूल(Mool), श्रवण(Sharavan),पुनर्वसु(Punarvashu), हस्त(Hast), रोहिणी(Rohini), उत्तरा फाल्गुनी (Utraphalguni), उत्तराषाढ़ा (Utrashada) या उत्तराभाद्रपद(Utra Bhadrpad) हो। इन नक्षत्रों को पुंसवान संस्कार के लिए बहुत ही अच्छा और शुभ माना जाता है(These Nakshatas are very Auspicious for the Punsvan Sanskar)। जिस दिन इन नक्षत्रों में से कोई नक्षत्र हो यह संस्कार सम्पन्न किया जा सकता है।
तिथि(Date): पुंसवान संस्कार के लिए तिथि का विचार भी आवश्यक होता है(Consideration of Date for Punsvan Sanskar)। ज्योतिषशास्त्र कहता है कि प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीय, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है(These dates are very Auspicious for this Sanskar)। जिस दिन इनमे से कोई तिथि हो और ऊपर बताए गये नक्षत्रों में से कोई नक्षत्र हो उस दिन का विचार इस संस्कार हेतु किया जा सकता है। वार(Day): मुहुर्त में वार भी काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है(Days are very important for the sanskar in Muhurta) । इस संस्कार हेतु शुभ वार पर गौर करें तो रविवार, मंगलवार और बृहस्पतिवार उत्तम माना गया है(Sunday,Tuesday and Thursday are very Auspicious for this Sanskar)। लग्न(Ascendent): इस संस्कार के लिए लग्न का विचार करते समय देखना चाहिए कि लग्न के केन्द्र में (1, 4, 7, 10) और त्रिकोण (5, 9) में शुभ ग्रह तथा (3, 6, 11) में पाप ग्रह मौजूद हों, तो यह उत्तम होता है। मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, एवं कुम्भ राशि के लग्न व नवमांश इस हेतु बहुत ही उत्तम बताए गये हैं। निषेध(Nishedh): ज्योतिषशास्त्री बताते हैं कि पुंसवान संस्कार उन स्थितियों में नहीं करना चाहिए जबकि जन्म चन्द्र से 4, 8, 12 वें भाव में चन्द्रमा हो एवं 3, 5 एवं 7 का तारा हो। ज्योतिष के इन सिद्धान्तों को ध्यान में रखकर आप पुंसवान संस्कार सम्पन्न करें तो आपकी संतान के लिए उत्तम स्थिति रहेगी।
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