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शुभ् कार्यों के लिए अशुभ हैं सम्वर्तक और दग्ध योग ( Samvartak yoga and dagdha yoga are inauspicious for auspicious work
अभी तक योग की श्रृंखला में आप दो अशुभ योग के बारे में जान चुके हैं। अशुभ योग की श्रृंखला में तिथि और वार से बनने वाले योग के अन्तर्गत अगला योग आता है सम्वर्तक योग । ज्योतिषशास्त्र में सम्वर्तक योग और दग्ध योग सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए वर्जित हैं (Astrology says that Samvartak yoga and Dagdha Yoga are Inauspicious for auspicious work)। इस योग के रहते कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
सम्वर्तक योग में आप कोई भी शुभ काम न करे इसके लिए आपको यह जानना होगा कि सम्वर्तक योग किस प्रकार बनता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब पहली तिथि अर्थात प्रतिपदा बुधबार के दिन उपस्थित हो तब अशुभ अशुभ सम्वर्तक योग बनता है (Samvartak Yoga is the combination of Pratipada and Wednesday)। सम्वर्तक योग के लिए एक अन्य स्थिति भी जिम्मेवार मानी जाती है। वह स्थिति है रविवार के दिन सप्तमी तिथि का प्रवेश (The Sunday on which Saptmi tithi enter it generates samvartak yoga)। अब आप सम्वर्तक योग किस प्रकार बनता है यह जान चुके होंगे और कोई भी शुभ कार्य इस योग में नहीं करेंगे ऐसी आशा की जा सकती है।
दिन और तिथि के संयोग से बनने वाले योग के क्रम में अगला अशुभ योग है दग्ध योग (Dagdha yoga)। अब हम इसी योग के विषय में अपनी चर्चा को आगे ले चलते हैं (Dagdha tithi is the result of combinaton between day and date)।
दग्ध योग हफ्ते में किसी भी दिन बन सकता है अगर तिथि और वार का संयोग बने (Dagdha yoga would be generated every day if day and date make proper combination)। इस योग के लिए किस वार के साथ किसी तिथि का संयोग आवश्यक होता है आइये इसे देखें।
1.जब रविवार के दिन द्वादशी तिथि पड़े तब इस योग का निर्माण होता है (When Dwadshi tithi enter on Sunday its result is Dagdha yoga)।
2.सोमवार का दिन हो और एकादशी तिथि पड़े तब यह अशुभ योग बनता है (If it is sunday and tithi is Eleventh, Combination of this date and Tithi generates Inauspicious Dagdha yoga)।
3.मंगलवार का दिन हो और तिथि हो पंचमी इस बार और तिथि के संयोग से भी दग्ध योग बनता है।
4.जिस बुधवार को तृतिया तिथि आए वह दिन शुभ काम के लिए अच्छा नहीं होता है क्योंकि इस स्थिति में अशुभ दग्ध योग बनता है।
5.षष्टी तिथि हो और दिन हो गुरूवार का तो इस संयोग का फल दग्ध योग होता है।
6.शुक्रवार के दिन जब कभी अष्टमी तिथि का मिलाप होता है तब दग्ध योग का निर्माण होता है।
7.शनिवार के दिन जब नवमी की तिथि हो तब आपको कोई शुभ काम करने की इज़ाजत नहीं दी जाती है क्योंकि इस स्थिति में शुभ कार्यों में अशुभ प्रभाव प्रदान करने वाला योग बनता है।
दग्ध योग के विषय में कहा जाता है कि इस योग में यात्रा नहीं करनी चाहिए क्योंकि यात्रा के सम्बन्ध में यह अत्यंत अशुभ होता है (Dagdha Tithi is inauspicious for travel)।
वार और तिथि के संयोग से बनने वाला अगला योग है "विष योग"। विष योग कैसे बनता है तथा इसका कैसा प्रभाव है इसे जानने के लिए पढ़ें विष योग.....
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