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समवर्तन संस्कार(Samvartan Sanskar)
आप महसूस कीजिए कि आप कई वर्षों से मां पिता से दूर रहकर छात्रावास में अध्ययन कर रहे हैं और जब आप घर लौटते हैं तो उस समय घर में कैसा माहौल होता है। आप देखेंगे कि घर में मां पिता एवं परिवार के अन्य सभी सदस्य हार्दिक प्रसन्नता एवं उल्लास के साथ आपका स्वागत करते हैं। ठीक इसी प्रकार की स्थिति समवर्तन संस्कार की कही जा सकती है।
समवर्तन संस्कार तब किया जाता था जब बालक गुरूकुल से शिक्षा प्राप्त करके घर आता था (when boys returned from education, a sanskar was performed that is known as samvartan sanskar)। इस संस्कार को करने का अर्थ यह है कि बालक ने अपनी शिक्षा पूरी कर ली है, और उसने ब्रह्मचर्य आश्रम को पूरा कर लिया है (samvartan sanskar Means student have completed their Education and brahamcharya ashram)। इस संस्कार के साथ यह भी स्पष्ट होता था कि अब बालक युवावस्था में प्रवेश करके विवाह करने लायक हो गया है। इस संस्कार में बालक (विद्यार्थी) स्नान के पश्चात गुरू को गुरू दक्षिणा देते एवं उन्हें संसार की वस्तुओं एवं सिद्धान्तों (नियमों) से अवगत कराया जाता। ब्रह्मचर्य के सभी प्रतीकों को चलते पानी (नदी में प्रवाहित कर दिया जाता।
वर्तमान समय की बात करें तो इस समय यह संस्कार सही समय पर नहीं हो पाता है (In the modern era Samvartan Sanskar is not performed at the right time or right age)। जहां यह संस्कार होता भी है वह केवल औपचारिकता निभाने के लिए किया जाता है।
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