उपनयन संस्कार (Upnayan Sanskar)
यज्ञ+उपवीत अर्थात यज्ञोपवीत संस्कृति का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है यज्ञ द्वारा पवित्र किया गया सूत्र। इस सूत्र को जनेऊ कहते हैं (Yagyo Pavit is the sanskrit word which means a tag which is sacred by Yagyas , That tag is known as Jenau) ।
यज्ञोपवीत को एक अन्य नाम "उपनयन" से भी जाना जाता है। इस संस्कार को हिन्दु समाज में महत्व दिया गया है (yagyopavit sanskar is important in Hindu Religion)। प्राचीन काल में इस संस्कार के पश्चात ही व्यक्ति को वेद की शिक्षा ग्रहण करने योग्य माना जाता था। इस संस्कार के साथ व्यक्ति को "द्विज" (जिसने दो बार जन्म लिया हो) की मान्यता मिलती थी। यज्ञोपवीत संस्कार के विषय में शास्त्र कहता है कि इसमें गुरू , बालक को सर्वप्रथम गायत्री मन्त्र के बारे में बताते हैं( According to our Shastra firstly give gayatri mantra to that person for which Yagyo pavitra sanskar is held on)। वेदों का ज्ञान देते हैं तथा ब्रह्मचर्य आश्रम के सिद्धान्त एवं व्यावहारिक ज्ञान के बारे में बताते हैं। इस संस्कार में बालक तीन धागों से बना जनेऊ पहनता है, जिसमें प्रत्येक धागा एक ऋण का प्रतिनिधित्व करता है। प्रथम धागा पितृ ऋण(First tag is for Pitri rin), द्वितीय धागा गुरू ऋण(Second tag is guru rin) और तृतीय धागा देव ऋण(Third tag is for Dev rin) का प्रतीक होता है। इन तीन धागों के अतरिक्त पारिवारिक संस्कारवश तीन धागे और पहनाये जाते हैं, यह संस्कार बालक के विद्यार्थी जीवन का नया चरण होता है।
समयावधि (Time):
शास्त्रों के मुताबिक जन्म से आयु की गिनती करने पर उपनयन संस्कार के लिए ब्राह्मण की आयु 5 या 8 वर्ष, क्षत्रिय की 6 या 11 वर्ष तथा वैश्य के लिए 8 या 12 वर्ष होती है। यज्ञोपवीत संस्कार के लिए अधिकतम आयु ब्रह्मणों के लिए 16 वर्ष, क्षत्रीय के लिए 22 वर्ष और वैश्य के लिए 24 वर्ष होती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मकर, कुम्भ, मीन, मेष, वृष और मिथुन सौर मास शुभ कहे गए हैं जिनमें से मीन सौर मास सर्वोत्तम माना जाता है। शास्त्र कहता है कि सबसे बड़े पुत्र का उपनयन तब करना चाहिए जब सूर्य वृष राशि(Sun is for Taurus Rashi) में हो। सूर्य के मिथुन राशि(sun of Gemenie Rashi) में होने पर क्षत्रिय और वैश्य का यज्ञोपवीत करना ठीक रहता है।
नक्षत्र (Nakshatras):
यज्ञोपवीत संस्कार के लिए मुहुर्त का आंकलन करने के लिए सबसे पहले देखा जाता है कि नक्षत्र कौन सा है(Before assessment of yagyo pavit sanskar firstly consider the Nakshatras)। अगर नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रोहिणी, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, हस्त, अश्विनी, पुष्य अभिजीत, स्वाती, पुनर्वसु, श्रवण, घनिष्ठा और शतभिषा हो तो शुभ माना जाता है(All this Nakshatras is very Auspicious for this Sanskar) । गौर तलब है कि ब्राह्मण के लिए पुनर्वसु शुभ नहीं होता है(।
तिथि (Date):
इस संस्कार के लिए शुभ तिथि के रूप मे द्वितीया, तृतीया, पंचमी, दशमी, एकादशी और द्वादशी तथा कृष्णपक्ष द्वितीया, तृतीया और पंचमी तिथि का नाम लिया जाता है। अपवाद स्वरूप आषाढ़(Ashad) शुक्ल पक्ष की द्वितीया(Dwitaya for Shukal Paksh), पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी(Ekadashi of Posh Shukal Paksh), माघ शुक्ल पक्ष की द्वादशी(Dwadashi of Magh Sukal paksh) को इस संस्कार के लिए शुभ नही माना जाता है(All thes are very Auspicious for this Sanskar)। इसके अलावा रिक्ता तिथियां (चतुर्थ, नवम, चतुर्दशी) व प्रतिपदा, सप्तमी, अष्टमी, त्रयोदशी, पूर्णिमा व अमवस्या तिथि भी इस संस्कार हेतु वर्जित है।
वार(Day):
उपनयन संस्कार के लिए रविवार, सोमवार, बुधवार, बृहस्पति, शुक्रवार को उत्तम माना जाता है(Sunday,Monday,Wednesday,Thursday and Friday are very good for Upnayan Sanskar)।
लग्न(Ascendent):
उपनयन मुहुर्त के लिए बलवान लग्न शुभ माना जाता है(Brave Ascendent is very Auspicious for Upnayan Muhurat) जिसके केन्द्र (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, दशम) तथा त्रिकोण (पंचम, नवम) भाव में शुभ ग्रह तथा तृतीय, षष्टम व एकादश में पाप ग्रह स्थित हों तो उपनयन संस्कार के लिए शुभ माना जाता है. (If Male fic Planet is situated in third,sixth , eleventh house so it is very Auspicious for Upnayan Sanskar) । लग्नेश, चन्द्रमा, गुरू व शुक्र छठे, आठवें भाव में न हो तथा यदि चन्द्रमा लग्न, स्वराशि या उच्च राशि में हो तो शुभ स्थिति होती है। उपनयन लग्न एवं चन्द्रमा बुध, बृहस्पति या शुक्र नवमांश में होना इस संस्कार हेतु सर्वथा उपयुक्त है।
निषेध (Nishedh):
ज्योतिषशास्त्री बताते हैं कि उपनयन संस्कार के लिए जन्म चन्द्र से गोचर में स्थित चतुर्थ, अष्टम, द्वादश वां चन्द्र एवं तृतीय, पंचम एवं सप्तम तारा से बचना चाहिए। चन्द्रमा और तारा की शुद्धि इस संस्कार हेतु बहुत ही जरूरी है।
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